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मानव कल्याण है सभी धर्मों का मूल
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Wed, 17 Feb 2016 11:24 PM IST
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संगीत विभाग की ओर से आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में दूसरे दिन बुधवार को सर्वधर्म सम्मेलन में विद्वानों ने मानव कल्याण को सभी धर्मों का मूल बताया। थाइलैंड के प्रोफेसर चिरपट प्रपंड विद्या ने बौद्ध धर्म के मूल सिद्धांतों और आचार मीसांसा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जो धर्म के सत्य को देखता है वही बुद्ध को देखता है।
प्रोफेसर राजलक्ष्मी वर्मा ने कहा कि समाज में समानता की स्थापना के लिए धर्म की महती भूमिका है। सभी धर्मों के मूल तत्व एक हैं। उपासना तथा पूजा पद्धति के आधार पर दिखने वाला वैविध्य धर्म का केवल वाह्य स्वरूप है। इसकी आत्मिक चेतना और नैतिक आयाम सभी धर्मों में एक रूप है। बीएचयू के प्रोफेसर विंध्येश्वरी प्रसाद मिश्रा ने वैदिक धर्म के बारे बताया। प्रोफेसर फजले इमाम ने इस्लाम धर्म को लेकर भ्रांतियों को दूर किया। उन्होंने कहा कि मानव जीवन के मर्म का नाम धर्म है। उन्हाेंने स्पष्ट किया कि इस्लामिक धर्म ग्रंथों में कहीं भी जेहाद का उल्लेख नहीं है।
सरदार गुरुशरण सिंह ने कहा कि सभी धर्म मनुष्य ने बनाए हैं और इसका उद्देश्य सभी का कल्याण है। फादर लियो सिक्वेइरा ने कहा कि भारत में अनेक भाषाओं और आचार-विचार वाले लोग एक साथ रहते हैं। यही भारत की सबसे बड़ी विशेषता है। गुरुप्रसाद मदन ने बुद्ध की करुणा एवं अहिंसा के उपदेश की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। प्रोफेसर पीसी जैन ने भगवान महावीर केउपदेशों पर विस्तार से चर्चा की। विभागाध्यक्ष प्रोफेसर किश्वर जबीं नसरीन ने कहा कि मानवता को अंगीकार करते हुए नेक इंसान बनने की आवश्यकता है। विभिन्न सत्रों में कुल 78 शोध पत्र पढ़े गए। डॉ.रामसेवक दुबे ने संचालन तथा प्रोफेसर शंकरदयाल द्विवेदी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। सम्मेलन में प्रोफेसर रामकिशोर शास्त्री, प्रोफेसर कौशल किशोर श्रीवास्तव, प्रोफेसर उमाकांत यादव आदि शामिल रहे।
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प्रोफेसर राजलक्ष्मी वर्मा ने कहा कि समाज में समानता की स्थापना के लिए धर्म की महती भूमिका है। सभी धर्मों के मूल तत्व एक हैं। उपासना तथा पूजा पद्धति के आधार पर दिखने वाला वैविध्य धर्म का केवल वाह्य स्वरूप है। इसकी आत्मिक चेतना और नैतिक आयाम सभी धर्मों में एक रूप है। बीएचयू के प्रोफेसर विंध्येश्वरी प्रसाद मिश्रा ने वैदिक धर्म के बारे बताया। प्रोफेसर फजले इमाम ने इस्लाम धर्म को लेकर भ्रांतियों को दूर किया। उन्होंने कहा कि मानव जीवन के मर्म का नाम धर्म है। उन्हाेंने स्पष्ट किया कि इस्लामिक धर्म ग्रंथों में कहीं भी जेहाद का उल्लेख नहीं है।
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सरदार गुरुशरण सिंह ने कहा कि सभी धर्म मनुष्य ने बनाए हैं और इसका उद्देश्य सभी का कल्याण है। फादर लियो सिक्वेइरा ने कहा कि भारत में अनेक भाषाओं और आचार-विचार वाले लोग एक साथ रहते हैं। यही भारत की सबसे बड़ी विशेषता है। गुरुप्रसाद मदन ने बुद्ध की करुणा एवं अहिंसा के उपदेश की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। प्रोफेसर पीसी जैन ने भगवान महावीर केउपदेशों पर विस्तार से चर्चा की। विभागाध्यक्ष प्रोफेसर किश्वर जबीं नसरीन ने कहा कि मानवता को अंगीकार करते हुए नेक इंसान बनने की आवश्यकता है। विभिन्न सत्रों में कुल 78 शोध पत्र पढ़े गए। डॉ.रामसेवक दुबे ने संचालन तथा प्रोफेसर शंकरदयाल द्विवेदी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। सम्मेलन में प्रोफेसर रामकिशोर शास्त्री, प्रोफेसर कौशल किशोर श्रीवास्तव, प्रोफेसर उमाकांत यादव आदि शामिल रहे।
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