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तय मानक से तीन गुना बढ़ा प्रदूषण
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 14 Feb 2016 11:20 PM IST
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शहरों में लगातार बढ़ता कंकरीट का जंगल, वाहनों की संख्या में तेजी से हो रही बढ़ोतरी और औद्योगीकरण से पर्यावरण में प्रदूषण की मात्रा तेजी से बढ़ रही है। यह हाल पूरे उत्तर प्रदेश का है और इलाहाबाद भी इससे अछूता नहीं है। यहां औद्योगीकरण को छोड़ दे तो बीते कई वर्षों में इमारतों का जाल बिछ गया है। बड़ी संख्या में बहुमंजिला इमारतों के निर्माण सहित चार-पांच वर्षों में वाहनों की संख्या में भी तेजी से बढ़ोतरी हुई है।
नतीजा है कि यहां पीएम-10 का स्तर तय मानक से दो से तीन गुना तक बढ़ गया है। इलाहाबाद में स्थिति इसलिए भी और खराब है क्योंकि यहां सीवर लाइन बिछाने के दौरान सड़कों की खोदाई के बाद फैली मिट्टी से उड़ती धूल ने पूरे शहर को अपने जद में ले लिया है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक पीएम-10 का मानक 2.50 से 10 माइक्रान के बीच है। इलाहाबाद समेत लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, गाजियाबाद, मेरठ, आगरा, बरेली, मुरादाबाद, अलीगढ़, गोरखपुर, सहारनपुर, झांसी जैसे शहरों में प्रदूषण की मात्रा में लगातार इजाफा हो रहा है। अकेले इलाहाबाद में पीएम-10 की मात्रा दो से तीन गुना तक बढ़ गई है।
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पर्यावरण में पार्टीकुलेट मैटर-10 (पीएम-10) के स्तर में तेजी से वृद्धि हुई है जिसका दुष्प्रभाव नागरिकों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। दिल्ली में खतरनाक स्तर तक पहुंच चुके पीएम-10 से सबक लेते हुए मुख्य सचिव आलोक रंजन ने करीब दो माह पहले सभी जिलों के डीएम और एसएसपी को इस संबंध में सख्त आदेश जारी किए थे लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा है। कूड़ा जलाने पर रोक के अलावा अन्य बिंदुओं पर अब तक सख्त कदम नहीं उठाए गए। अब भी जिला प्रशासन नहीं चेता तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
जिन बिदुंओं पर दिए गए सख्ती के निर्देश
0 परिवहन, पुलिस एवं पर्यावरण विभाग की ओर से बिना प्रदूषण प्रमाण प्राप्त के चल रहे वाहनों की जांच
0 प्रदूषणकारी वाहनों का पंजीयन निरस्त करना तथा प्रदूषण जांच केंद्रों की गुणवत्ता की जांच
0 जहां सीएनजी सवारी वाहन संचालित हो रहे हैं, वहां डीजल वाहनों पर पूरी तरह रोक
0 ट्रैफिक जाम की समस्या से नियंत्रण के लिए ऐसे स्थानों को चिह्ंित कर कार्रवाई
0 निर्माण स्थलों पर अनावश्यक धूल न उड़े, इसका विशेष ध्यान रखा जाए
0 पौधरोपण कराया जाए तथा कूड़ा-सूखी पत्तियां न जलाई जाए
0 कोयला, लकड़ी बुरादा का प्रयोग को हतोत्साहित करना
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नतीजा है कि यहां पीएम-10 का स्तर तय मानक से दो से तीन गुना तक बढ़ गया है। इलाहाबाद में स्थिति इसलिए भी और खराब है क्योंकि यहां सीवर लाइन बिछाने के दौरान सड़कों की खोदाई के बाद फैली मिट्टी से उड़ती धूल ने पूरे शहर को अपने जद में ले लिया है।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक पीएम-10 का मानक 2.50 से 10 माइक्रान के बीच है। इलाहाबाद समेत लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, गाजियाबाद, मेरठ, आगरा, बरेली, मुरादाबाद, अलीगढ़, गोरखपुर, सहारनपुर, झांसी जैसे शहरों में प्रदूषण की मात्रा में लगातार इजाफा हो रहा है। अकेले इलाहाबाद में पीएम-10 की मात्रा दो से तीन गुना तक बढ़ गई है।
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पर्यावरण में पार्टीकुलेट मैटर-10 (पीएम-10) के स्तर में तेजी से वृद्धि हुई है जिसका दुष्प्रभाव नागरिकों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। दिल्ली में खतरनाक स्तर तक पहुंच चुके पीएम-10 से सबक लेते हुए मुख्य सचिव आलोक रंजन ने करीब दो माह पहले सभी जिलों के डीएम और एसएसपी को इस संबंध में सख्त आदेश जारी किए थे लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा है। कूड़ा जलाने पर रोक के अलावा अन्य बिंदुओं पर अब तक सख्त कदम नहीं उठाए गए। अब भी जिला प्रशासन नहीं चेता तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
जिन बिदुंओं पर दिए गए सख्ती के निर्देश
0 परिवहन, पुलिस एवं पर्यावरण विभाग की ओर से बिना प्रदूषण प्रमाण प्राप्त के चल रहे वाहनों की जांच
0 प्रदूषणकारी वाहनों का पंजीयन निरस्त करना तथा प्रदूषण जांच केंद्रों की गुणवत्ता की जांच
0 जहां सीएनजी सवारी वाहन संचालित हो रहे हैं, वहां डीजल वाहनों पर पूरी तरह रोक
0 ट्रैफिक जाम की समस्या से नियंत्रण के लिए ऐसे स्थानों को चिह्ंित कर कार्रवाई
0 निर्माण स्थलों पर अनावश्यक धूल न उड़े, इसका विशेष ध्यान रखा जाए
0 पौधरोपण कराया जाए तथा कूड़ा-सूखी पत्तियां न जलाई जाए
0 कोयला, लकड़ी बुरादा का प्रयोग को हतोत्साहित करना