मित्र प्रकाशन को फिर से शुरू करने की अर्जी
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शहर से प्रकाशित चर्चित पाक्षिक पत्रिका माया सहित कई पात्रिकाओं का प्रकाशन करने वाले समूह मित्र प्रकाशन को फिर से शुरू करने की मांग की गई है। कंपनी के एक निदेशक दीपक मित्रा ने हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर कंपनी को फिर से शुरू करने की मांग की है। कोर्ट ने उनकी अर्जी पर आधिकारिक विघटक से जवाब मांगा है।
उनके वकील निमाई दास ने बताया कि कंपनी कई कारण से बीमार हो गई। जिसके बाद इसे बंद करने का निर्णय लिया गया। कोर्ट के आदेश से इसके विघटन की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई। ऑफिशियल लिक्विडेटर कंपनी की परिसंपत्तियों पर नियंत्रण कर रहे हैं। दीपक मित्रा का कहना है कि पिछले दस वर्षों से वह इस कंपनी को पुनर्जीवित करने के प्रयास में लगे हैं। कर्मचारियों का जो भी बकाया है, उसका भुगतान कर दिया जाएगा। कंपनी के पास मूलभूत ढांचा अब भी मौजूद है। कुछ निवेशकों से बात हुई है जो कंपनी फिर से शुरू करने में दिलचस्पी ले रहे हैं। कंपनी फिर से शुरू होने से कंपनी के दो सौ से अधिक कर्मचारियों को फायदा होगा। समूह द्वारा माया पात्रिका, मनोहर कहानियां, सत्यकथा, मनोरमा, प्रो इंडिया जैसी कई पत्रिकाओं का प्रकाशन किया जाता रहा है।