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बीएसपी से दूर हो रहे ब्राह्मण चेहरे
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 11 Feb 2016 01:57 AM IST
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बहुजन समाज पार्टी ने प्रदेश के 2007 के विधान सभा चुनाव में जिस सोशल इंजीनियरिंग फंडे से सत्ता हासिल की अब उसे ही तोड़ने पर लगी है। पार्टी से ब्राह्मण चेहरे लगातार हटाए जा रहे हैं। यह सिलसिला 2012 के विधान सभा चुनाव से पहले शुरू हुआ था, जो अभी तक चल रहा है। हालांकि यह पार्टी का आंतरिक मामला है, लेकिन लगातार ब्राह्मणों के पार्टी से बाहर किए जाने से लोग अब मानने लगे हैं कि पार्टी पुराने ढर्रे पर लौटती नजर आ रही है।
सपा ने यादव और मुस्लिम का जहां गठजोड़ बनाया वहीं बहुजन समाज पार्टी ने 2007 के विधान सभा चुनाव में सोशल इंजीनियर का खेल खेला। दलितों और ब्राह्मणों का गठजोड़ बनाया। अपने इस गठजोड़ से वह पूरी तरह से सफल रही और सत्ता हासिल की। बहुजन समाज पार्टी की संभावनाओं को देखते हुए ब्राह्मणों ने भी बीजेपी और कांग्रेस से कन्नी काटते हुए बसपा का पूरा साथ दिया।
बदले में बसपा ने भी ब्राह्मणों को कई उच्च पदों पर बैठाया। ब्राह्मणों के साथ उसका यह गठजोड़ अगले विधान सभा चुनाव 2012 में भी देखने को मिला लेकिन इस चुनाव में बीएसपी का दांव चल नहीं पाया। बीएसपी ने कई ब्राह्मण चेहरों को किसी न किसी बहाने से या फिर आरोप लगाकर बाहर का रास्ता दिखा दिया। इसका खामियाजा उसे 2012 के ही चुनाव में भुगतना पड़ा। बाद में चुनावी समीक्षा के बाद पार्टी मुखिया ने ब्राह्मणों पर आरोप भी लगाया। पार्टी मुखिया ने कहा था कि सवर्णों ने उनका पूरा साथ नहीं दिया। 2012 में सपा सत्ता में आ गई।
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चुनाव बाद बसपा ने पूर्व मंत्री राकेश धर त्रिपाठी, उनके भतीजे डॉ. पंकज को बाहर का रास्ता दिखा दिया। इसके बाद अशोक बाजपेयी को पार्टी ने निशाने पर लिया। उन्हें और उनके बेटे हर्ष बाजपेयी को भी निष्काषित कर दिया। बताते हैं कि उनके खिलाफ मंगलवार को पार्टी से निकाले गए एमएलसी सूरजभान ने ही शिकायत की थी। पार्टी ने उनकी शिकायत पर अशोक बाजपेयी के खिलाफ कार्रवाई की थी। जैसा कि उस समय सूरजभान ने बातचीत में इस बात को बताया था। अब वही खुद ही बीएसपी से बाहर हो गए हैं।
उनके साथ पार्टी से फूलपुर से सांसद रहे कपिल मुनि करवरिया को अलग कर दिया है। इसको लेकर फिलहाल नई सियासी चर्चा शुरू हो गई है। आखिर बसपा अब कौन सी चाल चल रही है। हालांकि पार्टी के कद्दावर नेता आरके चौधरी कहते हैं कि यह कोई मुद्दा नहीं है। पार्टी में उन्हें ही जगह मिलेगी जो पार्टी के प्रति वफादार है। पार्टी सभी जाति के लोगों को लेकर आगे बढ़ रही है। वह किसी के साथ भेद-भाव नहीं कर रही है। जो लोग पार्टी के खिलाफ जा रहे हैं, वह चाहे जिस भी समाज के हों, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पार्टी से अगर कद्दावर नेता हटाए जा रहे हैं तो नए युवा चेहरों को मौका दिया जाएगा।
बाघंबरी क्षेत्र श्री रामलीला कमेटी की ओर से बसपा से पूर्व सांसद कपिल मुनि करवरिया और एमएलसी सूरजभान करवरिया के निकाले जाने की कड़ी निंदा की है। बुधवार को रामलीला कमेटी के सदस्यों ने बैठक की और करवरिया बंधुओं के साथ रहने का प्रस्ताव पास किया। बैठक में शरद कुमार पांडेय, परशुराम त्रिपाठी, राम नरेश तिवारी, लालता प्रसाद पांडेय, लल्लन पांडेय, शैलेंद्र अवस्थी, सुरेंद्र पाठक, दिवाकर प्रसाद शुक्ला, चंद्रकांत शुक्ला, वैभव पांडेय, केशव नाथ मिश्र, दुर्गा प्रसाद उपाध्याय, बाबुल महराज, श्रीधर द्विवेदी आदि मौजूद रहे।
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सपा ने यादव और मुस्लिम का जहां गठजोड़ बनाया वहीं बहुजन समाज पार्टी ने 2007 के विधान सभा चुनाव में सोशल इंजीनियर का खेल खेला। दलितों और ब्राह्मणों का गठजोड़ बनाया। अपने इस गठजोड़ से वह पूरी तरह से सफल रही और सत्ता हासिल की। बहुजन समाज पार्टी की संभावनाओं को देखते हुए ब्राह्मणों ने भी बीजेपी और कांग्रेस से कन्नी काटते हुए बसपा का पूरा साथ दिया।
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बदले में बसपा ने भी ब्राह्मणों को कई उच्च पदों पर बैठाया। ब्राह्मणों के साथ उसका यह गठजोड़ अगले विधान सभा चुनाव 2012 में भी देखने को मिला लेकिन इस चुनाव में बीएसपी का दांव चल नहीं पाया। बीएसपी ने कई ब्राह्मण चेहरों को किसी न किसी बहाने से या फिर आरोप लगाकर बाहर का रास्ता दिखा दिया। इसका खामियाजा उसे 2012 के ही चुनाव में भुगतना पड़ा। बाद में चुनावी समीक्षा के बाद पार्टी मुखिया ने ब्राह्मणों पर आरोप भी लगाया। पार्टी मुखिया ने कहा था कि सवर्णों ने उनका पूरा साथ नहीं दिया। 2012 में सपा सत्ता में आ गई।
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चुनाव बाद बसपा ने पूर्व मंत्री राकेश धर त्रिपाठी, उनके भतीजे डॉ. पंकज को बाहर का रास्ता दिखा दिया। इसके बाद अशोक बाजपेयी को पार्टी ने निशाने पर लिया। उन्हें और उनके बेटे हर्ष बाजपेयी को भी निष्काषित कर दिया। बताते हैं कि उनके खिलाफ मंगलवार को पार्टी से निकाले गए एमएलसी सूरजभान ने ही शिकायत की थी। पार्टी ने उनकी शिकायत पर अशोक बाजपेयी के खिलाफ कार्रवाई की थी। जैसा कि उस समय सूरजभान ने बातचीत में इस बात को बताया था। अब वही खुद ही बीएसपी से बाहर हो गए हैं।
उनके साथ पार्टी से फूलपुर से सांसद रहे कपिल मुनि करवरिया को अलग कर दिया है। इसको लेकर फिलहाल नई सियासी चर्चा शुरू हो गई है। आखिर बसपा अब कौन सी चाल चल रही है। हालांकि पार्टी के कद्दावर नेता आरके चौधरी कहते हैं कि यह कोई मुद्दा नहीं है। पार्टी में उन्हें ही जगह मिलेगी जो पार्टी के प्रति वफादार है। पार्टी सभी जाति के लोगों को लेकर आगे बढ़ रही है। वह किसी के साथ भेद-भाव नहीं कर रही है। जो लोग पार्टी के खिलाफ जा रहे हैं, वह चाहे जिस भी समाज के हों, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पार्टी से अगर कद्दावर नेता हटाए जा रहे हैं तो नए युवा चेहरों को मौका दिया जाएगा।
बाघंबरी क्षेत्र श्री रामलीला कमेटी की ओर से बसपा से पूर्व सांसद कपिल मुनि करवरिया और एमएलसी सूरजभान करवरिया के निकाले जाने की कड़ी निंदा की है। बुधवार को रामलीला कमेटी के सदस्यों ने बैठक की और करवरिया बंधुओं के साथ रहने का प्रस्ताव पास किया। बैठक में शरद कुमार पांडेय, परशुराम त्रिपाठी, राम नरेश तिवारी, लालता प्रसाद पांडेय, लल्लन पांडेय, शैलेंद्र अवस्थी, सुरेंद्र पाठक, दिवाकर प्रसाद शुक्ला, चंद्रकांत शुक्ला, वैभव पांडेय, केशव नाथ मिश्र, दुर्गा प्रसाद उपाध्याय, बाबुल महराज, श्रीधर द्विवेदी आदि मौजूद रहे।