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पुण्यकाल में पुण्य कमाने को रहे बेताब

Tue, 09 Feb 2016 12:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Tue, 09 Feb 2016 12:36 AM IST
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मौनी अमावस्या स्नान पर्व पर सोमवार को आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। सोमवती अमावस्या और ग्रहों के विशेष योग में पुण्य की डुबकी लगाने के लिए लाखों की कतार संगम की ओर बढ़ती गई। ज्यादातर स्नानार्थियों ने रात मेला क्षेत्र में बिताकर ब्रह्ममुहूर्त में स्नान किया। अमावस्या तिथि का संचरण रविवार रात 9:44 से होने के बाद सोमवार भोर से पहले ही संतों, महात्माओं के साथ श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी स्नान आरंभ कर दिया। अन्य स्नानपर्व से इतर मौनी अमावस्या पर ज्यादातर लोगों ने मौन रहकर स्नान किया।
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 परिवार के लोगों और परिजनों जो घर में रह गए थे, उनके नाम भी डुबकी लगाई। गंगा और माधव पूजा कर काला तिल, काला वस्त्र आदि का दान किया और गंगा की रेती माथे पर लगा अपने घरों को लौट गए। माघ मेला में आए ज्यादातर साधु-संन्यासियों का स्नान भोर से पहले तीन बजे से ही शुरू हो गया। सूर्य निकलने से पहले संगम में डुबकी लगाने की परंपरा का निर्वाह करते हुए तमाम कल्पवासियों ने भी ब्रह्म मुहूर्त में स्नान किया।
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शंकराचार्यों ने किया स्नान
ज्योतिष एवं द्वारकाशारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती, पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती, शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, चारधाम यात्रा समिति के उपाध्यक्ष स्वामी सुबुधानंद ब्रह्मचारी, स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, काशी सुमेरूपीठाधीश्वर नरेंद्रानंद सरस्वती, स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ, सतुआबाबा संतोषदास, स्वामी विमलाश्रम आदि ने अपने शिष्यों और भक्तों के साथ त्रिवेणी स्नान किया। शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने इस मौके पर कहा  मौनी अमावस्या का स्नान नई ऊर्जा देने वाला है।
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तीर्थ पुरोहित खुश, कहा मिला गंगा मइया का आशीष
मौनी अमावस्या पर श्रद्धालु स्नान के बाद टीका, चंदन लगवाने के लिए लोग तीर्थ पुरोहितों के डेरे पर जुटते रहे। विधिविधान से पूजा कराने के लिए पुरोहितों ने बाहर से भी पंडित बुलाए थे। भीड़ इतनी बढ़ गई कि शाम चार बजे के बाद तो चंदन, टीका ही कम पड़ गया। तीर्थपुरोहित अनूप त्रिपाठी निशान पीलीकोठी ने  कहा, मां गंगा मइया का आशीर्वाद संगम नगरी पर बरसा।

स्नान के बाद खरीदे  जेवर कपड़े
मेले में आई महिलाओं और युवतियों ने स्नान के बाद वापसी में परेड में लगे बाजार में रेडीमेड कपड़े और आर्टीफिशियल गहने की दुकानों पर जमकर खरीदारी की। माला, बाली टॉप्स और नाइटी, सूट, साड़ी खरीदा। सस्ते दामों पर ऊनी कपड़ों की भी खरीददारी की।

बंटता रहा भोजन प्रसाद
माघ मेला क्षेत्र के दंडीबाड़ा आचार्य बाड़ा, काली सड़क , त्रिवेणी मार्ग, महावीर मार्ग, अक्षय वट मार्ग में लगे संतों महात्माओं के शिविरों में सुबह से प्रसाद बंटना शुरू हुआ जो शाम तक चलता रहा। संगम मार्ग स्थित ओम नम: शिवाय और वाहि गुरु शिविर में सुबह से भोजन प्रसाद बंटना शुरू हो गया था। शहर के संगम जाने वाले रास्ते पर जगह-जगह स्टाल लगाकर पूड़ी, कचौड़ी, सब्जी, मिठाई स्नानार्थियों को बंटती रही।


शंकराचार्य से दीक्षा लेने की होड़
मौनी अमावस्या पर स्नान के बाद गुरु मंत्र लेने के लिए संतों महात्माआें के शिविरों में श्रद्धालु पहुंचे। गुरु मंत्र लेने वालों की पहली पसंद शंकराचार्य रहे। उनके शिविरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा। लोग श्रद्धापूर्वक गुरुमंत्र लेते और आजीवन सत्कर्म करने और गुरु के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराते रहे। त्रिवेणी मार्ग स्थित ज्योतिष पीठ, द्वारिका शारदापीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती  के पंडाल में सुबह से गुरु मंत्र लेने वालों का जमावड़ा रहा। दूरदराज से आए श्रद्धालुओं ने धैर्य से अपनी बारी का इंतजार किया। पुरी पीठाधीश्वर स्वामी निश्चलानंद सरस्वती के पंडाल में भी श्रद्धालुओं ने गुरुदक्षिणा देकर दीक्षा ली। कमोवेश यही नजारा स्वामी नरेंद्रानंद, स्वामी अधोक्षजानंद के शिविर का रहा। दंड़ीबाड़ा आचार्यबाड़ा, खाकचौक आदि में भी भक्तों को गुरुमंत्र दिया गया।
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