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इविवि में शिक्षक भर्ती के लिए आवेदन शुरू
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
Updated Sat, 30 Jan 2016 12:30 AM IST
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय में नए सत्र से पहले कई विभागों में शिक्षकों की नियुक्ति की उम्मीद जगी है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से 293 पदों के लिए शुक्रवार को विज्ञापन जारी कर दिया गया। इसी के साथ आवेदन भी शुरू हो गया। आवेदन की आखिरी तारीख 10 मार्च है।
विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से पूर्व में शुरू भर्ती प्रक्रिया के अंतर्गत सिर्फ 78 शिक्षकों की नियुक्ति हो पाई थी। शेष तथा विगत तीन वर्षों में रिक्त पदों के लिए नए सिरे से भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया गया। इसी के अंतर्गत शुक्रवार को नोटिफिकेशन हो गया। अलग-अलग विषयों के कुल 293 में से प्रोफेसर के 49 पद हैं। एसोसिएट प्रोफेसर के 84 तथा असिस्टेंट प्रोफेसर के 160 पदों पर भर्ती की जाएगी। असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए नेट-जेआरएफ आवेदन कर सकेंगे। यूजीसी की नियमावली-2009 के अंतर्गत पीएचडी/डीफिल करने वाले अभ्यर्थियों को नेट-जेआरएफ से छूट दी गई है। कई विशेष विषयों के असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए न्यूनतम योग्यता अलग है।
इविवि में 293 शिक्षकों की नियुक्ति के बाद भी तकरीबन 200 पद खाली रह जाएंगे। पिछली भर्ती में इविवि ने 504 पदों के लिए नोटिफिकेशन किया था, लेकिन 23 विभाग के सिर्फ सिर्फ 78 पदों पर भर्ती हो पाई थी। इस तरह से 426 पद खाली रह गए। हालांकि, इन 23 में से 18 विषयों के एससी-एसटी के खाली रह गए 54 पदों के लिए फरवरी 2014 में दोबारा आवेदन मांगा गया, लेकिन आगे की प्रक्रिया ठप है। इस तरह से 504 में से 372 पद खाली रह गए। इसके अलावा इस दौरान तकरीबन 80 प्रोफेसर रिटायर हो गए। यानी, 80 पद और खाली हो गए। ऐसे में शुक्रवार को विज्ञापित भर्ती के अंतर्गत तकरीबन 500 पदों पर नियुक्ति की बात कही जा रही थी लेकिन नोटिफिकेशन सिर्फ 293 पदों के लिए हुआ है। ऐसे में यह भी सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर शेष पद इसमें क्यों शामिल नहीं किए गए।
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विश्वविद्यालय में शिक्षकों की भर्ती के लिए जारी नोटिफिकेशन में स्क्रीनिंग परीक्षा की बात भी कही गई है। हालांकि, स्क्रीनिंग का आधार क्या होगा यह निर्णय इस संबंध में कुलपति करेंगे। इविवि प्रशासन ने पिछले विज्ञापन में भी लिखित परीक्षा की बात कही थी, लेकिन ऑर्डिनेंस का हवाला देते हुए एकेडमिक तथा पब्लिकेशन के आधार पर स्क्रीनिंग की गई। हालांकि, एपीआई स्कोर के आधार पर भर्ती या स्क्रीनिंग का पूरे देश में विरोध हो रहा है। नियुक्ति प्रक्रिया से जुडे़ विशेषज्ञों की शिकायत पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से नए विकल्प पर विचार के लिए कमेटी बना दी गई है। इसके अलावा विश्वविद्यालय के शोधछात्र भी असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के लिए लिखित परीक्षा की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन पर स्क्रीनिंग परीक्षा के लिए दबाव बढ़ गया है।
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विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से पूर्व में शुरू भर्ती प्रक्रिया के अंतर्गत सिर्फ 78 शिक्षकों की नियुक्ति हो पाई थी। शेष तथा विगत तीन वर्षों में रिक्त पदों के लिए नए सिरे से भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया गया। इसी के अंतर्गत शुक्रवार को नोटिफिकेशन हो गया। अलग-अलग विषयों के कुल 293 में से प्रोफेसर के 49 पद हैं। एसोसिएट प्रोफेसर के 84 तथा असिस्टेंट प्रोफेसर के 160 पदों पर भर्ती की जाएगी। असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए नेट-जेआरएफ आवेदन कर सकेंगे। यूजीसी की नियमावली-2009 के अंतर्गत पीएचडी/डीफिल करने वाले अभ्यर्थियों को नेट-जेआरएफ से छूट दी गई है। कई विशेष विषयों के असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए न्यूनतम योग्यता अलग है।
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इविवि में 293 शिक्षकों की नियुक्ति के बाद भी तकरीबन 200 पद खाली रह जाएंगे। पिछली भर्ती में इविवि ने 504 पदों के लिए नोटिफिकेशन किया था, लेकिन 23 विभाग के सिर्फ सिर्फ 78 पदों पर भर्ती हो पाई थी। इस तरह से 426 पद खाली रह गए। हालांकि, इन 23 में से 18 विषयों के एससी-एसटी के खाली रह गए 54 पदों के लिए फरवरी 2014 में दोबारा आवेदन मांगा गया, लेकिन आगे की प्रक्रिया ठप है। इस तरह से 504 में से 372 पद खाली रह गए। इसके अलावा इस दौरान तकरीबन 80 प्रोफेसर रिटायर हो गए। यानी, 80 पद और खाली हो गए। ऐसे में शुक्रवार को विज्ञापित भर्ती के अंतर्गत तकरीबन 500 पदों पर नियुक्ति की बात कही जा रही थी लेकिन नोटिफिकेशन सिर्फ 293 पदों के लिए हुआ है। ऐसे में यह भी सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर शेष पद इसमें क्यों शामिल नहीं किए गए।
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विश्वविद्यालय में शिक्षकों की भर्ती के लिए जारी नोटिफिकेशन में स्क्रीनिंग परीक्षा की बात भी कही गई है। हालांकि, स्क्रीनिंग का आधार क्या होगा यह निर्णय इस संबंध में कुलपति करेंगे। इविवि प्रशासन ने पिछले विज्ञापन में भी लिखित परीक्षा की बात कही थी, लेकिन ऑर्डिनेंस का हवाला देते हुए एकेडमिक तथा पब्लिकेशन के आधार पर स्क्रीनिंग की गई। हालांकि, एपीआई स्कोर के आधार पर भर्ती या स्क्रीनिंग का पूरे देश में विरोध हो रहा है। नियुक्ति प्रक्रिया से जुडे़ विशेषज्ञों की शिकायत पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से नए विकल्प पर विचार के लिए कमेटी बना दी गई है। इसके अलावा विश्वविद्यालय के शोधछात्र भी असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के लिए लिखित परीक्षा की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन पर स्क्रीनिंग परीक्षा के लिए दबाव बढ़ गया है।