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कैरी फारवर्ड पदों पर नहीं हो सकेगी सामान्य की भर्ती
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
Updated Sat, 30 Jan 2016 12:28 AM IST
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नागरिक पुलिस और पीएसी में उपनिरीक्षक तथा प्लाटून कमांडरों के 4000 से अधिक पदों पर भर्ती में क्षैतिज आरक्षण के रिक्त रह गए पदों को सामान्य वर्ग से नहीं भरा जा सकता है। हाईकोर्ट के दो जजों की पीठ ने इस मामले में दाखिल याचिका खारिज करते हुए कहा कि रिक्त पद विशेष आरक्षित वर्ग के लिए हैं और योग्य अभ्यर्थी नहीं मिलने के कारण इनको अगली भर्ती के लिए सुरक्षित कर लेने में कोई अवैधानिकता नहीं है।
मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने अभिनव आनंद और कई अन्य अभ्यर्थियों की याचिका पर यह फैसला सुनाया। याची का कहना था कि उपनिरीक्षक और प्लाटून कमांडर के लिए घोषित पदों 3698 पदों पर चयन किया गया। इसमें क्षैतिज आरक्षण का लाभ पाने वाले पूर्व सैनिकों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के 226 पद योग्य अभ्यर्थी न मिलने से रिक्त रह गए हैं। इन पदों को विभाग ने अगली भर्ती के लिए सुरक्षित कर लिया है, जबकि यदि इसी चयन प्रक्रिया में इन पदों को भी शामिल कर लिया जाए तो कट ऑफ मेरिट नीचे आ जाएगी और याचीगण चयन सूची में आ सकते हैं।
याची के अधिवक्ता का तर्क था कि याचीगण भी अन्य अभ्यर्थियों की तरह ही पूरी चयन परीक्षा को पार करते हुए आए हैं, मात्र कुछ अंक कम होने की वजह से चयन से वंचित रह गए। अब जबकि कुछ पद रिक्त रह गए हैं तो इस स्थिति याचियों को अधिकार है उनके चयन पर विचार हो। सरकार की ओर से स्थायी अधिवक्ता रामानंद पांडेय की दलील थी कि जो 226 पद रिक्त रह गए हैं, वह विशेष आरक्षित कोटे के हैं। यदि इन पर भर्ती कर भी ली जाए तो सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियोें को इसका लाभ नहीं मिलेगा। चयन प्रक्रिया की नियमावली में कैरी फारवर्ड करने का प्रावधान है। कोर्ट ने सरकार की दलील स्वीकार करते हुए याचिका खारिज कर दी है।
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मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने अभिनव आनंद और कई अन्य अभ्यर्थियों की याचिका पर यह फैसला सुनाया। याची का कहना था कि उपनिरीक्षक और प्लाटून कमांडर के लिए घोषित पदों 3698 पदों पर चयन किया गया। इसमें क्षैतिज आरक्षण का लाभ पाने वाले पूर्व सैनिकों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के 226 पद योग्य अभ्यर्थी न मिलने से रिक्त रह गए हैं। इन पदों को विभाग ने अगली भर्ती के लिए सुरक्षित कर लिया है, जबकि यदि इसी चयन प्रक्रिया में इन पदों को भी शामिल कर लिया जाए तो कट ऑफ मेरिट नीचे आ जाएगी और याचीगण चयन सूची में आ सकते हैं।
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याची के अधिवक्ता का तर्क था कि याचीगण भी अन्य अभ्यर्थियों की तरह ही पूरी चयन परीक्षा को पार करते हुए आए हैं, मात्र कुछ अंक कम होने की वजह से चयन से वंचित रह गए। अब जबकि कुछ पद रिक्त रह गए हैं तो इस स्थिति याचियों को अधिकार है उनके चयन पर विचार हो। सरकार की ओर से स्थायी अधिवक्ता रामानंद पांडेय की दलील थी कि जो 226 पद रिक्त रह गए हैं, वह विशेष आरक्षित कोटे के हैं। यदि इन पर भर्ती कर भी ली जाए तो सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियोें को इसका लाभ नहीं मिलेगा। चयन प्रक्रिया की नियमावली में कैरी फारवर्ड करने का प्रावधान है। कोर्ट ने सरकार की दलील स्वीकार करते हुए याचिका खारिज कर दी है।
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