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युवाओं को कविता का संस्कार सिखाते थे बच्चन
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
Updated Mon, 18 Jan 2016 01:08 AM IST
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कालजयी कृति मधुशाला के प्रणेता कविवर हरिवंश राय बच्चन की जीवन से भरी रचनाएं हमें जीने की उम्मीद देती हैं। निराशा में विश्वास की रोशनी जगाती हैं। सिर्फ उनकी रचनाएं ही कालजयी नहीं, वह स्वयं शानदार व्यक्तित्व के मालिक थे। बच्चन जी ने युवा पीढ़ी को कविता के संस्कारों की सीख दी। इसी पहल के तहत उन्होंने समस्या पूर्ति संगोष्ठी की शुरुआत की थी।
प्रत्येक माह होने वाली संगोष्ठी में युवा लेखकों को प्रसिद्ध कवियों की रचनाओं की एक दो पंक्ति दी जाती थी जिसके आगे उन्हें अपनी रचनात्मकता का परिचय देते हुए पूरा करना होता था। खास यह कि संगोष्ठी में जिसकी भी रचना पढ़ी जाती, उसे मौसमी फलों की पार्टी देनी पड़ती थी। वरिष्ठ कवि यश मालवीय कहते हैं, संगोष्ठी में रामधारी सिंह दिनकर, श्याम नारायण पांडेय, नागार्जुन, जगदीश गुप्त, गोपीकृष्ण गोपेश, उमाकांत मालवीय, शंभूनाथ सिंह, गोपाल सिंह नेपाली, नरेंद्र शर्मा, रामेश्वर शुक्ल अंचल जैसे रचनाकार शामिल होते थे। इनके सानिध्य में युवा रचनाकारों को बहुत कुछ सीखने को मिलता था। बच्चन जी स्वयं संगोष्ठी में होते थे। वह चाहते थे कि कविता के छंद, लय और तुकबंदी को सीखते हुए युवा अपनी रचनात्मकता को आगे बढ़ाएं।
पुण्यतिथि की पूर्व संध्या पर सांस्कृतिक संस्था भोर एक सृजन की ओर से रविवार को सीएमपी डिग्री कालेज में कविवर डॉ.हरिवंश राय बच्चन को संगीतमय श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कालजयी कृति ‘मधुशाला’ की तीस रुबाइयों को अनूठे अंदाज में पेशकर गज़ल गायक आशुतोष श्रीवास्तव ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। नृत्यांगना कृति श्रीवास्तव की देखरेख में नेहा शर्मा, ममता प्रजापति, मेनका और सौम्या ने रुबाइयों पर भाव नृत्य प्रस्तुत कर बखूबी शब्दचित्र उपस्थित किया।
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अतिविशिष्ट अतिथि हरदीप सिंह ने दीप जलाकर शुरुआत की।
कार्यक्रम में डॉ. मिलन मुखर्जी, मंजुल वर्मा, गौरव कृष्ण बंसल, तेजिंदर वार्ष्णेय, मनोज श्रीवास्तव, चांद सक्सेना आदि को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। अतिथियों का स्वागत प्राचार्य डॉ.आनंद श्रीवास्तव और संचालन संजय पुरुषार्थी ने किया। संगीत का निर्देशन विवेक प्रियदर्शन, संयोजन विनय कुमार, सुमित श्रीवास्तव, मंच संयोजन सुब्रत देव नाथ, ध्वनि- प्रकाश निर्देशन उमेश कुशवाहा का रहा।
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प्रत्येक माह होने वाली संगोष्ठी में युवा लेखकों को प्रसिद्ध कवियों की रचनाओं की एक दो पंक्ति दी जाती थी जिसके आगे उन्हें अपनी रचनात्मकता का परिचय देते हुए पूरा करना होता था। खास यह कि संगोष्ठी में जिसकी भी रचना पढ़ी जाती, उसे मौसमी फलों की पार्टी देनी पड़ती थी। वरिष्ठ कवि यश मालवीय कहते हैं, संगोष्ठी में रामधारी सिंह दिनकर, श्याम नारायण पांडेय, नागार्जुन, जगदीश गुप्त, गोपीकृष्ण गोपेश, उमाकांत मालवीय, शंभूनाथ सिंह, गोपाल सिंह नेपाली, नरेंद्र शर्मा, रामेश्वर शुक्ल अंचल जैसे रचनाकार शामिल होते थे। इनके सानिध्य में युवा रचनाकारों को बहुत कुछ सीखने को मिलता था। बच्चन जी स्वयं संगोष्ठी में होते थे। वह चाहते थे कि कविता के छंद, लय और तुकबंदी को सीखते हुए युवा अपनी रचनात्मकता को आगे बढ़ाएं।
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पुण्यतिथि की पूर्व संध्या पर सांस्कृतिक संस्था भोर एक सृजन की ओर से रविवार को सीएमपी डिग्री कालेज में कविवर डॉ.हरिवंश राय बच्चन को संगीतमय श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कालजयी कृति ‘मधुशाला’ की तीस रुबाइयों को अनूठे अंदाज में पेशकर गज़ल गायक आशुतोष श्रीवास्तव ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। नृत्यांगना कृति श्रीवास्तव की देखरेख में नेहा शर्मा, ममता प्रजापति, मेनका और सौम्या ने रुबाइयों पर भाव नृत्य प्रस्तुत कर बखूबी शब्दचित्र उपस्थित किया।
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अतिविशिष्ट अतिथि हरदीप सिंह ने दीप जलाकर शुरुआत की।
कार्यक्रम में डॉ. मिलन मुखर्जी, मंजुल वर्मा, गौरव कृष्ण बंसल, तेजिंदर वार्ष्णेय, मनोज श्रीवास्तव, चांद सक्सेना आदि को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। अतिथियों का स्वागत प्राचार्य डॉ.आनंद श्रीवास्तव और संचालन संजय पुरुषार्थी ने किया। संगीत का निर्देशन विवेक प्रियदर्शन, संयोजन विनय कुमार, सुमित श्रीवास्तव, मंच संयोजन सुब्रत देव नाथ, ध्वनि- प्रकाश निर्देशन उमेश कुशवाहा का रहा।