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आयोग अध्यक्ष को हटाने की मांग पर जवाब तलब
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
Updated Thu, 14 Jan 2016 01:29 AM IST
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लोक सेवा आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार जैन और सदस्य फरमान अली को पद से हटाने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार और लोक सेवा आयोग से जवाब मांगा है। याचिका गोरखपुर के डॉ. धीरेंद्र सिंह और अधिवक्ता अंकित राय ने दाखिल की है। इस मामले की सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने प्रदेश सरकार, आयोग, डॉ. जैन और फरहान अली को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। याचिका को इस मामले में पहले से दाखिल याचिकाओं के साथ संबद्ध कर दिया गया है।
आयोग और प्रदेश सरकार के वकीलों ने इस मामले में प्रारंभिक आपत्ति की मगर पीठ ने उनकी आपत्तियों को अस्वीकार करते हुए कहा कि पहले वह हलफनामा दाखिल कर अपना पक्ष रखें। याची के वकील आलोक मिश्र का कहना था कि डॉ. जैन और फरहान के संबंध में सूचना का अधिकार के तहत नई जानकारियां प्राप्त हुई हैं। डॉ. जैन के खिलाफ आगरा में दो आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इसके बावजूद उनको आयोग का सदस्य और बाद में कार्यवाहक अध्यक्ष बनाते समय सरकार ने इस तथ्य की अनदेखी की।
इसी प्रकार से सदस्य फरहान अली के मामले में भी नियुक्ति के समय योग्यता पर ध्यान नहीं दिया गया। फरहान अली स्वयं को अधिवक्ता बताते हैं मगर विधि के क्षेत्र में उनका क्या उल्लेखनीय योगदान है जिससे उनको महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर नियुक्ति दी जा सके पता नहीं है। उनका पंजीकरण भी उस समय के बाद का जो उन्होंने बताया है। कोर्ट ने सभी पक्षों को 25 फरवरी तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
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आयोग और प्रदेश सरकार के वकीलों ने इस मामले में प्रारंभिक आपत्ति की मगर पीठ ने उनकी आपत्तियों को अस्वीकार करते हुए कहा कि पहले वह हलफनामा दाखिल कर अपना पक्ष रखें। याची के वकील आलोक मिश्र का कहना था कि डॉ. जैन और फरहान के संबंध में सूचना का अधिकार के तहत नई जानकारियां प्राप्त हुई हैं। डॉ. जैन के खिलाफ आगरा में दो आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इसके बावजूद उनको आयोग का सदस्य और बाद में कार्यवाहक अध्यक्ष बनाते समय सरकार ने इस तथ्य की अनदेखी की।
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इसी प्रकार से सदस्य फरहान अली के मामले में भी नियुक्ति के समय योग्यता पर ध्यान नहीं दिया गया। फरहान अली स्वयं को अधिवक्ता बताते हैं मगर विधि के क्षेत्र में उनका क्या उल्लेखनीय योगदान है जिससे उनको महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर नियुक्ति दी जा सके पता नहीं है। उनका पंजीकरण भी उस समय के बाद का जो उन्होंने बताया है। कोर्ट ने सभी पक्षों को 25 फरवरी तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
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