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यादों में हमेशा जीवित रहेंगे रवींद्र कालिया
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 11 Jan 2016 12:07 AM IST
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वरिष्ठ कथाकार रवींद्र कालिया भले ही हमारे बीच नहीं रहे लेकिन पाठकों के दिलों में वो हमेशा जीवित रहेंगे। रवींद्र्र कालिया के जाने से साहित्य जगत में शोक की लहर है। प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेस), जनवादी लेखक संघ (जलेस) और जनसंस्कृति मंच (जसम) की ओर से रविवार को आयोजित श्रद्धांजलि सभा में साहित्यकारों ने रवींद्र कालिया के साथ बिताए वक्त को सांझा किया। एक लेखक और एक शख्सियत के रूप में उनके व्यक्तित्व के विभिन्न आयामों को शब्द दर शब्द बयां किया गया।
जनवादी लेखक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष और रवींद्र कालिया के घनिष्ठ मित्र दूधनाथ सिंह ने कहा कि वह हम चार यारों (दूधनाथ सिंह, ज्ञानरंजन, काशीनाथ सिंह और रवींद्र्र कालिया) में सबसे लंबा, खूबसूरत और प्यार करने लायक छोकरा था। उसका व्यक्तित्व हास्य से मिलकर बना था। रवींद्र कालिया में इलाहाबाद धड़कता था। प्रो. राजेंद्र कुमार ने कहा कि रवींद कालिया के लेखन को किसी दायरे में नहीं बांधा जा सकता। वो कई शहरों में रहे लेकिन इलाहाबाद उनमें बस गया। वो हिंदी में युवा लेखकों के गॉड फादर भी थे। उर्मिला जैन ने रवींद्र कालिया से जुड़े कई संस्मरणों को याद किया।
प्रलेस अध्यक्ष संतोष भदौरिया ने कहा कि उनके अंदर लेखकों को पहचानने की क्षमता थी। अजामिल ने कहा कि रवींद्र कालिया ने व्यवसाय और साहित्यिक पत्रकारिता के बीच सेतु बनाया। प्रो. एए फात्मी ने कहा कि रवींद्र कालिया गालिब, फैज और मंटू में जीते थे। वह उर्दू हिंदी की मिलीजुली परंपरा के बेहतरीन नुमाइंदे थे। प्रणय कृष्ण ने कहा कि साहित्य ही उनकी जिंदगी थी।
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सभा में महेंद्र राजा जैन, उमेश नारायण शर्मा, राम प्यारे राय, श्रीप्रकाश मिश्र, हरिश्चंद्र द्विवेदी, धनंजय संध्या नवोदिता, नीलम शंकर, हीरालाल, हिमांशु रंजन, सुभाष गांगुली, नंदल हितैषी, रमेश ग्रोवर, अनिल रंजन भौमिक, सुधांशु मालवीय, हरिश्चंद्र पांडेय, सूर्यनारायण, विवेक निराला, अरिंदम घोष, अशोक सिद्धार्थ, रतिनाथ योगेश्वर, अविनाश मिश्रा, गायत्री सिंह, रमाशंकर सिंह, विकास स्वरूप आदि मौजूद रहे।
साहित्यिक संस्था गुफ्तगू की ओर से श्रद्धांजलि सभा में वरिष्ठ कथाकार रवींद्र कालिया को श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए। संस्था अध्यक्ष इम्तियाज अहमद गाजी ने कहा कि वह पिछले वर्ष संस्था के कार्यक्रम में आए थे। उन्होंने बहुत सी बातें की थी। आज यह यकीन नहीं हो रहा कि वे हमारे बीच नहीं हैं। नरेश कुमार महरानी ने रवींद्र कालिया के व्यक्तित्व और प्रभाकर शर्मा ने गालिब छूटी शराब का जिक्र किया। सभा की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार मुनेश्वर मिश्र ने की। इस दौरान डॉ. विनय श्रीवास्तव, धर्मेंद्र श्रीवास्तव, संजय सागर, शैलेंद्र राय, डॉ. पीयूष दीक्षित, रोहित त्रिपाठी, रागेश्वर, लोकेश श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
कांग्रेसियों की ओर से शोक सभा आयोजित कर रवींद्र कालिया के निधन पर शोक व्यक्त किया गया। प्रदेश महासचिव मुकुंद तिवारी ने कहा कि रवींद्र्र कालिया की कमी साहित्य जगत के साथ ही इलाहाबाद वासियों को भी खलेगी। उन्हें इलाहाबाद की माटी से हमेशा विशेष लगाव रहा। उनके जाने से हुई कमी को कोई पूरा नहीं कर सकता। शोक सभा में दीपचंद्र शर्मा, अफरोज अहमद, अजीत कुशवाहा, जय प्रकाश तिवारी, शमीम अहमद, कंदर्प नारायण मिश्र, राजेंद्र प्रसाद आदि मौजूद रहे।
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जनवादी लेखक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष और रवींद्र कालिया के घनिष्ठ मित्र दूधनाथ सिंह ने कहा कि वह हम चार यारों (दूधनाथ सिंह, ज्ञानरंजन, काशीनाथ सिंह और रवींद्र्र कालिया) में सबसे लंबा, खूबसूरत और प्यार करने लायक छोकरा था। उसका व्यक्तित्व हास्य से मिलकर बना था। रवींद्र कालिया में इलाहाबाद धड़कता था। प्रो. राजेंद्र कुमार ने कहा कि रवींद कालिया के लेखन को किसी दायरे में नहीं बांधा जा सकता। वो कई शहरों में रहे लेकिन इलाहाबाद उनमें बस गया। वो हिंदी में युवा लेखकों के गॉड फादर भी थे। उर्मिला जैन ने रवींद्र कालिया से जुड़े कई संस्मरणों को याद किया।
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प्रलेस अध्यक्ष संतोष भदौरिया ने कहा कि उनके अंदर लेखकों को पहचानने की क्षमता थी। अजामिल ने कहा कि रवींद्र कालिया ने व्यवसाय और साहित्यिक पत्रकारिता के बीच सेतु बनाया। प्रो. एए फात्मी ने कहा कि रवींद्र कालिया गालिब, फैज और मंटू में जीते थे। वह उर्दू हिंदी की मिलीजुली परंपरा के बेहतरीन नुमाइंदे थे। प्रणय कृष्ण ने कहा कि साहित्य ही उनकी जिंदगी थी।
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सभा में महेंद्र राजा जैन, उमेश नारायण शर्मा, राम प्यारे राय, श्रीप्रकाश मिश्र, हरिश्चंद्र द्विवेदी, धनंजय संध्या नवोदिता, नीलम शंकर, हीरालाल, हिमांशु रंजन, सुभाष गांगुली, नंदल हितैषी, रमेश ग्रोवर, अनिल रंजन भौमिक, सुधांशु मालवीय, हरिश्चंद्र पांडेय, सूर्यनारायण, विवेक निराला, अरिंदम घोष, अशोक सिद्धार्थ, रतिनाथ योगेश्वर, अविनाश मिश्रा, गायत्री सिंह, रमाशंकर सिंह, विकास स्वरूप आदि मौजूद रहे।
साहित्यिक संस्था गुफ्तगू की ओर से श्रद्धांजलि सभा में वरिष्ठ कथाकार रवींद्र कालिया को श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए। संस्था अध्यक्ष इम्तियाज अहमद गाजी ने कहा कि वह पिछले वर्ष संस्था के कार्यक्रम में आए थे। उन्होंने बहुत सी बातें की थी। आज यह यकीन नहीं हो रहा कि वे हमारे बीच नहीं हैं। नरेश कुमार महरानी ने रवींद्र कालिया के व्यक्तित्व और प्रभाकर शर्मा ने गालिब छूटी शराब का जिक्र किया। सभा की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार मुनेश्वर मिश्र ने की। इस दौरान डॉ. विनय श्रीवास्तव, धर्मेंद्र श्रीवास्तव, संजय सागर, शैलेंद्र राय, डॉ. पीयूष दीक्षित, रोहित त्रिपाठी, रागेश्वर, लोकेश श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
कांग्रेसियों की ओर से शोक सभा आयोजित कर रवींद्र कालिया के निधन पर शोक व्यक्त किया गया। प्रदेश महासचिव मुकुंद तिवारी ने कहा कि रवींद्र्र कालिया की कमी साहित्य जगत के साथ ही इलाहाबाद वासियों को भी खलेगी। उन्हें इलाहाबाद की माटी से हमेशा विशेष लगाव रहा। उनके जाने से हुई कमी को कोई पूरा नहीं कर सकता। शोक सभा में दीपचंद्र शर्मा, अफरोज अहमद, अजीत कुशवाहा, जय प्रकाश तिवारी, शमीम अहमद, कंदर्प नारायण मिश्र, राजेंद्र प्रसाद आदि मौजूद रहे।