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प्रदूषण खत्म करने के लिए शहर से हटाए जाएं विक्रम, ऑटो
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Tue, 05 Jan 2016 11:54 PM IST
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प्रदूषण को लेकर इलाहाबाद का हाल भी दिल्ली जैसा न हो, इसके लिए समय रहते प्रयास करने की जरूरत है। सिर्फ पॉलीथिन पर रोक के फरमान से इलाहाबाद में प्रदूषण कम नहीं होगा। इसके सबसे जरूरी यह है कि शहर की सड़कों पर जहरीला धूंआ उगलती टैक्सियों (विक्रम) पर तत्काल रोक लगाई जाए। विक्रम और ऑटो से निकलने वाले धूंए से शहर में खतरनाक तरीके से वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। ऐसे में जिला प्रशासन, यातायात पुलिस और आरटीओ कार्यालय को इस पर प्रतिबंध लगाने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए।
संभागीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ) कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक इलाहाबाद में 2300 विक्रम और 2700 ऑटो सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इसमें से अकेले 2014 में 1438 विक्रम एवं ऑटो तथा नवंबर 2015 तक 928 का पंजीकरण हुआ। इलाहाबाद जंक्शन से रामबाग, दारागंज, बाई का बाग, नूरुल्ला रोड, तेलियरगंज, गोविंदपुर से कचहरी, सिविल लाइंस समेत शहर की अन्य सड़कों पर दौड़ते इन विक्रमों से बेतहाशा धूंआ निकलता है।
जंक्शन से जॉनसेनगंज चौराहा, विवेकानंद मार्ग होकर रामबाग और बहादुरगंज, जीटी रोड की ओर जाने वाले विक्रम और ऑटो के कारण वहां पूरे दिन काला धूंआ छाया रहता है। इसीलिए जॉनसेगंज चौराहा को शहर के सबसे ज्यादा प्रदूषण वाले चौराहा के रूप में भी जाना था, जहां दुपहिया वाहन चालकों के लिए कुछ देर रुकना भी भारी पड़ता है। इनके चालक खड़े विक्रम और ऑटो को भी स्टार्ट रखते हैं। इसकी वजह से पर्यावरण में लगातार जहर घुल रहा है। विक्रम से निकलने वाला धूंआ सेहत के साथ पर्यावरण के लिए बेहद खतरनाक है।
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बहादुरगंज की सुनैना, अलताफ हो या फिर विवेकानंद पर रहने वाले हर्ष प्रियदर्शी, विक्रम और ऑटो से निकलने वाले धूंए से सब परेशान हैं। उनका कहना है कि सुबह से देर शाम तक इन वाहनों का सड़कों पर उतना ज्यादा धूंआ होता है कि आंखें जलने लगती हैं। दिल्ली जैसा हाल इलाहाबाद का न हो, इसके लिए सुनैना, अलताफ, हर्ष जैसे हजारों शहरी जहर उगलने वाले ऐसे वाहनों पर तत्काल प्रतिबंध के पक्ष में हैं।
‘शहर को हरा भरा रखने के लिए भले पेड़ लगाए जा रहे हों, लेकिन जिस तेजी से वाहनों की संख्या बढ़ रही है, पर्यावरण को संतुलित रखना किसी चुनौती से कम नहीं है। इसके लिए डीजल वाहन ज्यादा जिम्मेदार हैं। विक्रम और ऑटो जैसे सवारी वाहनों पर तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए।’ डॉ.मुकेश शर्मा, पर्यावरणविद्
शहर में सल्फरडाई ऑक्साइड, नाइट्रोजनडाई ऑक्साइड और आरएसपीएम की मात्रा मानक से अधिक है। सल्फरडाई ऑक्साइड का मानक 80 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक और आरएसपीएम 200 से ज्यादा नहीं होना चाहिए लेकिन अलोपीबाग, रामबाग, जॉनसेनगंज, लक्ष्मी चौराहा आदि क्षेत्र में यह काफी अधिक है। अलोपीबाग में प्रदूषण ज्यादा है। सड़कें ठीक न होने, वाहनों की बढ़ती संख्या और खराब ट्रैफिक सिस्टम के कारण प्रदूषण बढ़ रहा है। इसे तत्काल दुरुस्त करने की जरूरत है। एसपी फ्रैंकलीन, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
लखनऊ, कानपुर समेत यूपी के अन्य जिलों में सीएनजी युक्त विक्रम सड़कों पर दौड़ रहे हैं, लेकिन इलाहाबाद में इसके लिए गंभीरता से कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। इसी का नतीजा है कि शहर में अब तक सीएनजी पंप नहीं लग सके हैं। इसके लिए इंडियन ऑयल और अडानी ग्रुप के बीच समझौता हुआ है। अडानी ग्रुप को शहर के विभिन्न इलाकों में चार सीएनजी पंप लगाने हैं। अडानी ग्रुप ने आरटीओ कार्यालय को यह काम इसी वर्ष जनवरी में पूरा करने का भरोसा दिया था लेकिन सीएनजी पंप अब तक नहीं लग सके।
‘अडानी ग्रुप में सीएनजी पंप लगाने के लिए छह माह का समय और मांगा है। अब यह काम मई-जून में पूरा होगा। इसके बाद विक्रम, ऑटो को सीएनजी किट में बदलने का काम शुरू होगा। इसके लिए उन्हें छह माह का समय दिया जाएगा। इसके साथ स्कूल बसें समेत अन्य व्यावसायिक वाहन भी सीएनजीयुक्त किए जाएंगे।’ भीम सेन सिंह, आरटीओ
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संभागीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ) कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक इलाहाबाद में 2300 विक्रम और 2700 ऑटो सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इसमें से अकेले 2014 में 1438 विक्रम एवं ऑटो तथा नवंबर 2015 तक 928 का पंजीकरण हुआ। इलाहाबाद जंक्शन से रामबाग, दारागंज, बाई का बाग, नूरुल्ला रोड, तेलियरगंज, गोविंदपुर से कचहरी, सिविल लाइंस समेत शहर की अन्य सड़कों पर दौड़ते इन विक्रमों से बेतहाशा धूंआ निकलता है।
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जंक्शन से जॉनसेनगंज चौराहा, विवेकानंद मार्ग होकर रामबाग और बहादुरगंज, जीटी रोड की ओर जाने वाले विक्रम और ऑटो के कारण वहां पूरे दिन काला धूंआ छाया रहता है। इसीलिए जॉनसेगंज चौराहा को शहर के सबसे ज्यादा प्रदूषण वाले चौराहा के रूप में भी जाना था, जहां दुपहिया वाहन चालकों के लिए कुछ देर रुकना भी भारी पड़ता है। इनके चालक खड़े विक्रम और ऑटो को भी स्टार्ट रखते हैं। इसकी वजह से पर्यावरण में लगातार जहर घुल रहा है। विक्रम से निकलने वाला धूंआ सेहत के साथ पर्यावरण के लिए बेहद खतरनाक है।
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बहादुरगंज की सुनैना, अलताफ हो या फिर विवेकानंद पर रहने वाले हर्ष प्रियदर्शी, विक्रम और ऑटो से निकलने वाले धूंए से सब परेशान हैं। उनका कहना है कि सुबह से देर शाम तक इन वाहनों का सड़कों पर उतना ज्यादा धूंआ होता है कि आंखें जलने लगती हैं। दिल्ली जैसा हाल इलाहाबाद का न हो, इसके लिए सुनैना, अलताफ, हर्ष जैसे हजारों शहरी जहर उगलने वाले ऐसे वाहनों पर तत्काल प्रतिबंध के पक्ष में हैं।
‘शहर को हरा भरा रखने के लिए भले पेड़ लगाए जा रहे हों, लेकिन जिस तेजी से वाहनों की संख्या बढ़ रही है, पर्यावरण को संतुलित रखना किसी चुनौती से कम नहीं है। इसके लिए डीजल वाहन ज्यादा जिम्मेदार हैं। विक्रम और ऑटो जैसे सवारी वाहनों पर तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए।’ डॉ.मुकेश शर्मा, पर्यावरणविद्
शहर में सल्फरडाई ऑक्साइड, नाइट्रोजनडाई ऑक्साइड और आरएसपीएम की मात्रा मानक से अधिक है। सल्फरडाई ऑक्साइड का मानक 80 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक और आरएसपीएम 200 से ज्यादा नहीं होना चाहिए लेकिन अलोपीबाग, रामबाग, जॉनसेनगंज, लक्ष्मी चौराहा आदि क्षेत्र में यह काफी अधिक है। अलोपीबाग में प्रदूषण ज्यादा है। सड़कें ठीक न होने, वाहनों की बढ़ती संख्या और खराब ट्रैफिक सिस्टम के कारण प्रदूषण बढ़ रहा है। इसे तत्काल दुरुस्त करने की जरूरत है। एसपी फ्रैंकलीन, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
लखनऊ, कानपुर समेत यूपी के अन्य जिलों में सीएनजी युक्त विक्रम सड़कों पर दौड़ रहे हैं, लेकिन इलाहाबाद में इसके लिए गंभीरता से कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। इसी का नतीजा है कि शहर में अब तक सीएनजी पंप नहीं लग सके हैं। इसके लिए इंडियन ऑयल और अडानी ग्रुप के बीच समझौता हुआ है। अडानी ग्रुप को शहर के विभिन्न इलाकों में चार सीएनजी पंप लगाने हैं। अडानी ग्रुप ने आरटीओ कार्यालय को यह काम इसी वर्ष जनवरी में पूरा करने का भरोसा दिया था लेकिन सीएनजी पंप अब तक नहीं लग सके।
‘अडानी ग्रुप में सीएनजी पंप लगाने के लिए छह माह का समय और मांगा है। अब यह काम मई-जून में पूरा होगा। इसके बाद विक्रम, ऑटो को सीएनजी किट में बदलने का काम शुरू होगा। इसके लिए उन्हें छह माह का समय दिया जाएगा। इसके साथ स्कूल बसें समेत अन्य व्यावसायिक वाहन भी सीएनजीयुक्त किए जाएंगे।’ भीम सेन सिंह, आरटीओ