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कलाम के नाम रहा पुस्तक मेला
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 27 Dec 2015 11:42 PM IST
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जीजीआईसी में लगे दस दिनी आठवां राष्ट्रीय पुस्तक मेला इस बार एपीजे अब्दुल कलाम के नाम रहा। काका कलाम की किताबों का जादू बच्चों से लेकर युवाओं तक सभी के सिर चढ़ कर बोला। मेले में कलाम की किताबों ने पिछले सात वर्षों के रिकार्ड को तोड़ दिया। मेले में किताबों की बिक्री का 20 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं के नाम रहा।
अब्दुल कलाम की आखिरी किताब ‘एडवांटेज इंडिया- चुनौतियों से उपलब्धियों तक’की सभी प्रतियां बिक गईं। इसके साथ ही उनकी सभी किताबें अग्नि की उड़ान, कलाम मेरी जीवन यात्रा, आओ बच्चों आविष्कारक बनें, हम होंगे कामयाब, जीवन वृक्ष, विजयी भव, सक्सेस पाठ, हमारे पथ प्रदर्शक आदि रचनाओं को शहरियों ने हाथों हाथ लिया। अकेले इनकी सात लाख की किताबें बिकीं।
मेले में हर बार की तरह साहित्य की किताबें भी काफी पसंद गईं। 20 लाख रुपये की किताबें साहित्य की बिकीं। इसके साथ ही सभी प्रकाशकों की बेस्ट सेलर किताबों को भी पाठकों ने पसंद किया। संविधान पर केंद्रित किताब ‘जागो गणराज्य जागो’ की 800 किताबें बिकी। प्रो. हेरंब चतुर्वेदी के दो उपन्यास ‘मुगल शहजादा खुसरू’ और ‘दो सुल्तान दो बादशाह और उनका प्रणय परिवेश’ की भी काफी डिमांड रही। दो दिनों में इसका सारा स्टाक बिक गया। इन किताबों का विमोचन शनिवार को हुआ था। मेले के आयोजक देवराज अरोड़ा ने कहा कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार किताबों की बिक्री काफी हुई है। संविधान और एपीजे अब्दुल को समर्पित मेले के कारण पाठकों को अब्दुल कलाम की सभी किताबें उपलब्ध कराई गईं। संगम नगरी में किताबों का जादू बरकरार है।
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अब्दुल कलाम की आखिरी किताब ‘एडवांटेज इंडिया- चुनौतियों से उपलब्धियों तक’की सभी प्रतियां बिक गईं। इसके साथ ही उनकी सभी किताबें अग्नि की उड़ान, कलाम मेरी जीवन यात्रा, आओ बच्चों आविष्कारक बनें, हम होंगे कामयाब, जीवन वृक्ष, विजयी भव, सक्सेस पाठ, हमारे पथ प्रदर्शक आदि रचनाओं को शहरियों ने हाथों हाथ लिया। अकेले इनकी सात लाख की किताबें बिकीं।
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मेले में हर बार की तरह साहित्य की किताबें भी काफी पसंद गईं। 20 लाख रुपये की किताबें साहित्य की बिकीं। इसके साथ ही सभी प्रकाशकों की बेस्ट सेलर किताबों को भी पाठकों ने पसंद किया। संविधान पर केंद्रित किताब ‘जागो गणराज्य जागो’ की 800 किताबें बिकी। प्रो. हेरंब चतुर्वेदी के दो उपन्यास ‘मुगल शहजादा खुसरू’ और ‘दो सुल्तान दो बादशाह और उनका प्रणय परिवेश’ की भी काफी डिमांड रही। दो दिनों में इसका सारा स्टाक बिक गया। इन किताबों का विमोचन शनिवार को हुआ था। मेले के आयोजक देवराज अरोड़ा ने कहा कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार किताबों की बिक्री काफी हुई है। संविधान और एपीजे अब्दुल को समर्पित मेले के कारण पाठकों को अब्दुल कलाम की सभी किताबें उपलब्ध कराई गईं। संगम नगरी में किताबों का जादू बरकरार है।
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