{"_id":"6c18fd9689ba734082b72eb2c8ec64dc","slug":"allahabad-news-hindi-news-450","type":"story","status":"publish","title_hn":"जटिल, व्यवहारिक सवालों में उलझे भावी कलेक्टर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जटिल, व्यवहारिक सवालों में उलझे भावी कलेक्टर
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 21 Dec 2015 11:38 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सिविल सर्विसेज-2015 मुख्य परीक्षा में सोमवार को सामान्य अध्ययन के तृतीय और चतुर्थ पेपर में व्यवहारिक लेकिन जटिल प्रश्नों ने भावी कलेक्टरों को काफी परेशान किया। एक सवाल में उन्हें सरपंच की भूमिका में खड़ा करके निर्णय लेने के लिए कहा गया।
निर्णयन पर आधारित सामान्य अध्ययन के चतुर्थ पेपर में सवाल था, ‘अगर आप किसी गांव के सरपंच हैं और मिड डे मिल में दलित रसोइयां नियुक्त हो गया जिसका सवर्ण छात्रों ने विरोध कर दिया तो क्या करेंगे।’ इसी तरह से एक प्रश्न था, ‘बाढ़ आ जाए तो वरिष्ठ नागरिक, महिला और बच्चों को बचाने में आप किसे वरीयता देंगे।’ इस पेपर में कुल 14 प्रश्न थे। इनमें से छह सवाल इसी तरह की परिस्थितियों पर आधारित थे। तीसरे प्रश्नपत्र में डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, कौशल विकास, रसोई गैस सब्सिडी में डीबीटी आदि पर सवाल पूछे गए थे।
विज्ञापन
निर्णयन पर आधारित सामान्य अध्ययन के चतुर्थ पेपर में सवाल था, ‘अगर आप किसी गांव के सरपंच हैं और मिड डे मिल में दलित रसोइयां नियुक्त हो गया जिसका सवर्ण छात्रों ने विरोध कर दिया तो क्या करेंगे।’ इसी तरह से एक प्रश्न था, ‘बाढ़ आ जाए तो वरिष्ठ नागरिक, महिला और बच्चों को बचाने में आप किसे वरीयता देंगे।’ इस पेपर में कुल 14 प्रश्न थे। इनमें से छह सवाल इसी तरह की परिस्थितियों पर आधारित थे। तीसरे प्रश्नपत्र में डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, कौशल विकास, रसोई गैस सब्सिडी में डीबीटी आदि पर सवाल पूछे गए थे।
विज्ञापन