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नाटक के विरुद्ध नाटक है बादल का रंगमंच
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 18 Jul 2015 02:11 AM IST
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इलाहाबाद। नाटककार, निर्देशक, अभिनेता बादल सरकार के 90वें जन्मदिवस पर समानांतर की ओर से चल रहे बादल सृजन उत्सव ‘बादल 90’ का अंतिम दिन ‘बादल सरकार और उनका तीसरा रंगमंच’ पर केंद्रित रहा। डॉ. गौतम चटर्जी ने बादल सरकार साक्षात्कार को ‘द फ्लैम दैट इज बादल सरकार’ को दिखाया।
परिचर्चा के दौरान डॉ. विधु खरे दास ने कहा कि तीसरे रंगमंच को समझने के लिए हमें पहले एवं दूसरे रंगमंच को जानना बहुत जरूरी है। नाटककार, अभिनेत्री वेदा प्रकाश ने कहा कि बादल सरकार के तीसरे रंगमंच के नाटकों से हमें रंगकर्म करने की प्रेरणा मिलती है। प्रो. अनीता गोपेश ने 2011 के बादल सृजन उत्सव के अनुभवों को व्यक्त किया। गौतम चटर्जी ने कहा कि बादल दा से हर बार मिलना और साक्षात्कार लेना नई ऊर्जा दे जाता था। डॉ. अनुपम आनंद ने कहा कि तीसरे रंगमंच में प्रशिक्षण के दौरान जो ऊर्जा उन्हें बादल दा से प्राप्त हुई, उसने उन्हें आज तक तीसरे रंगमंच से जोड़ा हुआ है। नाटककार राकेश ने कहा कि नाटक के विरुद्ध नाटक है बादल सरकार का रंगमंच।
हरिश्चंद्र द्विवेदी ने कहा कि तीसरे रंगमंच आज के दौर में जनता से संवाद करने के लिए सबसे उपयुक्त है। डॉ. राजेेंद्र कुमार ने कहा कि बादल दा का हर नाटक सरकार को और बेहतर बनाने पर केंद्रित रहता है। रत्ना घोषाल और हिमांशु राय ने बादल दा के साथ अनुभवों का सझा किया। बादल दा की पत्नी विशाखा रे सरकार ने कहा कि एक महान कृतिकार की पत्नी होने पर उन्हें गर्व है। उन्होंने बादल दा विचारों को आत्मसात करने और युवाओं तक पहुंचाने के लिए समानांतर की सराहना की।
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इससे पूर्व बादल नाट्य कार्यशाला में नाटककार राकेश ने प्रतिभागियों को रंगकर्म के बुनियादी तत्वों से अवगत कराया। बादल सरकार के रंगदल शताब्दी द्वारा मूल रास्ता और मिक्षिल जुलूस का वीडियो प्रदर्शन सेंटर ऑफ मीडिया स्ट्डीज के सहयोग से प्रदर्शित किया। कार्यक्रम का संचालन अनिल रंजन भौमिक ने किया। कार्यक्रम में डॉ. उर्मिला जैन, शशि शर्मा, आलोक, रामचंद्र गुप्त, अरिंदम घोष आदि मौजूद रहे।
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परिचर्चा के दौरान डॉ. विधु खरे दास ने कहा कि तीसरे रंगमंच को समझने के लिए हमें पहले एवं दूसरे रंगमंच को जानना बहुत जरूरी है। नाटककार, अभिनेत्री वेदा प्रकाश ने कहा कि बादल सरकार के तीसरे रंगमंच के नाटकों से हमें रंगकर्म करने की प्रेरणा मिलती है। प्रो. अनीता गोपेश ने 2011 के बादल सृजन उत्सव के अनुभवों को व्यक्त किया। गौतम चटर्जी ने कहा कि बादल दा से हर बार मिलना और साक्षात्कार लेना नई ऊर्जा दे जाता था। डॉ. अनुपम आनंद ने कहा कि तीसरे रंगमंच में प्रशिक्षण के दौरान जो ऊर्जा उन्हें बादल दा से प्राप्त हुई, उसने उन्हें आज तक तीसरे रंगमंच से जोड़ा हुआ है। नाटककार राकेश ने कहा कि नाटक के विरुद्ध नाटक है बादल सरकार का रंगमंच।
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हरिश्चंद्र द्विवेदी ने कहा कि तीसरे रंगमंच आज के दौर में जनता से संवाद करने के लिए सबसे उपयुक्त है। डॉ. राजेेंद्र कुमार ने कहा कि बादल दा का हर नाटक सरकार को और बेहतर बनाने पर केंद्रित रहता है। रत्ना घोषाल और हिमांशु राय ने बादल दा के साथ अनुभवों का सझा किया। बादल दा की पत्नी विशाखा रे सरकार ने कहा कि एक महान कृतिकार की पत्नी होने पर उन्हें गर्व है। उन्होंने बादल दा विचारों को आत्मसात करने और युवाओं तक पहुंचाने के लिए समानांतर की सराहना की।
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इससे पूर्व बादल नाट्य कार्यशाला में नाटककार राकेश ने प्रतिभागियों को रंगकर्म के बुनियादी तत्वों से अवगत कराया। बादल सरकार के रंगदल शताब्दी द्वारा मूल रास्ता और मिक्षिल जुलूस का वीडियो प्रदर्शन सेंटर ऑफ मीडिया स्ट्डीज के सहयोग से प्रदर्शित किया। कार्यक्रम का संचालन अनिल रंजन भौमिक ने किया। कार्यक्रम में डॉ. उर्मिला जैन, शशि शर्मा, आलोक, रामचंद्र गुप्त, अरिंदम घोष आदि मौजूद रहे।