{"_id":"4c792191c4a0dde2cc5a68a5cc7004ee","slug":"allahabad-news-hindi-news-287","type":"story","status":"publish","title_hn":"बिना टांके के कार्निया का प्रत्यारोपण ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बिना टांके के कार्निया का प्रत्यारोपण
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 29 Nov 2015 02:36 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इलाहाबाद (ब्यूरो)। आंखों के कार्निया का प्रत्यारोपण अब और आसान हो जाएगा। नई दिल्ली एम्स की डॉ. नम्रता शर्मा ने मरीज की सर्जरी कर यहां के विशेषज्ञों को प्रशिक्षित किया। बताया कि आंखों के कार्निया का प्रत्यारोपण बिना टांका लगाए ही किया जा सकता है। उन्होंने मनोहर दास नेत्र चिकित्सालय (एमडीआई) में आयोजित उत्तर प्रदेश ऑप्थैलमोलॉजिकल सोसाइटी के गोल्डेन जुबली सम्मेलन में यह भी बताया कि नई विधि से एक कार्निया दो या तीन मरीजों में प्रत्यारोपित किया जा सकता है।
डॉ. नम्रता ने बताया कि अभी तक मरीजों को पूरे कार्निया का प्रत्यारोपण किया किया जाता रहा है। छोटे शहरों में अभी भी यही हो रहा है, लेकिन ‘एंटीरियर लेवलर केरोटोप्लास्टी’ एवं ‘पोस्टेरियर लेवलर केरोटोप्लास्टी’ के जरिए बड़े शहरों में कार्निया का प्रत्यारोपण आसान हो गया है। डॉ. नम्रता शर्मा ने कहा कि कार्निया में दो लेयर (स्तर) होती है। कार्निया की एक लेयर चाहे पहले वाली या बाद वाली खराब होती थी तो पूरा कार्निया ही प्रत्यारोपण करना ही चिकित्सकों के पास विकल्प होता था, लेकिन अब इन दोनों विधियों से कार्निया की खराब होने वाली लेयर को ही प्रत्यारोपित किया जाएगा।
इस प्रत्यारोपण में मरीज की आंखों में कोई टांके भी (पूरे कार्निया के प्रत्यारोपण में 16 टांके लगते हैं) नहीं लगाए जाएंगे। मरीज को दिन भर में अस्पताल से छुट्टी और सरकारी अस्पताल में उसका कोई खर्चा भी नहीं। डॉ. नम्रता शर्मा ने बताया कि इस विधि से नेत्र दानी की एक कार्निया से दो तीन मरीजों का उपचार आसानी से हो जाएगा। यह विधि 90 फीसदी से ज्यादा सफल है, जबकि पूरी कार्निया के प्रत्यारोपण में केवल सफलता की दर 70 फीसदी है।
विज्ञापन
डायबिटीज से अगर आंखों में सूजन आ जाए या ब्लड का सरकुलेशन बंद हो जाए तो अब आंखों की रोशनी न तो गुम हो पाएगी और न ही कम। बाजार में ऐसे इंजेक्शन आ गए हैं। इसे लगाने के बाद आंखों की रोशनी सुरक्षित बची रहेगी। उक्त बातें एम्स नई दिल्ली के पूर्व सहायक प्रोफेसर डॉ. दिनेश तलवार ने कही। वह एमडीआई में आयोजित उत्तर प्रदेश ऑप्थैलमोलॉजिकल सोसाइटी के गोल्डन जुबली सम्मेलन में बोल रहे थे। उन्होंने बताया कि आंखों के पर्दे में होने वाली बीमारियों के बारे में बताया। कहा कि 60 वर्षों के बाद या फिर डायबिटीज के मरीजों की रोशनी कम होने लगती है। इसके कई कारण हो सकते हैं।
अभी तक इसके उपचार के लिए लेजर थिरेपी थी, लेकिन बहुत सारे मामलों में यह काम नहीं करती। इंजेक्शन लूसेंटिस, एएफलिबरसेप्ट और ऑजुरडेक्स से पर्दे की सूजन कम हो जाएगी और रोशनी को भी नहीं जाने देगी। मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज दिल्ली के निदेशक प्रो. कमलेश ने तिरछी आंख का ऑपरेशन कर इस प्रकार की परेशानी को दूर करने के उपाय बताए।
मोती लाल नेहरू मेडिकल (एमएलएनएम) कॉलेज में चल रहे उत्तर प्रदेश ऑप्थैलमोलॉजिकल सोसाइटी के 50 वें गोल्डेन जुबली सम्मेलन में शनिवार को प्रदेश की नई कार्यकारिणी का गठन कर दिया गया। एमएलएनएम कॉलेज के प्राचार्य प्रो. एसपी सिंह को नया अध्यक्ष चुना गया है। उन्होंने अपना कार्यभार निवर्तमान अध्यक्ष प्रो. डीजे पांडेय से ग्रहण कर लिया है। सचिव डॉ. मलय चतुर्वेदी चुने गए। उपाध्यक्ष डॉ. आरसी गुप्ता, संयुक्त सचिव डॉ. आरएन, कोषाध्यक्ष डॉ. शालिनी को चुना गया। इसके पूर्व कार्यक्रम में पदाधिकारियों के चयन के लिए वोटिंग हुई। 12 सौ से अधिक मतदाताओं में से पौने
चिकित्सक की भूमिका समाज में बहुत ही व्यापक है। लोग इसकी उम्मीद भी उनसे लगाए रहते हैं। इससे चिकित्सकों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। उन्हें अपने प्रोफेशन के प्रति समर्पित रहने के साथ मरीजों के प्रति भी समर्पित होना जरूरी है। यह बातें न्यायमूर्ति वीके शुक्ला ने मोती लाल नेहरू मेडिकल (एमएलएनएम) कॉलेज में चल रहे उत्तर प्रदेश ऑप्थैलमोलॉजिकल सोसाइटी के 50 वें गोल्डेन जुबली सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में कहीं। वह बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी, न्यायमूर्ति विक्रमनाथ, न्यायमूर्ति आरडी खरे, मंडलायुक्त राजन शुक्ला ने भी अपनी बात रखी। उद्घाटन सत्र दीप प्रज्ज्वलन से शुरू हुआ।
सोसाइटी के प्रो. कमलजीत सिंह ने रिपोर्ट रखी। साइंटिफिक कमेटी के चेयरमैन डॉ. धर्मेंद्र नाथ ने इस क्षेत्र में बेहतर कार्य करने वाले चिकित्सकों के नामों की घोषणा की, जिनको मुख्य अतिथि ने मेडल प्रदान किया। मेडल पाने वालों में डॉ. स्वाती चावला, डॉ. कोपल मित्तल, डॉ. मनीष सक्सेना, डॉ. श्रद्धा रस्तोगी, डॉ. अरुषी गर्ग, प्रो. श्रीकांत, डॉ. सनी के गुप्ता, डॉ. पल्लवी सिंह शामिल (कई लोगों के पुरस्कार उनके प्रतिनिधियों ने ग्रहण किया) है। स्वागत कार्यक्रम के मुख्य सचिव प्रो. एसपी सिंह ने किया।
संचालन प्रो. कमलजीत सिंह और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. मयंक सिंह ने किया। इस मौके पर पर सोसाइटी के बड़ी संख्या में पूर्व अध्यक्ष सहित मेडिकल कॉलेज के शिक्षक, देश एवं प्रदेश भर से सोसाइटी के सदस्य मौजूद रहे। इसके पूर्व कार्यक्रम के तहत शुक्रवार को मनोहर दास नेत्र चिकित्सालय में कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें देश भर के नामी-गिरामी चिकित्सकों ने उपचार की नई विधियों की जानकारी देने के साथ कई मरीजों की सर्जरी की। इसका लाइव प्रसारण भी किया गया। कार्यशाला का उद्घाटन डीएम संजय कुमार ने किया। इस मौके पर सोसाइटी के संरक्षक प्रो.आरएन मिश्रा, डॉ. वरुण कुमार नायक, डॉ. अतुल कुमार, डॉ. राजेंद्र खन्ना, डॉ. योगेश शुक्ला आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
डॉ. नम्रता ने बताया कि अभी तक मरीजों को पूरे कार्निया का प्रत्यारोपण किया किया जाता रहा है। छोटे शहरों में अभी भी यही हो रहा है, लेकिन ‘एंटीरियर लेवलर केरोटोप्लास्टी’ एवं ‘पोस्टेरियर लेवलर केरोटोप्लास्टी’ के जरिए बड़े शहरों में कार्निया का प्रत्यारोपण आसान हो गया है। डॉ. नम्रता शर्मा ने कहा कि कार्निया में दो लेयर (स्तर) होती है। कार्निया की एक लेयर चाहे पहले वाली या बाद वाली खराब होती थी तो पूरा कार्निया ही प्रत्यारोपण करना ही चिकित्सकों के पास विकल्प होता था, लेकिन अब इन दोनों विधियों से कार्निया की खराब होने वाली लेयर को ही प्रत्यारोपित किया जाएगा।
विज्ञापन
इस प्रत्यारोपण में मरीज की आंखों में कोई टांके भी (पूरे कार्निया के प्रत्यारोपण में 16 टांके लगते हैं) नहीं लगाए जाएंगे। मरीज को दिन भर में अस्पताल से छुट्टी और सरकारी अस्पताल में उसका कोई खर्चा भी नहीं। डॉ. नम्रता शर्मा ने बताया कि इस विधि से नेत्र दानी की एक कार्निया से दो तीन मरीजों का उपचार आसानी से हो जाएगा। यह विधि 90 फीसदी से ज्यादा सफल है, जबकि पूरी कार्निया के प्रत्यारोपण में केवल सफलता की दर 70 फीसदी है।
विज्ञापन
डायबिटीज से अगर आंखों में सूजन आ जाए या ब्लड का सरकुलेशन बंद हो जाए तो अब आंखों की रोशनी न तो गुम हो पाएगी और न ही कम। बाजार में ऐसे इंजेक्शन आ गए हैं। इसे लगाने के बाद आंखों की रोशनी सुरक्षित बची रहेगी। उक्त बातें एम्स नई दिल्ली के पूर्व सहायक प्रोफेसर डॉ. दिनेश तलवार ने कही। वह एमडीआई में आयोजित उत्तर प्रदेश ऑप्थैलमोलॉजिकल सोसाइटी के गोल्डन जुबली सम्मेलन में बोल रहे थे। उन्होंने बताया कि आंखों के पर्दे में होने वाली बीमारियों के बारे में बताया। कहा कि 60 वर्षों के बाद या फिर डायबिटीज के मरीजों की रोशनी कम होने लगती है। इसके कई कारण हो सकते हैं।
अभी तक इसके उपचार के लिए लेजर थिरेपी थी, लेकिन बहुत सारे मामलों में यह काम नहीं करती। इंजेक्शन लूसेंटिस, एएफलिबरसेप्ट और ऑजुरडेक्स से पर्दे की सूजन कम हो जाएगी और रोशनी को भी नहीं जाने देगी। मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज दिल्ली के निदेशक प्रो. कमलेश ने तिरछी आंख का ऑपरेशन कर इस प्रकार की परेशानी को दूर करने के उपाय बताए।
मोती लाल नेहरू मेडिकल (एमएलएनएम) कॉलेज में चल रहे उत्तर प्रदेश ऑप्थैलमोलॉजिकल सोसाइटी के 50 वें गोल्डेन जुबली सम्मेलन में शनिवार को प्रदेश की नई कार्यकारिणी का गठन कर दिया गया। एमएलएनएम कॉलेज के प्राचार्य प्रो. एसपी सिंह को नया अध्यक्ष चुना गया है। उन्होंने अपना कार्यभार निवर्तमान अध्यक्ष प्रो. डीजे पांडेय से ग्रहण कर लिया है। सचिव डॉ. मलय चतुर्वेदी चुने गए। उपाध्यक्ष डॉ. आरसी गुप्ता, संयुक्त सचिव डॉ. आरएन, कोषाध्यक्ष डॉ. शालिनी को चुना गया। इसके पूर्व कार्यक्रम में पदाधिकारियों के चयन के लिए वोटिंग हुई। 12 सौ से अधिक मतदाताओं में से पौने
चिकित्सक की भूमिका समाज में बहुत ही व्यापक है। लोग इसकी उम्मीद भी उनसे लगाए रहते हैं। इससे चिकित्सकों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। उन्हें अपने प्रोफेशन के प्रति समर्पित रहने के साथ मरीजों के प्रति भी समर्पित होना जरूरी है। यह बातें न्यायमूर्ति वीके शुक्ला ने मोती लाल नेहरू मेडिकल (एमएलएनएम) कॉलेज में चल रहे उत्तर प्रदेश ऑप्थैलमोलॉजिकल सोसाइटी के 50 वें गोल्डेन जुबली सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में कहीं। वह बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी, न्यायमूर्ति विक्रमनाथ, न्यायमूर्ति आरडी खरे, मंडलायुक्त राजन शुक्ला ने भी अपनी बात रखी। उद्घाटन सत्र दीप प्रज्ज्वलन से शुरू हुआ।
सोसाइटी के प्रो. कमलजीत सिंह ने रिपोर्ट रखी। साइंटिफिक कमेटी के चेयरमैन डॉ. धर्मेंद्र नाथ ने इस क्षेत्र में बेहतर कार्य करने वाले चिकित्सकों के नामों की घोषणा की, जिनको मुख्य अतिथि ने मेडल प्रदान किया। मेडल पाने वालों में डॉ. स्वाती चावला, डॉ. कोपल मित्तल, डॉ. मनीष सक्सेना, डॉ. श्रद्धा रस्तोगी, डॉ. अरुषी गर्ग, प्रो. श्रीकांत, डॉ. सनी के गुप्ता, डॉ. पल्लवी सिंह शामिल (कई लोगों के पुरस्कार उनके प्रतिनिधियों ने ग्रहण किया) है। स्वागत कार्यक्रम के मुख्य सचिव प्रो. एसपी सिंह ने किया।
संचालन प्रो. कमलजीत सिंह और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. मयंक सिंह ने किया। इस मौके पर पर सोसाइटी के बड़ी संख्या में पूर्व अध्यक्ष सहित मेडिकल कॉलेज के शिक्षक, देश एवं प्रदेश भर से सोसाइटी के सदस्य मौजूद रहे। इसके पूर्व कार्यक्रम के तहत शुक्रवार को मनोहर दास नेत्र चिकित्सालय में कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें देश भर के नामी-गिरामी चिकित्सकों ने उपचार की नई विधियों की जानकारी देने के साथ कई मरीजों की सर्जरी की। इसका लाइव प्रसारण भी किया गया। कार्यशाला का उद्घाटन डीएम संजय कुमार ने किया। इस मौके पर सोसाइटी के संरक्षक प्रो.आरएन मिश्रा, डॉ. वरुण कुमार नायक, डॉ. अतुल कुमार, डॉ. राजेंद्र खन्ना, डॉ. योगेश शुक्ला आदि मौजूद रहे।