{"_id":"7bd5753bc4dc68933af58a380bcd683d","slug":"allahabad-news-hindi-news-139","type":"story","status":"publish","title_hn":"माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष की नियुक्ति रद्द","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष की नियुक्ति रद्द
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 05 Oct 2015 11:53 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के अध्यक्ष डा. सनिल कुमार की नियुक्ति को हाईकोर्ट ने अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है। चेयरमैन की नियुक्ति संबंधी मूल दस्तावेज देखने के बाद न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्र की खंडपीठ ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने अध्यक्ष की नियुक्ति में न तो किसी मानक का ध्यान रखा और न ही योग्यता का।
मनमाने तरीके से एक ऐसे व्यक्ति को चेयरमैन बना दिया गया जो इस पद पर नियुक्त होने की योग्यता ही नहीं रखता है। कोर्ट ने बोर्ड के तीन सदस्यों अनीता यादव, आशालता सिंह और ललित कुमार के काम करने पर भी रोक जारी रखने का आदेश दिया है। अदालत ने इनकी नियुक्तियों से संबंधित फाइलों को लेकर आपत्ति जताई है। फाइल में छेड़छाड़ की गई है और प्रपत्र बिना पेज नंबर के लगे हैं। इस बाबत मुख्य सचिव से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है। सदस्यों के प्रकरण पर अदालत आठ अक्तूबर को सुनवाई करेगी।
प्रदेश सरकार की ओर से डा. सनिल कुमार की नियुक्ति से संबंधित फाइल अदालत में पेश की गई। फाइल देखने से पता चला कि नियुक्ति के लिए पद का विज्ञापन नहीं किया गया। सनिल कुमार का बायोडेटा बिना तारीख के लगा था। वह प्राचार्य के पद पर न होकर कार्यवाहक प्राचार्य के तौर पर काम कर रहे थे तथा सरकार यह भी नहीं बता सकी कि सनिल कुमार का शिक्षा के क्षेत्र में ऐसा कौन सा उल्लेखनीय योगदान है जिसकी वजह से उनको बोर्ड का चेयरमैन बनाया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि चेयरमैन की नियुक्ति के लिए विहित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। नियुक्ति में कोई पारदर्शिता नहीं है। लिहाजा सनिल कुमार चेयरमैन के पद पर बने रहने के योग्य नहीं हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
मनमाने तरीके से एक ऐसे व्यक्ति को चेयरमैन बना दिया गया जो इस पद पर नियुक्त होने की योग्यता ही नहीं रखता है। कोर्ट ने बोर्ड के तीन सदस्यों अनीता यादव, आशालता सिंह और ललित कुमार के काम करने पर भी रोक जारी रखने का आदेश दिया है। अदालत ने इनकी नियुक्तियों से संबंधित फाइलों को लेकर आपत्ति जताई है। फाइल में छेड़छाड़ की गई है और प्रपत्र बिना पेज नंबर के लगे हैं। इस बाबत मुख्य सचिव से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है। सदस्यों के प्रकरण पर अदालत आठ अक्तूबर को सुनवाई करेगी।
विज्ञापन
प्रदेश सरकार की ओर से डा. सनिल कुमार की नियुक्ति से संबंधित फाइल अदालत में पेश की गई। फाइल देखने से पता चला कि नियुक्ति के लिए पद का विज्ञापन नहीं किया गया। सनिल कुमार का बायोडेटा बिना तारीख के लगा था। वह प्राचार्य के पद पर न होकर कार्यवाहक प्राचार्य के तौर पर काम कर रहे थे तथा सरकार यह भी नहीं बता सकी कि सनिल कुमार का शिक्षा के क्षेत्र में ऐसा कौन सा उल्लेखनीय योगदान है जिसकी वजह से उनको बोर्ड का चेयरमैन बनाया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि चेयरमैन की नियुक्ति के लिए विहित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। नियुक्ति में कोई पारदर्शिता नहीं है। लिहाजा सनिल कुमार चेयरमैन के पद पर बने रहने के योग्य नहीं हैं।
विज्ञापन