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हाईकोर्ट जिसे चाहेगा वही बनेगा प्रमुख सचिव न्याय:वृहदपीठ
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 27 Feb 2016 01:19 AM IST
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प्रमुख सचिव विधि/विधि परामर्शी(एलआर) के पद नियुक्ति को लेकर शुक्रवार को प्रदेश सरकार को वृहदपीठ ने जमकर खरीखोटी सुनाई। आदेश का पालन न होने से नाराज जजों ने साफ-साफ कह दिया कि एलआर की नियुक्ति करना उनका अधिकार है, सरकार का नहीं। वह जिसे चाहेंगे उसी की नियुक्ति सरकार को करनी होगी। यदि किसी के नाम पर असहमति है तो उसका कारण लिखित में स्पष्ट करना होगा। कोर्ट सीनियर आईएएस प्रवीण कुमार के उस पत्र से बेहद नाराज थी, जिसमें उन्होंने रजिस्ट्रार जनरल को यह बता दिया कि एलआर की नियुक्ति सरकार का अधिकार है, हाईकोर्ट सिर्फ नाम भेजे।
वृहदपीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 235 में किसी न्यायिक अधिकारी की नियुक्ति का अधिकार सिर्फ हाईकोर्ट के पास है। सरकार सिर्फ उसी अधिकारी की नियुक्ति कर सकती है जिसका नाम हाईकोर्ट भेजेगा। यह हाईकोर्ट का संवैधानिक अधिकार है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में प्रमुख सचिव न्याय का पद लगभग एक वर्ष से रिक्त चल रहा है। इस पद पर जिला जज स्तर के न्यायिक अधिकारी की नियुक्ति की जाती है, जो सरकार और न्यायपालिका के बीच कड़ी का काम करता है। न्यायिक अधिकारी का नाम हाईकोर्ट द्वारा भेजा जाता है क्योंकि वह हाईकोर्ट के मातहत होते हैं। हाईकोर्ट ने कई महीने पहले इस पद के लिए अधिकारी का नाम भेज दिया, मगर सरकार ने अब तक नियुक्ति नहीं की। पिछली सुनवाई पर भी वृहदपीठ ने कड़े लहजे में एलआर की नियुक्ति शीघ्र करने का निर्देश दिया इसके बावजूद नियुक्ति नहीं की गई।
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वृहदपीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 235 में किसी न्यायिक अधिकारी की नियुक्ति का अधिकार सिर्फ हाईकोर्ट के पास है। सरकार सिर्फ उसी अधिकारी की नियुक्ति कर सकती है जिसका नाम हाईकोर्ट भेजेगा। यह हाईकोर्ट का संवैधानिक अधिकार है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में प्रमुख सचिव न्याय का पद लगभग एक वर्ष से रिक्त चल रहा है। इस पद पर जिला जज स्तर के न्यायिक अधिकारी की नियुक्ति की जाती है, जो सरकार और न्यायपालिका के बीच कड़ी का काम करता है। न्यायिक अधिकारी का नाम हाईकोर्ट द्वारा भेजा जाता है क्योंकि वह हाईकोर्ट के मातहत होते हैं। हाईकोर्ट ने कई महीने पहले इस पद के लिए अधिकारी का नाम भेज दिया, मगर सरकार ने अब तक नियुक्ति नहीं की। पिछली सुनवाई पर भी वृहदपीठ ने कड़े लहजे में एलआर की नियुक्ति शीघ्र करने का निर्देश दिया इसके बावजूद नियुक्ति नहीं की गई।
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