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‘अ डॉटर्स ड्रीम’ से होगा अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का आगाज
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 25 Feb 2016 11:39 PM IST
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जेड एंड जेड मीडिया की ओर से दूसरा अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव शुक्रवार सांस्कृतिक केंद्र में ‘अ डॉटर्स ड्रीम’ फिल्म के साथ होगा। फिल्म महोत्सव की थीम ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ के थीम पर केंद्रित रहेगा। इसलिए ज्यादातर फिल्में बालिकाओं के मुद्दों पर केंद्रित फिल्मों का ही प्रदर्शन किया जाएगा। महोत्सव में देश विदेश की 54 लघु, डॉक्यूमेंट्री, फीचर और एनीमेशन फिल्में प्रदर्शित की जाएंगी।
महोत्सव के निदेशक हसन हैदर ने बृहस्पतिवार को प्रेसवार्ता में बताया कि वरिष्ठ फिल्म लेखक सागर सरहदी को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से नवाजा जाएगा। महोत्सव में फिल्म स्कॉलर अमृत गैंगर, निर्माता-निर्देशक स्टाजिंन डोरजिए, अभिनेता- फिल्मकार गुल रेयाज और तेहरान से आए फिल्मकार मसूद बख्शी बतौर ज्यूरी मौजूद रहेंगे।
आजकल की फिल्में तड़क-भड़क वाली हैं। इनमें पुरानी फिल्मों जैसी बात नहीं है। आज कल तो फिल्में कपूर और खान के नाम से जानी जाती हैं। यह बातें बृहस्पतिवार को सिलसिला, कभी-कभी जैसी बेहतरीन फिल्मों के लेखक सागर सरहदी ने कही। कहा कि बदलती तकनीक ने सिनेमा हाल के क्रेज को कम कर दिया है। निर्देशक तमाम कोशिशें कर लें, लेकिन दर्शकों को वह सिनेमाहाल तक नहीं पाएंगे, क्योंकि फिल्मों को तो लोग अब मोबाइल में देख लेते हैं।
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वहीं वरिष्ठ फिल्म लेखक कमलेश पांडेय ने कहा कि पिछले कुछ सालों में छोटे शहरों से कमाल का हुनर आ रहा है। चाहे अभिनय हो या लेखन। प्रयाग में हुनर और कहानियों की कमी नहीं है। इसलिए लेखक निर्देशक अब नई कहानियों और प्रतिभाओं की तलाश के लिए इस शहर का रुख कर रहे हैं। फिल्म महोत्सव प्रयाग में करने का मकसद भी यहीं है कि यहां के उभरते हुए कलाकारों, लेखकों को मंच मिल सके।
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महोत्सव के निदेशक हसन हैदर ने बृहस्पतिवार को प्रेसवार्ता में बताया कि वरिष्ठ फिल्म लेखक सागर सरहदी को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से नवाजा जाएगा। महोत्सव में फिल्म स्कॉलर अमृत गैंगर, निर्माता-निर्देशक स्टाजिंन डोरजिए, अभिनेता- फिल्मकार गुल रेयाज और तेहरान से आए फिल्मकार मसूद बख्शी बतौर ज्यूरी मौजूद रहेंगे।
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आजकल की फिल्में तड़क-भड़क वाली हैं। इनमें पुरानी फिल्मों जैसी बात नहीं है। आज कल तो फिल्में कपूर और खान के नाम से जानी जाती हैं। यह बातें बृहस्पतिवार को सिलसिला, कभी-कभी जैसी बेहतरीन फिल्मों के लेखक सागर सरहदी ने कही। कहा कि बदलती तकनीक ने सिनेमा हाल के क्रेज को कम कर दिया है। निर्देशक तमाम कोशिशें कर लें, लेकिन दर्शकों को वह सिनेमाहाल तक नहीं पाएंगे, क्योंकि फिल्मों को तो लोग अब मोबाइल में देख लेते हैं।
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वहीं वरिष्ठ फिल्म लेखक कमलेश पांडेय ने कहा कि पिछले कुछ सालों में छोटे शहरों से कमाल का हुनर आ रहा है। चाहे अभिनय हो या लेखन। प्रयाग में हुनर और कहानियों की कमी नहीं है। इसलिए लेखक निर्देशक अब नई कहानियों और प्रतिभाओं की तलाश के लिए इस शहर का रुख कर रहे हैं। फिल्म महोत्सव प्रयाग में करने का मकसद भी यहीं है कि यहां के उभरते हुए कलाकारों, लेखकों को मंच मिल सके।