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इलाहाबाद में मेट्रो चलाना दूर की कौड़ी
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 04 Sep 2015 02:05 AM IST
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इलाहाबाद। मुख्यमंत्री ने इलाहाबाद में मेट्रो रेल के लिए कवायद शुरू करने का फरमान तो जारी कर दिया है लेकिन जिस तरीके और आधार पर इसकी घोषणा की है, उससे सरकार के मौजूदा कार्यकाल में उसकी शुरुआत भी संभव नहीं दिखती। सरकार का डेढ़ वर्ष का कार्यकाल बचा है। इस अवधि में इसकी डिजाइन ही तैयार हो जाए तो बड़ी बात है। मुख्यमंत्री की घोषणा के अगले दिन ही मंडलायुक्त ने आनन-फानन में एडीए, नगर निगम, परिवहन, पुलिस, ट्रैफिक विभाग समेत अन्य विभागों की बैठक बुलाकर मेट्रो रेल का रूट मैप निर्धारित कर दिया। वैसे मेट्रो रेल का जो प्रस्ताव रखा गया, उसे एडीए ने सात वर्ष पहले ही तैयार किया था।
मुख्यमंत्री ने इलाहाबाद के स्मार्ट सिटी बनने पर बुधवार को नैनी के सड़वा में हुई जनसभा में मेट्रो रेल चलाने की घोषणा तो की लेकिन इस पर काम तब शुरू होना है, जब स्मार्ट सिटी के लिए काम प्रारंभ हो। स्थिति यह है कि स्मार्ट सिटी की घोषणा के एक वर्ष बाद भी अब तक सतह पर कुछ नहीं है। ऐसे में इलाहाबादियों के लिए मेट्रो रेल फिलहाल सपना ही है। मुख्यमंत्री ने अफसरों को फिजिबिल्टी रिपोर्ट तैयार करने को कहा था सो मंडलायुक्त राजन शुक्ला की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को हुई बैठक में एडीए उपाध्यक्ष अजय कुमार सिंह ने वर्ष 2008 में मेट्रो रेल के लिए बनाए चार चरणों का रूट मैप प्रस्तुत कर दिया।
इसके तहत पश्चिम-पूर्व में 30.20 किलोमीटर का रूट नंबर एक होगा, जो मनौरी टर्मिनल, एयरफोर्स स्टेशन बमरौली, ट्रांसपोर्ट नगर, हरवारा, सुलेमसराय, चौफटका, हाईकोर्ट, इलाहाबाद जंक्शन, सिविल लाइंस बस स्टेशन, केपी इंटर कॉलेज, तुलारामबाग, संगम होकर झूंसी में गोविंद बल्लभ पंत संस्थान, न्याय नगर होकर त्रिवेणीपुरम चक हरिवन टर्मिनस तक शामिल है। 40.20 किमी लंबे उत्तर-दक्षिण रूट दो में इलाहाबाद बाईपास टर्मिनल जलालपुर-प्रतापगढ़ रोड क्रासिंग से शांतिपुरम, फाफामऊ रेलवे स्टेशन, एमएनएनआईटी, गोविंदपुर, आईईआरटी, प्रयाग स्टेशन, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, टैगोर टाउन, सोहबतियाबाग, कीडगंज होकर यमुना पार नैनी रेलवे स्टेशन, आईटीआई इंडस्ट्रीज, यूपीएसआईडीसी होकर करछना कोहारा क्रासिंग टर्मिनल शामिल है।
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इसी तरह 7.70 किमी के पश्चिम-पूर्व के रूट नंबर तीन में सूबेदारगंज टर्मिनस, चौफटका, लूकरगंज, खुसरोबाग, नूरुल्ला रोड क्रासिंग, कोतवाली, सराफा बाजार, खुल्दाबाद होकर कीडगंज टर्मिनल तथा 10.70 किमी के उत्तर-दक्षिण रूट नंबर चार में एसटीपी महेवापट्टी टर्मिनल, एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट, मामा भांजा क्रासिंग, सीओडी गेट, इरादतगंज टर्मिनल तक को शामिल किया गया है। मंडलायुक्त ने रूट के सत्यापन के लिए रोडवेज के आरएम, एडीए की सीटीपी, नगर निगम के मुख्य अभियंता की संयुक्त टीम गठित करके इंटीग्रेटेड प्लान की सर्वे रिपोर्ट देने का निर्देश दिया। सर्वे रिपोर्ट पर विभिन्न विभागों से सुझाव एवं विचार विमर्श के बाद प्रस्ताव को अनुमोदन के लिए शासन को भेजा जाएगा। बैठक में डीएम कौशल राज शर्मा, डीआईजी भगवान स्वरूप, एसएसपी केएस ईमैनुएल, आरटीओ भीमसेन सिंह, एसपी ट्रैफिक राजकमल यादव, निगम के मुख्य अभियंता लोकेश जैन, एडीए के सीटीपी पीके सोलंकी एवं मुख्य
लखनऊ में निर्माणाधीन मेट्रो रेल परियोजना के पहले चरण में अमौसी से मुंशी पुलिया तक 22.878 किलोमीटर तथा चारबाग स्टेशन से बसंत कुंज तक 11.098 किलोमीटर मेट्रो रेल का काम हो रहा है। 12500 करोड़ रुपये लागत वाली योजना वर्ष 2009 से प्रक्रियारत थी। दिसंबर-2016 में मेट्रो का ट्रायल रन ट्रांसपोर्टनगर से चारबाग के बीच शुरू किये जाने की तैयारी है जबकि, मार्च-2017 से यात्री सवारी कर सकेंगे।
में पहले चरण में मानसरोवर से चांदपोल तक मेट्रो रेल का काम नवंबर 2010 में शुरू हुआ। कुल 9.63 किमी और 3149 करोड़ रुपये की लागत वाला पहला चरण का आधा काम जून में पूरा हुआ और तीन जून से ट्रेन का संचालन शुरू हुआ। शेष काम 2018 में पूरा होगा। दूसरे चरण में चांदपोल से बड़ी चौपड़ तक 6583 करोड़ रुपये की लागत वाली कुल 23.09 किमी मेट्रो रेल का काम 2021 में पूरा होगा।
ग्राहक संतुष्टीकरण में दिल्ली मैट्रो को वर्ल्ड में दूसरा स्थान हासिल है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दिल्ली में मैट्रो ट्रेन चलाने की परिकल्पना में 33 साल का वक्त लग गया। दिल्ली में मैट्रो ट्रेन चले इसकी परिकल्पना 1969 में की गई थी। लेकिन यहां पहली मैट्रो चलने में 33 साल का वक्त लग गया। देश के नामी इंजीनियर श्रीधरन अगर इस प्रोजेक्ट से न जुड़ते तो शायद दिल्ली में मैट्रो चलाने की अब भी तैयारी की जा रही होती। फिलहाल दिल्ली में वर्तमान समय कुल छह रूट पर 194 किलोमीटर के एरिया में मैट्रो का जाल बिछ चुका है। यह काम आगे भी जारी है।
दिल्ली में मैट्रो ट्रेन चलाने के लिए निर्माण कार्य एनडीए गर्वनमेंट के कार्यकाल में 10 अक्तूबर 1998 में शुरू हुआ। पहले चरण में रिठाला से दिलशाद गार्डन के बीच कुल 25.09 किलोमीटर एरिया में मैट्रो चलाने की तैयारी की गई। 24 दिसंबर 2002 को तब के प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने इस रूट पर मैट्रो को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके बाद यह लाइन शाहदरा तक बढ़ा दी गई। ओवर ऑल दिल्ली मैट्रो में अब तक 12 हजार करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। यहां मैट्रो के कुल 142 रेलवे स्टेशन हैं। इसमें से 38 स्टेशन अंडरग्राउंड हैं।
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मुख्यमंत्री ने इलाहाबाद के स्मार्ट सिटी बनने पर बुधवार को नैनी के सड़वा में हुई जनसभा में मेट्रो रेल चलाने की घोषणा तो की लेकिन इस पर काम तब शुरू होना है, जब स्मार्ट सिटी के लिए काम प्रारंभ हो। स्थिति यह है कि स्मार्ट सिटी की घोषणा के एक वर्ष बाद भी अब तक सतह पर कुछ नहीं है। ऐसे में इलाहाबादियों के लिए मेट्रो रेल फिलहाल सपना ही है। मुख्यमंत्री ने अफसरों को फिजिबिल्टी रिपोर्ट तैयार करने को कहा था सो मंडलायुक्त राजन शुक्ला की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को हुई बैठक में एडीए उपाध्यक्ष अजय कुमार सिंह ने वर्ष 2008 में मेट्रो रेल के लिए बनाए चार चरणों का रूट मैप प्रस्तुत कर दिया।
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इसके तहत पश्चिम-पूर्व में 30.20 किलोमीटर का रूट नंबर एक होगा, जो मनौरी टर्मिनल, एयरफोर्स स्टेशन बमरौली, ट्रांसपोर्ट नगर, हरवारा, सुलेमसराय, चौफटका, हाईकोर्ट, इलाहाबाद जंक्शन, सिविल लाइंस बस स्टेशन, केपी इंटर कॉलेज, तुलारामबाग, संगम होकर झूंसी में गोविंद बल्लभ पंत संस्थान, न्याय नगर होकर त्रिवेणीपुरम चक हरिवन टर्मिनस तक शामिल है। 40.20 किमी लंबे उत्तर-दक्षिण रूट दो में इलाहाबाद बाईपास टर्मिनल जलालपुर-प्रतापगढ़ रोड क्रासिंग से शांतिपुरम, फाफामऊ रेलवे स्टेशन, एमएनएनआईटी, गोविंदपुर, आईईआरटी, प्रयाग स्टेशन, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, टैगोर टाउन, सोहबतियाबाग, कीडगंज होकर यमुना पार नैनी रेलवे स्टेशन, आईटीआई इंडस्ट्रीज, यूपीएसआईडीसी होकर करछना कोहारा क्रासिंग टर्मिनल शामिल है।
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इसी तरह 7.70 किमी के पश्चिम-पूर्व के रूट नंबर तीन में सूबेदारगंज टर्मिनस, चौफटका, लूकरगंज, खुसरोबाग, नूरुल्ला रोड क्रासिंग, कोतवाली, सराफा बाजार, खुल्दाबाद होकर कीडगंज टर्मिनल तथा 10.70 किमी के उत्तर-दक्षिण रूट नंबर चार में एसटीपी महेवापट्टी टर्मिनल, एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट, मामा भांजा क्रासिंग, सीओडी गेट, इरादतगंज टर्मिनल तक को शामिल किया गया है। मंडलायुक्त ने रूट के सत्यापन के लिए रोडवेज के आरएम, एडीए की सीटीपी, नगर निगम के मुख्य अभियंता की संयुक्त टीम गठित करके इंटीग्रेटेड प्लान की सर्वे रिपोर्ट देने का निर्देश दिया। सर्वे रिपोर्ट पर विभिन्न विभागों से सुझाव एवं विचार विमर्श के बाद प्रस्ताव को अनुमोदन के लिए शासन को भेजा जाएगा। बैठक में डीएम कौशल राज शर्मा, डीआईजी भगवान स्वरूप, एसएसपी केएस ईमैनुएल, आरटीओ भीमसेन सिंह, एसपी ट्रैफिक राजकमल यादव, निगम के मुख्य अभियंता लोकेश जैन, एडीए के सीटीपी पीके सोलंकी एवं मुख्य
लखनऊ में निर्माणाधीन मेट्रो रेल परियोजना के पहले चरण में अमौसी से मुंशी पुलिया तक 22.878 किलोमीटर तथा चारबाग स्टेशन से बसंत कुंज तक 11.098 किलोमीटर मेट्रो रेल का काम हो रहा है। 12500 करोड़ रुपये लागत वाली योजना वर्ष 2009 से प्रक्रियारत थी। दिसंबर-2016 में मेट्रो का ट्रायल रन ट्रांसपोर्टनगर से चारबाग के बीच शुरू किये जाने की तैयारी है जबकि, मार्च-2017 से यात्री सवारी कर सकेंगे।
में पहले चरण में मानसरोवर से चांदपोल तक मेट्रो रेल का काम नवंबर 2010 में शुरू हुआ। कुल 9.63 किमी और 3149 करोड़ रुपये की लागत वाला पहला चरण का आधा काम जून में पूरा हुआ और तीन जून से ट्रेन का संचालन शुरू हुआ। शेष काम 2018 में पूरा होगा। दूसरे चरण में चांदपोल से बड़ी चौपड़ तक 6583 करोड़ रुपये की लागत वाली कुल 23.09 किमी मेट्रो रेल का काम 2021 में पूरा होगा।
ग्राहक संतुष्टीकरण में दिल्ली मैट्रो को वर्ल्ड में दूसरा स्थान हासिल है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दिल्ली में मैट्रो ट्रेन चलाने की परिकल्पना में 33 साल का वक्त लग गया। दिल्ली में मैट्रो ट्रेन चले इसकी परिकल्पना 1969 में की गई थी। लेकिन यहां पहली मैट्रो चलने में 33 साल का वक्त लग गया। देश के नामी इंजीनियर श्रीधरन अगर इस प्रोजेक्ट से न जुड़ते तो शायद दिल्ली में मैट्रो चलाने की अब भी तैयारी की जा रही होती। फिलहाल दिल्ली में वर्तमान समय कुल छह रूट पर 194 किलोमीटर के एरिया में मैट्रो का जाल बिछ चुका है। यह काम आगे भी जारी है।
दिल्ली में मैट्रो ट्रेन चलाने के लिए निर्माण कार्य एनडीए गर्वनमेंट के कार्यकाल में 10 अक्तूबर 1998 में शुरू हुआ। पहले चरण में रिठाला से दिलशाद गार्डन के बीच कुल 25.09 किलोमीटर एरिया में मैट्रो चलाने की तैयारी की गई। 24 दिसंबर 2002 को तब के प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने इस रूट पर मैट्रो को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके बाद यह लाइन शाहदरा तक बढ़ा दी गई। ओवर ऑल दिल्ली मैट्रो में अब तक 12 हजार करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। यहां मैट्रो के कुल 142 रेलवे स्टेशन हैं। इसमें से 38 स्टेशन अंडरग्राउंड हैं।