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Prayagraj News: हाईकोर्ट ने जन्मतिथि में कूटरचना के आरोपी शिक्षक की बर्खास्तगी का आदेश किया निरस्त
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प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जन्मतिथि और मूलनिवास में कूटरचना करने के आरोपी सहायक अध्यापक की बर्खास्तगी आदेश को रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने प्रबंध समिति को अध्यापक की सेवा सवेतन बहाल कर समस्त सेवा लाभ प्रदान करने का आदेश दिया है।
यह आदेश उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अजीत कुमार ने याची शिक्षक वसीम अहमद द्वारा प्रयागराज के मदरसा नाफ-ए-उल-उलूम अंजना की प्रबंध समिति द्वारा पारित बर्खास्तगी आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को स्वीकार करते हुए दिया।
मामला सैदाबाद स्थित मदरसा नाफ-ए-उल-उलूम अंजना का है। प्रबंध समिति ने सहायक अध्यापक वसीम अहमद को नवंबर 2015 में जन्मतिथि और मूलनिवास में कूट रचना करने समेत 12 आरोपों पर हुई जांच के आधार पर बर्खास्त करने करने का आदेश पारित किया था। याची ने बर्खास्तगी आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी, याची की ओर से बहस कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता समीर शर्मा का कहना था कि याची ने पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं। याची ने कारण बताओ नोटिस का निर्धारित समय में जवाब भी दिया था।
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याची को पक्ष रखने के लिए प्रबंध समिति ने जिस तिथि को बुलाया था, याची बीमार था। बीमारी की सूचना और अन्य तिथि निर्धारित करने का प्रार्थना पत्र अपने भाई से भिजवाया था, लेकिन प्रबंध समिति ने नैसर्गिक न्याय का उल्लंघन करते हुए जांच पूरी कर दी। कारण बताओ नोटिस के जवाब में याची द्वारा दिया गया स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं है की टिप्पणी के साथ बर्खास्तगी का अनुमोदन कर दिया।
याची ने उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड के रजिस्ट्रार के समक्ष निलंबन और बर्खास्तगी की आदेश को अनुमोदन न देने के संबंध में याचना की थी। रजिस्ट्रार ने प्रबंध समिति को याची की सेवा बहाल करने को निर्देशित किया था। याची के अधिवक्ता ने यह भी कहा कि याची की बर्खास्तगी से पूर्व मौखिक जांच नहीं की गई। कोर्ट ने उभय पक्षों को सुन कर शिक्षक की बर्खास्तगी आदेश को रद्द करते हुए प्रबंध समिति को आदेश दिया कि याची की सेवा सवेतन बहाल करते हुए सेवाओं के समस्त लाभ प्रदान करे।
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यह आदेश उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अजीत कुमार ने याची शिक्षक वसीम अहमद द्वारा प्रयागराज के मदरसा नाफ-ए-उल-उलूम अंजना की प्रबंध समिति द्वारा पारित बर्खास्तगी आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को स्वीकार करते हुए दिया।
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मामला सैदाबाद स्थित मदरसा नाफ-ए-उल-उलूम अंजना का है। प्रबंध समिति ने सहायक अध्यापक वसीम अहमद को नवंबर 2015 में जन्मतिथि और मूलनिवास में कूट रचना करने समेत 12 आरोपों पर हुई जांच के आधार पर बर्खास्त करने करने का आदेश पारित किया था। याची ने बर्खास्तगी आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी, याची की ओर से बहस कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता समीर शर्मा का कहना था कि याची ने पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं। याची ने कारण बताओ नोटिस का निर्धारित समय में जवाब भी दिया था।
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याची को पक्ष रखने के लिए प्रबंध समिति ने जिस तिथि को बुलाया था, याची बीमार था। बीमारी की सूचना और अन्य तिथि निर्धारित करने का प्रार्थना पत्र अपने भाई से भिजवाया था, लेकिन प्रबंध समिति ने नैसर्गिक न्याय का उल्लंघन करते हुए जांच पूरी कर दी। कारण बताओ नोटिस के जवाब में याची द्वारा दिया गया स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं है की टिप्पणी के साथ बर्खास्तगी का अनुमोदन कर दिया।
याची ने उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड के रजिस्ट्रार के समक्ष निलंबन और बर्खास्तगी की आदेश को अनुमोदन न देने के संबंध में याचना की थी। रजिस्ट्रार ने प्रबंध समिति को याची की सेवा बहाल करने को निर्देशित किया था। याची के अधिवक्ता ने यह भी कहा कि याची की बर्खास्तगी से पूर्व मौखिक जांच नहीं की गई। कोर्ट ने उभय पक्षों को सुन कर शिक्षक की बर्खास्तगी आदेश को रद्द करते हुए प्रबंध समिति को आदेश दिया कि याची की सेवा सवेतन बहाल करते हुए सेवाओं के समस्त लाभ प्रदान करे।