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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Allahabad highcourt It is wrong to demand the post on the basis of merit in the deceased dependent quota

Allahabad highcourt: मृतक आश्रित कोटे में योग्यता के आधार पर पद की मांग करना गलत 

Wed, 06 Apr 2022 12:13 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 06 Apr 2022 12:13 AM IST
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Allahabad highcourt It is wrong to demand the post on the basis of merit in the deceased dependent quota
allahabad highcourt - फोटो : Prayagraj
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि योग्यता के आधार पर मृतक आश्रित नियमावली के तहत नौकरी की मांग करना गलत है। कोर्ट ने कहा कि मृतक आश्रित को नौकरी कोई अधिकार नहीं है। बल्कि आर्थिक तंगी से तत्काल राहत देने के लिए ऐसे कानून बनाए गए हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी और न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी की खंडपीठ ने इकबाल खान द्वारा एकल जज के निर्णय के खिलाफ  दाखिल विशेष अपील को खारिज करते हुए दिया।
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याची ने मृतक आश्रित नियमावली के तहत नौकरी की मांग की थी। याची को लैब अटेंडेंट के रूप में नौकरी मिल गयी थी। उसने इस पद पर ज्वाइन भी कर लिया। करीब चार साल बाद उसने याचिका दायर कर मांग की कि उसे मृतक आश्रित के रूप में लैब अटेंडेंट की जगह फार्मासिस्ट के पद पर नौकरी दी जाए, क्योंकि वह इस पद की योग्यता रखता है।
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हाईकोर्ट के एकल जज ने याची की इस मांग को अस्वीकार कर दिया। साथ ही कहा कि उसने लैब अटेंडेंट पद पर ज्वाइन कर लिया है, फार्मासिस्ट का पद यूपी अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा भरा जाने वाला पद है। इस कारण याची की योग्यता के आधार पर फार्मासिस्ट के पद पर नियुक्ति नहीं की जा सकती।
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एकल पीठ का फैसला बरकरार रखा
एकल जज के इस आदेश को याची ने विशेष अपील दाखिल कर दो जजों के समक्ष चुनौती दी थी। याची का तर्क था कि आश्रित के रूप में नियुक्ति योग्यता के आधार पर की जाए। भले ही उसने नीचे का पद स्वीकार कर लिया हो। हाईकोर्ट की विशेष अपील बेंच ने याची की इस दलील को अस्वीकार कर दिया।


कोर्ट ने कहा कि मृतक आश्रित में नियुक्ति मृतक के परिवार को आर्थिक तंगी से तत्काल राहत देने के लिए की गयी है। याची पहले ही नौकरी पा चुका है और लैब अटेंडेंट के पद पर काम कर रहा है। कोर्ट ने कहा कि एकल न्यायाधीश द्वारा पारित आदेश में कोई कानूनी खामी नहीं है। इस कारण याची की विशेष अपील खारिज की जाती है।
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