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Allahabad highcourt: फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट आने में देरी पर कोर्ट सख्त
Thu, 28 Apr 2022 01:22 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 28 Apr 2022 01:22 AM IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आपराधिक मामलों की सुनवाई केदौरान फोरेंसिक लैब से जांच रिपोर्ट में देरी पर नाराजगी जताई है। फोरेंसिक लैब आगरा के निदेशक को तलब करते हुए मामले की सुनवाई के लिए 29 अप्रैल की तिथि निर्धारित की है। इसके साथ ही कोर्ट ने मामले में पुलिस महानिदेशक, गृह सचिव को यह निर्देश भी दिया कि वे यह बताएं कि त्वरित न्याय के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं? यह आदेश न्यायमूर्ति समित गोपाल ने मेरठ के प्रवीण पाल की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए दिया है।
कोर्ट ने कहा है कि फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट देरी से आना एक नियमित प्रक्रिया होती जा रही है। मामले में याची की पहली जमानत खारिज हो चुकी है। पहली जमानत की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने निचली अदालत को मुकदमे में तेजी लाकर उसे छह महीने में पूरा करने का निर्देश दिया था। याची की ओर से दूसरी जमानत अर्जी दाखिल की गई। कहा गया कि वह अप्रैल 2018 से जेल में है और मुकदमा समाप्त नहीं हुआ था।
इस पर कोर्ट ने जिला जज मेरठ को ट्रायल के चरण के संबंध में रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया है। निचली अदालत में मामले की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश ने मामले की रिपोर्ट हाईकोर्ट केसमक्ष भेजी। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि मुकदमे के दौरान मामले के सभी गवाहों से पूछताछ की गई है।
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हालांकि, मामले में कथित हथियार की जांच के संबंध में फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट अभी तक नहीं आ सकी है। इसके लिए रिमाइंडर भी भेजा गया लेकिन कोई जवाब नहीं आया। फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट को छोड़कर मुकदमे का ट्रायल लगभग पूरा किया जा चुका है।
इस पर हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की। कहा कि फोरेंसिक जांच में देरी होना एक नियमित प्रकृति बनती जा रही है। न्यायालयों के आदेशों के बावजूद व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ है। जांच से संबंधित व्यवस्था में सुधार के लिए किसी को कोई चिंता नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि वर्तमान मामला इसका ज्वलंत उदाहरण है। याची 23 अप्रैल 2018 से जेल में है। फोरेंसिक रिपोर्ट प्राप्त न होने की वजह से मुकदमे की सुनवाई पूरी नहीं हो सकी है। आरोप पत्र भी बिना फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट के बिना दाखिल कर दिया गया है, जिससे जांच रिपोर्ट को पूरा नहीं कहा जा सकता है।
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कोर्ट ने कहा है कि फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट देरी से आना एक नियमित प्रक्रिया होती जा रही है। मामले में याची की पहली जमानत खारिज हो चुकी है। पहली जमानत की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने निचली अदालत को मुकदमे में तेजी लाकर उसे छह महीने में पूरा करने का निर्देश दिया था। याची की ओर से दूसरी जमानत अर्जी दाखिल की गई। कहा गया कि वह अप्रैल 2018 से जेल में है और मुकदमा समाप्त नहीं हुआ था।
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इस पर कोर्ट ने जिला जज मेरठ को ट्रायल के चरण के संबंध में रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया है। निचली अदालत में मामले की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश ने मामले की रिपोर्ट हाईकोर्ट केसमक्ष भेजी। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि मुकदमे के दौरान मामले के सभी गवाहों से पूछताछ की गई है।
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हालांकि, मामले में कथित हथियार की जांच के संबंध में फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट अभी तक नहीं आ सकी है। इसके लिए रिमाइंडर भी भेजा गया लेकिन कोई जवाब नहीं आया। फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट को छोड़कर मुकदमे का ट्रायल लगभग पूरा किया जा चुका है।
इस पर हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की। कहा कि फोरेंसिक जांच में देरी होना एक नियमित प्रकृति बनती जा रही है। न्यायालयों के आदेशों के बावजूद व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ है। जांच से संबंधित व्यवस्था में सुधार के लिए किसी को कोई चिंता नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि वर्तमान मामला इसका ज्वलंत उदाहरण है। याची 23 अप्रैल 2018 से जेल में है। फोरेंसिक रिपोर्ट प्राप्त न होने की वजह से मुकदमे की सुनवाई पूरी नहीं हो सकी है। आरोप पत्र भी बिना फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट के बिना दाखिल कर दिया गया है, जिससे जांच रिपोर्ट को पूरा नहीं कहा जा सकता है।