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हाईकोर्ट का फरमान, सख्ती से खाली कराए जाएं सरकारी आवास

Fri, 06 Dec 2019 02:23 AM IST
इलाहाबाद ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज Published by: इलाहाबाद ब्यूरो Updated Fri, 06 Dec 2019 02:23 AM IST
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Allahabad high court harsh on government residence possession
विदा हों पुराने सरकारी मेहमान... - फोटो : अमर उजाला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तबादले या सेवानिवृत्ति के बाद भी कर्मचारियों, अधिकारियों द्वारा सरकारी आवास खाली न करने पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने ऐसे लोगों से सख्ती से आवास खाली कराने का निर्देश दिया है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि तय समय में आवास खाली न करने वालों पर कार्रवाई की जाए। इस बात का पता भी लगाया जाए कि सरकारी आवासों में कितने कर्मचारी अनाधिकृत रूप से कब्जा जमाए हुए हैं। स्थानांतरण या रिटायरमेंट के बाद एक निश्चित समय में आवास खाली होना चाहिए।
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कोर्ट ने कहा कि सरकारी आवासों को लेकर एक यूनीफार्म पॉलिसी (समान नीति) बनाई जाए, ताकि कर्मचारियों के आवास न छोड़ने पर प्रभावी कार्रवाई की जा सके। कोर्ट ने आवास खाली कराने के जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। राजकीय इंटर मीडिएट कॉलेज प्रयागराज के सहायक अध्यापक राकेश कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्र्ति एसपी केसरवानी ने कहा कि इस आदेश के पालन हेतु आदेश की प्रति मुख्य सचिव को भेजी जाए। याचिका पर अधिवक्ता आदर्श सिंह ने बहस की।
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कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार दो माह में सभी जिला प्राधिकारियों से अवधि बीत जाने के बाद भी सरकारी आवास खाली न करने वाले कर्मचारियों की जानकारी लेकर अगले एक माह में आवास खाली करा लिए जाएं। जीआईसी प्रयागराज में सहायक अध्यापक छोटे लाल यादव की प्रोन्नति के साथ तबादला कर दिया गया। यह आवास याची राकेश कुमार को आवंटित कर दिया गया। मगर, छोटे लाल ने कब्जा नहीं छोड़ा और उनका परिवार सरकारी आवास में रह रहा था। एक साल तक आवास खाली न होने पर याचिका दाखिल की गई। कोर्ट को बताया गया कि आवास लंबे समय तक खाली न करने पर छोटे लाल का वेतन रोक दिया गया है।
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कोर्ट ने कहा कि आवास खाली न करने वाले कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई भी नहीं की गई, सिर्फ वेतन रोका गया। कोर्ट की सख्ती के बाद आवास खाली हुआ और याची को दिया गया। कोर्ट ने कहा है कि ऐसे लोगों से मुआवजा वसूल किया जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने सुप्रीमकोर्ट के लोक प्रहरी केस में दिए गए निर्देशों के अनुपालन में सरकारी आवासों को लेकर नीति बनाने का आदेश दिया है।
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