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इलाहाबाद हाईकोर्ट : लंबित आपराधिक मुकदमों के आधार पर राशन की दुकान का आवंटन रद्द करना गलत
Sun, 05 Dec 2021 09:50 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 05 Dec 2021 09:50 PM IST
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कोर्ट (प्रतीकात्मक तस्वीर।)
- फोटो : iStock
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि लंबित आपराधिक मुकदमों की वजह से राशन की दुकान का लाइंसेस रद्द नहीं किया जा सकता है। हाईकोर्ट ने कहा कि राशन की दुकान का लाइसेंस रद्द करने का यह कोई आधार नहीं हो सकता है। यह आदेश न्यायमूर्ति नीरज तिवारी की एकल खंडपीठ ने प्रयागराज के मेजा तहसील के निवासी जगदंबा प्रसाद की याचिका पर सुनकर दिया है।
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याची के अधिवक्ता ने तर्क दिया है कि मेजा एसडीएम ने याची के खिलाफ 11 मुकदमें दर्ज होने के आधार पर उसकी राशन की दुकान का आवंटन अक्तूबर 2017 में ही रद्द कर दिया। याची ने इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिस पर कोर्ट ने मेजा एसडीएम के आवंटन रद्द करने के आदेश पर रोक लगा दी।
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तर्क दिया गया कि याची के भले ही आपराधिक मामले दर्ज हुए हैं लेकिन उसने कभी राशन वितरण में गड़बड़ी नहीं की और न ही राशन की कालाबाजारी की। इस तरह की शिकायत उसके खिलाफ नहीं। बावजूद इसके एसडीएम ने उसका पक्ष सुने बिना अकेले आपराधिक मुकदमें के आधार पर उसको आवंटित राशन की दुकान का लाइसेंस रद्द कर दिया।
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याची के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि सरकार के 2002 के आदेश के मुताबिक ऐसे लोगों को राशन की दुकान का आवंटन करने में मनाही है, जिनके खिलाफ पहले से मुकदमें चल रहे हों लेकिन एक बार राशन की दुकान का आवंटन होने के बाद मुकदमें दर्ज होने पर आवंटन को रद्द नहीं किया जा सकता है। इस तर्क के समर्थन में याची के अधिवक्ता ने अनिल कुमार दूबे बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य केस का हवाला भी दिया। कोर्ट ने याची के तर्कों को स्वीकार कर एसडीएम के आदेश को रद्द कर दिया।