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Allahabad high court: आवासीय योजनाओं में धांधली की जांच क्यों न सीबीआई से कराएं
Thu, 07 Jul 2022 12:53 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 07 Jul 2022 12:53 AM IST
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allahabad highcourt
- फोटो : Prayagraj
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की आवासीय योजना में हुई धांधली के मामले में जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई न होने पर नाराजगी जाहिर की है। कोर्ट ने कहा कि उसके आदेश के बावजूद जिम्मेदार अफसरों पर न तो कार्रवाई हुई और न ही जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की गई।
जबकि, आदेश पारित किए चार साल हो गए। कोर्ट ने मामले को सीबीआई को रेफर करने के लिए कहा तो सरकारी अधिवक्ता ने एक और मोहलत देने का आग्रह किया। इस पर कोर्ट ने अंतिम मौका देते हुए मामले की सुनवाई के लिए 14 जुलाई की तिथि निर्धारित की है। यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की खंडपीठ ने राजेंद्र त्यागी की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।
याची की ओर से समीर शर्मा ने पक्ष रखा। कहा कि इस मामले में अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इस पर कोर्ट ने सरकारी अधिवक्ता से जानकारी मांगी तो बताया गया कि कुछ कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई। कहा कि उसने मामले में चार साल पहले जांच कर जिम्मेदार अफसरों केखिलाफ कार्रवाई करने को कहा था लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
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मामले में निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई, जबकि यह घोटाला बाबू स्तर के कर्मचारियों द्वारा नहीं बल्कि अफसरों द्वारा किया गया है। कोर्ट ने मामले में जांच की प्रगति रिपोर्ट मांगी तो उसे भी पेश नहीं किया जा सका। इस पर कोर्ट ने कहा कि क्यों न मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए? इस पर सरकारी अधिवक्ता ने एक और मौका देने का आग्रह कोर्ट से किया। इस पर कोर्ट ने मामले की सुनवाई की तिथि14 जुलाई तय कर दी।
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जबकि, आदेश पारित किए चार साल हो गए। कोर्ट ने मामले को सीबीआई को रेफर करने के लिए कहा तो सरकारी अधिवक्ता ने एक और मोहलत देने का आग्रह किया। इस पर कोर्ट ने अंतिम मौका देते हुए मामले की सुनवाई के लिए 14 जुलाई की तिथि निर्धारित की है। यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की खंडपीठ ने राजेंद्र त्यागी की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।
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याची की ओर से समीर शर्मा ने पक्ष रखा। कहा कि इस मामले में अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इस पर कोर्ट ने सरकारी अधिवक्ता से जानकारी मांगी तो बताया गया कि कुछ कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई। कहा कि उसने मामले में चार साल पहले जांच कर जिम्मेदार अफसरों केखिलाफ कार्रवाई करने को कहा था लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
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मामले में निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई, जबकि यह घोटाला बाबू स्तर के कर्मचारियों द्वारा नहीं बल्कि अफसरों द्वारा किया गया है। कोर्ट ने मामले में जांच की प्रगति रिपोर्ट मांगी तो उसे भी पेश नहीं किया जा सका। इस पर कोर्ट ने कहा कि क्यों न मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए? इस पर सरकारी अधिवक्ता ने एक और मौका देने का आग्रह कोर्ट से किया। इस पर कोर्ट ने मामले की सुनवाई की तिथि14 जुलाई तय कर दी।