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इलाहाबाद हाईकोर्ट : धोखाधड़ी, कपट के आरोपी पूर्व विधायक विजय मिश्र के बेटे विष्णु मिश्र को मिली सशर्त जमानत

Thu, 04 May 2023 10:29 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 04 May 2023 10:29 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बाहुबली पूर्व विधायक विजय मिश्र के पुत्र विष्णु मिश्र की सशर्त जमानत मंजूर कर ली है। कोर्ट ने याची को प्रतिभूति लेकर रिहा करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा प्राथमिकी में सारे आरोप याची के पिता विजय मिश्र पर लगायें गये है।

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Allahabad High Court: Vishnu Mishra, son of former MLA Vijay Mishra, accused of fraud, fraud, gets conditional
विष्णु मिश्र - फोटो : सोशल मीडिया।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बाहुबली पूर्व विधायक विजय मिश्र के पुत्र विष्णु मिश्र की सशर्त जमानत मंजूर कर ली है। कोर्ट ने याची को प्रतिभूति लेकर रिहा करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा प्राथमिकी में सारे आरोप याची के पिता विजय मिश्र पर लगायें गये है। याची पर कोई खास आरोप नहीं है। शिकायतकर्ता की भागीदारी फर्म से याची के खाते में पैसे भेजें गये है। चेक अनादर का केस शिकायतकर्ता के खिलाफ चल रहा है। मुख्य अभियुक्त याची के पिता हैं। याची 24 जुलाई 22 से जेल में बंद हैं। प्राथमिकी 20 साल बाद दर्ज कराई गई है। यह आदेश न्यायमूर्ति समीर जैन ने विष्णु मिश्र की जमानत अर्जी को स्वीकार करते हुए दिया है।

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मामले में पूर्व विधायक विजय मिश्र के भाई ने उनके व पुत्र, पत्नी राम लली मिश्रा के खिलाफ चार अगस्त 20 को गोपीगंज थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है। जिसमें आरोप लगाया गया है कि विजय मिश्र ने 2001 में मेसर्स कृष्ण मोहन तिवारी फर्म पर जबरन कब्जा कर लिया है। मकान में रह रहे हैं। फर्म का पैसा स्वयं, अपने पुत्र व पत्नी के खाते में स्थानांतरित कर रहे हैं। पांच चेक पर शिकायतकर्ता के जबरन हस्ताक्षर ले लिए। वसीयत लिखने का दबाव बना रहे और पूरे परिवार को परेशान कर रहे हैं।

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याची का कहना है कि कोई धोखाधड़ी कपट नहीं किया गया है। झूठी कहानी गढ़ी गई है। राजनीति के कारण केस दर्ज कराया गया है। याची के पिता कई बार विधायक ज्ञानपुर से रहे हैं। मां रामलली भी सोनभद्र मिर्जापुर से विधायक रह चुकी है। याची 1998 से 2006 तक देहरादून में रहा। 2006 से 2012 तक अमेरिका में रहा। 2012 से 16 तक दिल्ली में व्यवसाय कर रहा था।

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याची की मां, अशोक शुक्ला व शिकायतकर्ता की भागीदारी फर्म है। मां व अशोक शुक्ला ने आर्बिट्रेशन के लिए अर्जी दी। जिला जज ने 22 फरवरी 2021 के फैसले में भागीदारी फर्म माना है। शिकायतकर्ता की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति विनीत सरन आर्बीट्रेटर है। फर्म पर कब्जे का आरोप झूठा है।

याची का कहना था कि शिकायतकर्ता खुद फर्म की संपत्ति बेच रहा है। उसने छह करोड़ खाते से निकाल लिए हैं। शिकायतकर्ता ने जो चेक दिया था उनमें से चार के अनादर होने कर केस चल रहा है। प्राथमिकी में मुख्य आरोपी याची के पिता हैं। उस पर कोई आरोप नहीं है। उसके खाते में पैसे फर्म से स्थानांतरित हुए हैं। उसने फर्म से पैसे नहीं निकाले हैं। शिकायतकर्ता पर 10 आपराधिक केसों का इतिहास है। जिस पर कोर्ट ने सशर्त जमानत पर रिहाई का आदेश दिया है।

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