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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Allahabad High Court upset over police encounter shootings in legs, says it is the judiciary's job to punish

Prayagraj: पुलिस मुठभेड़ में पैरों में गोली मारने से इलाहाबाद हाईकोर्ट खफा, कहा- सजा देना न्यायपालिका का काम

Sat, 31 Jan 2026 03:17 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 31 Jan 2026 03:17 AM IST
सार

हाईकोर्ट ने कहा, किसी भी आरोपी को सजा देने का अधिकार केवल न्यायपालिका के पास है, पुलिस के पास नहीं। कोर्ट ने इसे कानून के शासन एवं सांविधानिक मर्यादाओं के खिलाफ बताते हुए राज्य सरकार और पुलिस अधिकारियों को सख्त दिशा-निर्देश जारी किए।

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Allahabad High Court upset over police encounter shootings in legs, says it is the judiciary's job to punish
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस मुठभेड़ों में अभियुक्तों के पैरों में गोली मारने की बढ़ती घटनाओं पर नाराजगी जताई है। हाईकोर्ट ने कहा, किसी भी आरोपी को सजा देने का अधिकार केवल न्यायपालिका के पास है, पुलिस के पास नहीं। कोर्ट ने इसे कानून के शासन एवं सांविधानिक मर्यादाओं के खिलाफ बताते हुए राज्य सरकार और पुलिस अधिकारियों को सख्त दिशा-निर्देश जारी किए। इनकी अनदेखी पर अवमानना की कार्यवाही चेतावनी भी दी। 

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जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल ने राजू उर्फ राजकुमार की जमानत अर्जी पर यह आदेश दिया। साथ ही, राजू को सशर्त जमानत दे दी। सुनवाई के दौरान वकील कुसुम मिश्रा ने दलील दी कि याची को झूठे मामले में फंसाया गया। कथित मुठभेड़ में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया। पीठ ने इसे गंभीरता से लेते हुए अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्णा को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये तलब कर जवाब मांगा था। दोनों अधिकारी शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हाजिर हुए और भरोसा दिलाया कि मुठभेड़ मामले में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करने के लिए सर्कुलर जारी किए गए हैं। इनका पालन न करने पर कार्रवाई की जाएगी। 
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कानून में ऐसे कृत्यों की अनुमति नहीं
कानून की नजरों में ऐसे कृत्यों की अनुमति नहीं दी जा सकती है। भारत लोकतांत्रिक देश है। इसे संविधान के मुताबिक ही चलाना होगा, जिसमें विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका की भूमिका तय है। पुलिस अधिकारियों को हाथ और पैर जैसे अंगों पर भी गैरजरूरी तरीके से गोली मारने की इजाजत नहीं दी सकती। 
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-हाईकोर्ट

किसी पुलिसकर्मी को चोट नहीं आई, संदेह होता है
पीठ ने कहा कि हाल के दिनों में छोटे-छोटे अपराधों, जैसे चोरी या लूट के मामलों में भी पुलिस की ओर से मुठभेड़ दिखाकर आरोपियों के पैरों में गोली मारने की घटनाएं सामने आ रही हैं। मौजूदा मामले में किसी भी पुलिसकर्मी को चोट नहीं आई है। इससे संदेह होता है।

मुठभेड़ में मौत या गंभीर चोट पर तुरंत दर्ज हो एफआईआर 
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पीयूसीएल बनाम महाराष्ट्र राज्य के फैसले का हवाला देते हुए दिशा-निर्देशों में कहा कि मुठभेड़ में मौत या गंभीर चोट की स्थिति में तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए। जांच स्वतंत्र एजेंसी, जैसे सीबीसीआईडी या किसी अन्य थाने की टीम से कराई जाए। अदालत ने कहा...

  • घायल व्यक्ति का बयान मजिस्ट्रेट या मेडिकल अधिकारी के समक्ष दर्ज करना अनिवार्य होगा
  • मुठभेड़ के तुरंत बाद पुलिसकर्मियों को किसी तरह का पुरस्कार या पदोन्नति नहीं दी जाएगी
  • इन दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने पर मुठभेड़ करने वाली टीम व संबंधित जिले के पुलिस प्रमुख (एसपी/एसएसपी/कमिश्नर) भी सीधे तौर पर अदालत की अवमानना के जिम्मेदार होंगे
  • सुनवाई के दौरान अपर मुख्य सचिव (गृह) और डीजीपी ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि इन निर्देशों का सख्ती से पालन कराया जाएगा
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