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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Allahabad High Court Sasy It is not right to pass an order unilaterally without hearing parties

UP: पक्षकार को सुने बिना एकतरफा आदेश पास करना सही नहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पारित आदेश को किया रद्द

Thu, 21 Dec 2023 11:00 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: शाहरुख खान Updated Thu, 21 Dec 2023 11:00 AM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने परिवार न्यायालय द्वारा भरण पोषण के लिए पारित आदेश को रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि पक्षकार को सुने बिना एकतरफा आदेश पास करना सही नहीं है। कोर्ट ने सुनवाई पूरी करते हुए पत्नी को छह हजार और नाबालिग को तीन हजार रुपये प्रतिमाह देने का आदेश पारित किया।

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Allahabad High Court Sasy It is not right to pass an order unilaterally without hearing parties
Allahabad High Court Result - फोटो : Social Media

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 125 के तहत परिवार न्यायालय दूसरे पक्षकार को सुने बिना एकतरफा आदेश पारित नहीं कर सकता है। कोर्ट ने याची के खिलाफ परिवार न्यायालय आगरा द्वारा पारित आदेश और भरण-पोषण के बकाए की रकम को वसूली करने के वारंट को रद्द कर दिया। 
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परिवार न्यायालय आगरा को निर्देश दिया कि वह मामले की फिर से सुनवाई करते हुए छह महीने में भरण-पोषण की अर्जी को नए सिरे से निस्तारित करें। हालांकि, कोर्ट ने याची को उससे अलग रह रही उसकी पत्नी और नाबालिग बेटे के भरण-पोषण के लिए पांच हजार रुपये प्रतिमाह और एक लाख रुपये बकाए की राशि का भुगतान करने का आदेश दिया। 
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यह आदेश न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा की पीठ ने ललित सिंह की पुनर्विचार याचिका पर को निस्तारित करते हुए दिया है। याची की पत्नी उत्पीड़न के आरोप में अलग रहने लगी और उसने आगरा परिवार न्यायालय के समक्ष भरण-पोषण की अर्जी दाखिल की। 
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कोर्ट ने सुनवाई पूरी करते हुए पत्नी को छह हजार और नाबालिग को तीन हजार रुपये प्रतिमाह देने का आदेश पारित किया। इसके साथ ही दो लाख, 52 हजार रुपये भरण-पोषण की बकाया राशि के भुगतान का आदेश दिया। याची ने जब राशि नहीं दी तो पत्नी ने आदेश का अनुपालन कराने के लिए अर्जी दाखिल की, इस पर परिवार न्यायालय ने वसूली वारंट जारी कर दिया। 

याची ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की। याची अधिवक्ता अभिनव गौड़ की ओर से दलील दी गई कि परिवार न्यायालय ने एकतरफा आदेश पारित किया है। उसे वारंट जारी होने के बाद इसकी जानकारी हो सकी। इस पर कोर्ट ने यह आदेश पारित किया। 
 

अपर पुलिस महानिदेशक को ग्रेच्युटी भुगतान में देरी पर ब्याज का भुगतान करने का निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपर महानिदेशक पुलिस उत्तर प्रदेश मुख्यालय लखनऊ को निर्देश दिया है कि ग्रेच्युटी भुगतान में देरी के कारण बकाया देयों का भुगतान 30 दिन में कर अनुपालन हलफनामा दाखिल करें अन्यथा कोर्ट इसे गंभीरता से लेगी। याचिका की अगली सुनवाई की तिथि 18 जनवरी नियत की गई है।

 

यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार ने कमाल अहमद ख़ान की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है। विनोद कुमार पुलिस अधीक्षक मैनपुरी ने अनुपालन हलफनामा दाखिल कर कहा कि याची का पूरा भुगतान कर दिया गया है। ग्रेच्युटी भुगतान में देरी पर ब्याज के भुगतान का प्रकरण अपर महानिदेशक पुलिस को प्रेषित किया गया है। याची 21 अक्तूबर 20 को सेवानिवृत्त हो चुका है। उसके खिलाफ आपराधिक केस के कारण भुगतान रुका रहा। जबकि, उसे आपराधिक केस में बरी कर दिया गया है।

 

याची का कहना है कि केवल आपराधिक केस दर्ज होने पर किसी को सजा मिले बगैर दंडित नहीं किया जा सकता। इसलिए याची समस्त सेवानिवृत्ति परिलाभों का भुगतान पाने का अधिकार है। कोर्ट ने कहा ग्रेच्युटी भुगतान में तीन साल की देरी पर ब्याज की मांग उचित है। कोर्ट ने अपर महानिदेशक पुलिस को 18 जनवरी तक का समय दिया है।
 
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