Allahabad High Court : खातों से रकम उड़ाए जाने पर बैंक भी जिम्मेदार, न्यायमूर्ति के खाते से पैसा उड़ाने वालों की जमानत अर्जी खारिज
आवेदकों के जमानत आवेदन पत्र बलहीन है। इसलिए ये निरस्त होने के योग्य हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव की खंडपीठ ने मामले से जुड़े चार जमानती आवेदन पत्रों को सुनकर दिया है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाईकोर्ट की पूर्व जज के खाते से पांच लाख रुपये उड़ाने वालों की जमानत अर्जी खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि यदि साइबर अपराधियों द्वारा खातों से पैसा निकाला जा रहा है तो इसकी जिम्मेदारी बैंक को लेनी पड़ेगी। यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव ने नीरज मंडल उर्फ राकेश सहित चार अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया है।
मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की पूर्व न्यायमूर्ति की ओर से आठ दिसंबर 2020 को कैंट थाने में पांच लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी की एफआईआर दर्ज कराई गई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि चार दिसंबर 2020 को उनके मोबाइल नंबर पर फोन करने वाले ने अपने आप को एसएन मिश्रा बताकर पासबुक, आधार एवं पैन नंबर की जानकारी मांगी। इस प्रक्रिया में अभियुक्तों ने वादिनी केएसबीआई के खाते से ऑनलाइन लगभग पांच लाख रुपये निकाल लिए।
पुलिस विवेचना के दौरान झारखंड के देवधर जिले के राजू रंजन, नीरज कुमार मंडल, जामताड़ा जिले के तपन कुमार मंडल के नाम सामने आए। बाद में शुभो शाह उर्फ सभाजीत और तौसीफ जमा केनाम भी सामने आए। पुलिस ने अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। अभियुक्तों के अधिवक्ताओं की ओर से तर्क दिया गया कि वे निर्दोष हैं। एफआईआर में उनके नाम नहीं है।
उनके पास से कोई बरामदगी नहीं हुई है। उन्हें झूठा फंसाया गया है। जवाब में राज्य के अधिवक्ता की ओर से इसका विरोध किया गया। कहा गया कि याचियों की ओर से अपराध कारित किया गया है। यह साइबर धोखाधड़ी है। कोर्ट ने मामले में केंद्र सरकार, एसबीआई और भारतीय दूरसंचार के अधिवक्ता का भी पक्ष जाना। इसके बाद चारों अभियुक्तों की जमानत अर्जी नामंजूर कर दी।
ग्राहकों का पैसा हर हाल में सुरक्षित रखा जाए
मामले में हाईकोर्ट ने बैंकों की भूमिका को भी रेखांकित किया है। कहा कि बैंक खाताधारकों का पैसा सुरक्षित रहना चाहिए। केवल इसलिए नहीं कि ग्राहक पैसा बैंक में जमा करता है कि आवश्यकता पड़ने पर वह उसे निकाल सकता है, वह इसलिए भी, ग्राहकों द्वारा बैंकों में जमा पैसा एक नंबर का होता है और जिससे देश की आर्थिक स्थिति सुधरती है। वहीं दूसरी ओर देश में ऐसे लोग भी हैं, जो करोड़ों रुपये बैंक में जमा न करके घरों में तहखानों में छिपाकर रखते हैं।
इन लोगों से ना तो बैंक को लाभ मिलता है ना ही देश की आर्थिक स्थिति को। इसलिए बैंक का वह ग्राहक जो देश के प्रति ज्यादा ईमानदार है, उसका पैसा बैंक को हर हाल में सुरक्षित रखना चाहिए। यदि किसी भी प्रकार से साइबर अपराधियों द्वारा उसके बैंक खाते में डाका डालकर पैसा निकाला जाता है तो इसके लिए बैंक को ही इसकी जिम्मेदारी लेनी होगी। कोर्ट ने कहा कि अभियुक्तों ने इस न्यायालय की एक न्यायमूर्ति के बैंक खाते से साइबर ठगी के माध्यम से पैसे निकाले हैं और उनके अधिवक्ताओं ने यह स्वीकार किया है कि उक्त पैसे अभियुक्तों ने वादिनी को वापस कर दिए।