फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   allahabad high court news hindi: SCST Act will not be applicable in crime without information: High Court

बिना जानकारी किए गए अपराध में नहीं लागू होगा एससीएसटी एक्ट: हाईकोर्ट

Tue, 09 Jun 2020 07:28 PM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 09 Jun 2020 07:28 PM IST
विज्ञापन
allahabad high court news hindi: SCST Act will not be applicable in crime without information: High Court
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि एससीएसटी एक्ट के तहत मुकदमा चलाने के लिए यह आवश्यक है कि अनुसूचित जाति के सदस्य के साथ इसलिए अपराध किया गया हो कि वह अनुसूचित जाति का है। यदि अपराध करने वाले को इस बात की जानकारी नहीं है कि वह जिसके साथ अपराध कर रहा है वह अनुसूचित जाति का है तो उस स्थिति में अपराधी पर एससीएसटी एक्ट के प्रावधान लागू नहीं होंगे।

विज्ञापन


कोर्ट ने अनुसूचित जाति की बच्ची से हुए दुष्कर्म के मामले में आरोपी को एससीएसटी एक्ट में मिली सजा से इस आधार पर बरी कर दिया, साथ ही अभियुक्त को सुनाई गई उम्रकैद की सजा को घटाकर दस वर्ष कर दिया है।

विज्ञापन

allahabad high court news hindi: SCST Act will not be applicable in crime without information: High Court
Allahabad High Court

अलीगढ़ के शमशाद की आपराधिक अपील पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति पंकज नकवी और न्यायमूर्ति एसएस शमशेरी की पीठ ने यह आदेश दिया। मामले के तथ्यों के अनुसार अभियुक्त शमशाद के खिलाफ नौ वर्षीय पीड़िता की मां ने 15 अप्रैल 2009 में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि अभियुक्त पीड़िता को बहला फुसलाकर एकांत स्थान पर ले गया और उससे दुष्कर्म किया।

पुलिस ने दुष्कर्म के साथ ही एससीएसटी एक्ट की धाराओं में भी मुकदमा दर्ज कर चार्जशीट पेश की। सेशन कोर्ट ने पीड़िता के बयान और अन्य साक्ष्यों को देखते हुए शमशाद को उम्रकैद तथा 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। 

allahabad high court news hindi: SCST Act will not be applicable in crime without information: High Court
इलाहाबाद हाईकोर्ट
सजा के खिलाफ अपील पर बहस के दौरान यह कहा गया कि अभियुक्त को इस बात की जानकारी नहीं थी कि पीड़िता एससी है। उसने इसलिए अपराध नहीं किया कि पीड़िता एससी है, इसलिए यहां एससी-एसटी एक्ट के प्रावधान लागू नहीं होंगे।

कोर्ट ने कहा कि अभियोजन यह प्रमाणित करने में असफल रहा है कि अभियुक्त ने पीड़िता के साथ इसलिए अपराध किया कि वह एससी है। अभियुक्त पीड़िता को पहले से नहीं जानता था। इसलिए यहां एससीएसटी एक्ट के प्रावधान लागू नहीं होंगे। सजा पर बहस के दौरान बचाव पक्ष ने सुप्रीमकोर्ट के कई फैसलों की नजीरें पेश कर सजा कम करने की मांग की।

कोर्ट ने कहा कि घटना के समय अभियुक्त लगभग 20 साल का था। वह 12 वर्ष के करीब जेल में बिता चुका है। इस मामले में दस वर्ष की सजा न्याय की मंशा को पूरी करती है। कोर्ट ने जेल में बिताई गई अवधि को पर्याप्त सजा मानते हुए अभियुक्त को रिहा करने का आदेश दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed