{"_id":"61fad5765c8ddd42e3155065","slug":"allahabad-high-court-lml-limited-got-a-setback-no-relief-from-the-high-court","type":"story","status":"publish","title_hn":"Allahabad High Court : एलएमएल लिमिटेड को लगा झटका, हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Allahabad High Court : एलएमएल लिमिटेड को लगा झटका, हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत
Thu, 03 Feb 2022 01:34 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 03 Feb 2022 01:34 AM IST
सार
याची एलएमएल लिमिटेड ने औद्योगिक न्यायाधिकरण के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। औद्योगिक न्यायाधिकरण ने अपने आदेश में छंटनी किए गए कर्मचारियों को बकाए वेतन, भत्ते और अन्य लाभों को दिए जाने का आदेश दिया था।
विज्ञापन
एलएमएल कानपुर
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कानपुर की एलएमएल लिमिटेड कंपनी को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। हाईकोर्ट ने कहा है कि कंपनी को छह हजार से अधिक कर्मचारियों को वेतन, भत्ते सहित अन्य लाभों का भुगतान करना होगा। कोर्ट ने कहा है कि कंपनी ने छंटनी के दौरान अगर कोई राशि मुआवजे के तौर पर कर्मचारियों को दी है तो उस राशि को समायोजित कर लिया जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी ने मेसर्स एलएमएल लिमिटेड की याचिका पर दिया है।
विज्ञापन
याची एलएमएल लिमिटेड ने औद्योगिक न्यायाधिकरण के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। औद्योगिक न्यायाधिकरण ने अपने आदेश में छंटनी किए गए कर्मचारियों को बकाए वेतन, भत्ते और अन्य लाभों को दिए जाने का आदेश दिया था। कोर्ट ने मामले में सुनवाई के दौरान पाया कि कंपनी ने नियमों के विपरीत कर्मचारियों की छंटनी की और उन्हें मामूली तौर पर मुआवजा प्रदान किया। मामले में याची पक्ष की ओर से नवीन सिन्हा और विपक्षी पक्ष की ओर से बुसरा मरियम ने अपना अपना पक्ष रखा।
विज्ञापन
कोर्ट ने कहा कि कंपनी परिसमापन की स्थिति में है। परिसमापक के पास कुल 6337 कामगारों के दावे को स्वीकार किया गया है। कोर्ट ने औद्योगिक न्यायाधिकरण द्वारा छंटनी को अनुचित और अवैध ठहराए जाने के आदेश को सही पाया। कहा कि 15 अप्रैल 2007 के से तालाबंदी के बाद कामगार नियोजित नहीं रहे और उन्हें हटा दिया गया था। वह सभी मजदूरी, भत्ते और अन्य लाभों के अधिकारी हैं।
विज्ञापन