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Allahabad High Court : कानपुर विश्वविद्यालय में बॉयोमेट्रिक्स उपस्थिति दर्ज कराने को चुनौती
Fri, 14 Oct 2022 08:35 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 14 Oct 2022 08:35 PM IST
सार
याची का कहना है कि बायोमेट्रिक्स का उपयोग भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत गोपनीयता के अधिकार का उल्लंघन होगा और यह उसके व्यक्तिगत डेटा के प्रसारण के लिए भी उजागर होगा।
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कानपुर यूनिवर्सिटी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर (कानपुर विश्वविद्यालय) में शिक्षण और गैर शिक्षण कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए चेहरे की पहचान प्रौद्योगिकी (बॉयोमेट्रिक्स) के उपयोग को चुनौती देने वाली याचिका पर यूपी सरकार और कानपुर विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाब मांगा है। मामले में कानपुर विश्वविद्यालय प्रशासन ने विश्वविद्यालय में शिक्षण और गैरशिक्षण कर्मचारियों के बॉयोमेट्रिक्स का उपयोग उनकी उपस्थिति दर्ज करने के लिए किया जाएगा और उसी आधार पर वेतन का भुगतान किया जाएगा।
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याची का कहना है कि बायोमेट्रिक्स का उपयोग भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत गोपनीयता के अधिकार का उल्लंघन होगा और यह उसके व्यक्तिगत डेटा के प्रसारण के लिए भी उजागर होगा। अधिवक्ता की ओर से तर्क दिया गया कि निजता के अधिकार को प्रभावित करने वाला कानून होना चाहिए। ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि राज्य का उद्देश्य भी पूरा हो और निजता का हनन भी न हो। उन्होंने इस मामले में केएस पुट्टस्वामी केस का हवाला भी दिया।
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