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हाईकोर्ट इलाहाबाद : देरी माफी की अर्जी लंबित होने पर भी अपीलीय अदालत दे सकती है अंतरिम राहत
Wed, 26 Aug 2026 04:09 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 26 Aug 2026 04:09 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अपील दाखिल करने में हुई देरी को माफ करने की अर्जी लंबित होने मात्र से अपीलीय अदालत की अंतरिम संरक्षण देने की शक्ति खत्म नहीं हो जाती।
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अदालत का आदेश
- फोटो : istock
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अपील दाखिल करने में हुई देरी को माफ करने की अर्जी लंबित होने मात्र से अपीलीय अदालत की अंतरिम संरक्षण देने की शक्ति खत्म नहीं हो जाती। यदि परिस्थितियां ऐसी हों कि अंतरिम राहत नहीं मिलने पर प्रस्तावित अपील ही निष्फल हो सकती है तो अदालत विषय-वस्तु को सुरक्षित रखने के लिए सीमित अवधि का अंतरिम आदेश पारित कर सकती है।
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यह टिप्पणी न्यायमूर्ति डॉ.योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव की एकल पीठ ने कानपुर नगर निवासी नीलाभ गुप्ता की याचिका पर की। कोर्ट ने कानपुर नगर के अपर जिला न्यायाधीश के 31 मार्च को पारित अंतरिम आदेश में हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने अपीलीय अदालत को देरी माफी की अर्जी पर जल्द निर्णय लेने और उसके बाद 60 दिन में अपील निस्तारित करने का आदेश दिया है।
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किरायेदारी विवाद से जुड़ा है मामला
मकान मालिक याची ने उत्तर प्रदेश शहरी परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम के तहत किरायेदारों के खिलाफ किरायेदारी के विवाद को लेकर मुकदमा दाखिल किया था। किराया न्यायाधिकरण ने दो सितंबर 2025 को मकान मालिक के पक्ष में आदेश पारित कर किरायेदारों को परिसर से बेदखल करने और बकाया दिलाने का आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ किरायेदारों ने रेंट अपील दाखिल की। अपील के साथ देरी माफी की अर्जी और अंतरिम संरक्षण की मांग भी की गई। अपर जिला न्यायाधीश ने 31 मार्च को किराया न्यायाधिकरण के आदेश के अमल पर रोक लगा दी। इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटया।
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याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि अपील दाखिल करने में हुई देरी माफी की अर्जी लंबित रहते हुए अपीलीय अदालत को अंतरिम संरक्षण नहीं देना चाहिए था। मकान मालिक ने मध्यस्थता केंद्र की 24 फरवरी 2026 की रिपोर्ट का हवाला दिया, जो पहले ही खत्म हो चुकी है। हलांकि, कोर्ट ने इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया। स्पष्ट किया कि देरी माफी की अर्जी लंबित होना अपने आप में अपीलीय अदालत को अंतरिम संरक्षण देने से रोकता नहीं है। हालांकि, इसका मतलब यह भी नहीं है कि अदालत देरी माफी के सवाल को तय किए बिना अपील के गुण-दोष पर सुनवाई शुरू कर सकती है।
प्रस्तावित अपील के मुद्दे को सुरक्षित रखने के लिए दिया गया अंतरिम आदेश और अपील को गुण-दोष के आधार पर सुनना दो अलग-अलग बातें हैं। अंतरिम संरक्षण का उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि देरी माफी के सवाल पर फैसला होने तक ऐसी स्थिति न बन जाए, जिससे अपील ही निष्फल हो जाए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा मामले में अपीलीय अदालत ने अपील के गुण-दोष पर कोई फैसला नहीं किया था।
उसने केवल इसलिए अंतरिम संरक्षण दिया। क्योंकि, जब किराया न्यायाधिकरण के आदेश के अनुपालन की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी थी। संरक्षण नहीं मिलने पर अपील निष्फल हो सकती थी। मध्यस्थता रिपोर्ट पर कोर्ट ने पाया कि वह अपीलीय अदालत में समय पेश नहीं की गई थी। लिहाजा, इसके आधार पर अपीलीय अदालत के अंतरिम आदेश को गलत नहीं ठहराया जा सकता। हालांकि, ऐसी रिपोर्ट के आधार पर संबंधित पक्ष अपीलीय अदालत के समक्ष उचित राहत मांग सकता है।