{"_id":"6a8cd17c536f30546a097534","slug":"allahabad-hc-verdict-5-provisions-of-up-rent-act-struck-down-presidential-assent-not-obtained-1972-act-to-appl-2026-08-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"इलाहाबाद HC का फैसला: UP किराया कानून के 5 प्रावधान रद्द, नहीं ली राष्ट्रपति की मंजूरी, 1972 का कानून लागू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इलाहाबाद HC का फैसला: UP किराया कानून के 5 प्रावधान रद्द, नहीं ली राष्ट्रपति की मंजूरी, 1972 का कानून लागू
Tue, 25 Aug 2026 04:56 AM IST
Digvijay Singh
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
Published by: Digvijay Singh
Updated Tue, 25 Aug 2026 04:56 AM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में उत्तर प्रदेश नगरीय परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम-2021 की 5 महत्वपूर्ण धाराओं 8, 9, 10, 38 और 42 को असांविधानिक करार देते हुए निरस्त कर दिया।
विज्ञापन
इलाहाबाद हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में उत्तर प्रदेश नगरीय परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम-2021 की 5 महत्वपूर्ण धाराओं 8, 9, 10, 38 और 42 को असांविधानिक करार देते हुए निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा, कानून के कई प्रावधान केंद्रीय कानूनों- संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 और प्रांतीय लघु वाद न्यायालय अधिनियम, 1887 के विपरीत हैं। ऐसे मामलों में राष्ट्रपति की पूर्व सहमति जरूरी थी, जो नहीं ली गई। इसी आधार पर जस्टिस सौमित्र दयाल सिंह और जस्टिस स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने कानून की पांच महत्वपूर्ण धाराओं को रद्द कर दिया। कोर्ट ने इंद्र भूषण साहनी एवं अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया।
विज्ञापन
लोगों पर क्या होगा असर
धारा 8 के तहत मकान मालिक व किरायेदार के बीच किराया तय होने का प्रावधान था। वहीं, धारा 9 किरायेदारी समझौते की शर्तों के आधार पर किराया बढ़ाने या संशोधित करने का प्रावधान करती थी। इसके तहत आवासीय संपत्ति के लिए सालाना 5% और गैर-आवासीय (व्यापारिक) संपत्ति के लिए 7% तक किराया बढ़ाने के नियम तय थे।
विज्ञापन
1972 का कानून लागू
कोर्ट ने कहा कि 2021 के कानून के प्रमुख प्रावधान रद्द होने के बाद उत्तर प्रदेश शहरी भवन (किराये पर देने, किराया और बेदखली का विनियमन) अधिनियम, 1972 स्वतः प्रभावी हो जाएगा। किराया और बेदखली अधिकारों का निर्धारण पुराने कानून व केंद्रीय कानूनों के तहत होगा।
विज्ञापन