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दिल्ली जाकर भी जावेद अली से नहीं छूटा इलाहाबाद, प्रलेस सदस्यों ने जताया दुख, कहा-चला गया हरदिल अजीज शख्स

Thu, 02 Sep 2021 12:33 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 02 Sep 2021 12:33 AM IST
सार

  • सही मायने में इंकलाबी जावेद के मिजाज में था अंधेरगर्दी के खिलाफ लड़ना

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Allahabad did not leave Javed Ali even after going to Delhi, Prales members expressed grief, said - Hardil Aziz man has gone
अली जावेद (फाइल फोटो) - फोटो : प्रयागराज

विस्तार

उर्दू के मशहूर आलोचक और प्रगतिशील लेखक संघ के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष डा.अली जावेद नहीं रहे। नई दिल्ली के एक अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी सांसें थम गईं। दिल्ली के जामिया में बुधवार दोपहर उन्हें सुपुर्दे खाक किया गया। उनका जाना प्रयागराज की अदबी दुनिया को हतप्रभ और आहत कर गया। हरदिल अजीज शख्स अली जावेद अंतर्राष्ट्रीय स्तर के विद्वान तथा कुशल वक्ता थे। उर्दू के साथ ही हिंदी और अंग्रेजी साहित्य में भी उनका गहन अध्ययन था। अंधेरगर्दी के खिलाफ लड़ना उनका मिजाज़ था। वह सही मायने में इंकलाबी थे।

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मूलत: करारी के रहने वाले अली जावेद इलाहाबाद विश्वविद्यालय और जेएनयू से पढ़ाई के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग में शिक्षक नियुक्त हुए। हालांकि इलाहाबाद उनसे कभी नहीं छूटा, वह हर बुलावे पर यहां आए। उनकी किताबों में ‘तारीख़-ए अदब-ए उर्दू’, ‘क्लासिकीयत और रूमानवीयत’, ‘जाफ़र जटल्ली की एहतेजाजी शायरी’ जैसी किताबें मशहूर रहीं। इससे पहले वह प्रलेस के महासचिव और वर्ष 2012 से 2016 तक अफ्रीकन एंड एशियन राइटर्स यूनियन के भी अध्यक्ष रहे।
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प्रलेस की शोक सभा आज
प्रगतिशील लेखक संघ की ऑनलाइन राष्ट्रीय शोक सभा दो सितंबर को शाम 6 बजे होगी जिसमें उनके देश और विदेश के साथी, सहयोगी और परिवार के लोग शामिल रहेंगे।

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प्रलेस सदस्यों ने जताया दुख, कहा-चला गया हरदिल अजीज शख्स

बोले- प्रगतिशील आंदोलन के लिए बड़ा नुकसान है डॉ.जावेद का जाना

प्रयागराज। प्रगतिशील लेखक संघ के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष डा.अली जावेद के जाने पर सदस्यों ने दुख जताते हुए कहा, उनका जाना प्रगतिशील आंदोलन के लिए बड़ा नुकसान है प्रलेस के प्रदेश महासचिव संजय श्रीवास्तव ने कहा, उम्मीद थी कि वह लौट आएंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वह हरदिल अज़ीज़ शख्स तो थे ही, उच्च कोटि के विद्वान भी थे।


प्रलेस प्रयागराज की संयोजक संध्या नवोदिता ने कहा, डा.जावेद के साहित्यिक व्यक्तित्व में एक ख़ास तरह का एक्टिविज़्म था। सही मायनों में इंकलाबी डॉ.जावेद गलत के खिलाफ लड़ते थे। उर्दू कथाकार असरार गांधी ने कहा, वह करारी से दिल्ली जाकर वहीं के हो गए लेकिन उनसे इलाहाबाद कभी नहीं छूटा। उनकी ढेर सारी स्मृतियां हमारे बीच होंगी।


शायर अशरफ अली बेग ने कहा, उनका जाना प्रगतिशील आंदोलन के लिए बहुत बड़ा नुक़सान है, जिसकी भरपाई नहीं हो सकेगी। प्रलेस सदस्य प्रकर्ष मालवीय ने कहा, दुख की इस घड़ी में हम सबकी संवेदना उनके परिवार के साथ है।

हिन्दी-उर्दू जगत की अपूरणीय क्षति

सेंटर ऑफ़ इंडियन ट्रेड यूनियन्स ने प्रो.अली जावेद के निधन पर गहरा दु:ख व्यक्त करते हुए श्रमिक बिरादरी की ओर से भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। सीटू के हरिश्चन्द्र द्विवेदी ने उनके जाने को जनवादी विचारों की गहरी क्षति बताया। सीटू के इलाहाबाद के संयोजक अविनाश कुमार मिश्र ने कहा, साहित्य जगत ने अदब की वास्तविक समझ वाला साहित्यकार खो दिया। वह साहित्यकारों की एकजुटता पर जोर देते थे। साथ ही युवा साहित्यकारों को आगे बढ़ाने में हमेशा तत्पर रहते थे. अखिल विकल्प, विकास स्वरुप, सूर्यप्रकाश आदि ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की।

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