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तीन लाख रुपये से हुई थी इलाहाबाद बैंक की शुरुआत

Sun, 01 Sep 2019 12:08 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 01 Sep 2019 12:08 AM IST
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Allahabad Bank was started with three lakh rupees
allahabad bank - फोटो : प्रयागराज
इतिहास बनने जा रहे 154 वर्ष पुराने इलाहाबाद बैंक का वर्तमान में 3,77,887 करोड़ रुपये का कारोबार है लेकिन, इसकी शुरुआत मात्र तीन लाख रुपये से हुई थी। बैंक के कार्य क्षेत्र में भी विस्तार हुआ है लेकिन, प्रणाली में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं हुआ है।
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बैंक की ओर पहला नोटिफिकेशन 24 अप्रैल 1865 को प्रबंधक रॉबर्ट जोसेफ कैरबेरी ने जारी किया था। नोटिफिकेशन के अनुसार बैंकिंग ऑवर 10 से तीन बजे निर्धारित किया गया था। उन दिनों भी सावधि जमा, करेंट एकाउंट खोले जा सकते थे। सावधि जमा की ब्याज दर छह फीसदी थी। सावधि जमा अलग-अलग समय के लिए हो सकता था।
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तीन महीने के लिए जमा पर चार तथा 15 दिन के जमा पर तीन फीसदी ब्याज निर्धारित था। वहीं करेंट एकाउंट पर कोई ब्याज नहीं मिलता था। खास यह कि उन दिनों जीवन बीमा भी होता था। उसका कोई शुल्क भी नहीं लिया जाता था। वहीं किसी संपत्ति की जमानत पर बैंक से लोन लिया जा सकता था। बैंक में कोई भी फैसला शेयर होल्डर्स लेते थे। बैंक में निवेश के आधार पर उनके वोट भी निर्धारित थे। सिविल लाइंस शाखा के हॉल में प्रथम आदेश के अलावा बैंक के कई अन्य ऐतिहासिक दस्तावेजों की फोटो प्रति रखी गई हैं लेकिन, अब जल्द ही ये इंडियन बैंक के दस्तावेज होेंगे।
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Allahabad Bank was started with three lakh rupees
allahabad bank - फोटो : प्रयागराज
आनंद भवन के लिए मोतीलाल नेहरू ने लिया था लोन
प्रयागराज। इलाहाबाद बैंक की सिविल लाइंस शाखा में मोतीलाल नेहरू जैसी महान विभूतियों का खाता था। मोतीलाल नेहरू ने आनंद भवन खरीदने के लिए इसी शाखा से लोन भी लिया था। हालांकि, उन्होंने कितना लोन लिया था, इसकी स्पष्ट जानकारी अफसरों को नहीं है। बैंक में कमला नेहरू और आरके वांचू के संयुक्त नाम से बांड भी था। शाखा के सिक्योरिटी रूम में भी कई ऐतिहासिक दस्तावेज हैं।

उसमें राजा-महाराजाओं के आदेश की प्रतियां, हुंडी आदि भी शामिल हैं। बैंक अफसरों के अनुसार इनके अध्ययन से इतिहास की कई घटनाओं पर से पर्दा हट सकता है। बैंक से रिटायर उमाशंकर यादव के पिता शीतल दीन यादव तथा भाई भी यहीं कार्यरत थे। उमाशंकर ने बताया कि वह, उनके पिता और भाई अब भी बैंक से पेंशन पा रहे हैं। उन्होंने बैंक के विलय को दुखद बताया। शीतल दीन बताते हैं, उन्होंने 1946 में बैंक में नौकरी शुरू की थी। उनके अनुसार सिविल लाइंस शाखा में कई महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक दस्तावेज हैं। उस समय इलाहाबाद और एसबीआई (तब इंपीरियल बैंक) दो ही बैंक थे। उन दिनों सभी राजा-महाराजों के खाते इन्हीं बैंकों में थे। उमाशंकर ने बताया कि शाखा में काउंटर भी पीतल के थे लेकिन, सौंदर्यीकरण के दौरान उन्हें हटा दिया गया।

Allahabad Bank was started with three lakh rupees
allahabad bank - फोटो : प्रयागराज
बैंक को बचाने के लिए मुख्यमंत्री को लिखेंगे पत्र
इलाहाबाद बैंक को बचाने के लिए कर्मचारी लामबंद होने लगे हैं। उनकी ओर से मुख्यमंत्री तथा अन्य नेताओं को पत्र लिखने का निर्णय लिया गया है। बैंक कर्मचारियों का कहना है कि राज्य के नाम पर स्थापित कई छोटे बैंकों का विलय नहीं किया गया है। इसके विपरीत बड़े बैंकों में शामिल इलाहाबाद बैंक का विलय कर दिया गया। उनका यह भी कहना है कि देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में किसी भी बैंक का मुख्यालय नहीं है। कर्मचारी नेता मदनजी उपाध्याय, बीबी सिंह आदि का कहना है कि इलाहाबाद बैंक का विलय रोकने और प्रदेश में ही इसका मुख्यालय स्थापित करने की मुख्यमंत्री से मांग की जाएगी। इसके लिए मुख्यमंत्री से मिलने के लिए समय भी मांगा जाएगा।

Allahabad Bank was started with three lakh rupees
allahabad bank - फोटो : प्रयागराज
विलय के विरोध में बैंक कर्मियों का प्रदर्शन
प्रयागराज। विलय के विरोध में बैंक कर्मी तेज आंदोलन की तैयारी में हैं। इसकी शुरुआत शनिवार को धरना-प्रदर्शन से हुई। युनाइटेड फोरम के आह्वान पर कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर काम भी किया।

युनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के आह़्वान पर कर्मचारियों का शाम को संगम प्लेस स्थित पंजाब नेशनल बैंक की मुख्य शाखा के सामने जमावड़ा हुआ। उन्होंने सरकार की नीतियों को कर्मचारी और मजदूर विरोधी बताया। बैंकों के विलय के विरोध में उन्होंने बड़े आंदोलन की घोषणा की। यूनियन के संयोजक शशिकांत श्रीवास्तव ने कहा कि आंदोलन की जल्द घोषणा की जाएगी। प्रदर्शन करने वालों में जिलाध्यक्ष मदनजी उपाध्याय, कल्याण सेन, एसपी दीक्षित, राजेश तिवारी, सुशील दुबे, एसबी राय, अशोक श्रीवास्तव, कृष्णा झा, डॉ.मधुरेश सिंह, दिनेश कुमार आदि शामिल रहे।
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