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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Akhara Parishad News: Strict on the number of thirteen Akharas, the rest 'Kinnar' should bathe with Juna

दोनों पक्षों के पीछे हटने से अखाड़े का दंगल थमा, नरेंद्र गिरी बोले- नहीं लिया था किसी अखाड़े का नाम

Mon, 04 Jan 2021 11:03 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 04 Jan 2021 11:03 PM IST
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Akhara Parishad News: Strict on the number of thirteen Akharas, the rest 'Kinnar' should bathe with Juna
prayagraj news : अखाड़ा परिषद अध्यक्ष नरेंद्र गिरी, महामंत्री हरि गिरी और लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी। - फोटो : prayagraj

हरिद्वार कुंभ के पहले अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की मठ बाघंबरी गद्दी में हुई बैठक में नए अखाड़ों की मान्यता को लेकर उठे सवाल से संत समाज में आया उबाल संतों के ही संवाद के बाद थम गया है। अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के बयान के बाद महामंत्री श्रीमहंत हरिगिरि ने पद से अपने त्यागपत्र को औचित्यहीन कहा है। बता दें, किन्नर, परी और अखिल विश्व अखाड़ा को ‘फर्जी’ करार दिए जाने के बाद किन्नर अखाड़े के पक्ष में खड़े होते हुए अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरिगिरि ने महामंत्री पद छोड़ने की धमकी दे डाली थी।

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Akhara Parishad News: Strict on the number of thirteen Akharas, the rest 'Kinnar' should bathe with Juna
prayagraj news : अखाड़ा परिषद की बैठक। (फाइल फोटो)। - फोटो : prayagraj
‘अमर उजाला’ से बातचीत में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने स्पष्ट किया कि उक्त बैठक में किसी अखाड़े का नाम लिया ही नहीं गया था, बल्कि विभिन्न अखाड़ों के प्रतिनिधियों की ओर से फर्जी अखाड़ों का मुद्दा उठाए जाने के बाद आम सहमति से यह प्रस्ताव पारित हुआ था कि किसी नई संस्था को अखाड़े के रूप में मान्यता न दी जाए। साथ ही संबंधित सोसाइटी रजिस्ट्रार को इस आशय का पत्र भेजकर ऐसा न करने का सुझाव दिया गया था। श्री महंत हरिगिरि जी बैठक में उपस्थित नहीं थे, ऐसे में उन्हें सही सूचना नहीं मिल पाई जिससे उन्होंने ऐसा बयान दिया।
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Akhara Parishad News: Strict on the number of thirteen Akharas, the rest 'Kinnar' should bathe with Juna
prayagraj news : अखाड़ा परिषद की बैठक। (फाइल फोटो)। - फोटो : prayagraj

परिषद का स्पष्ट मानना है कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद से सिर्फ तेरह अखाड़े ही जुड़े हैं और इस संख्या में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा। अखाड़ों की संख्या तेरह है और तेरह ही रहेगी। लेकिन, परी अखाड़ा और अखिल विश्व अखाड़ा को अखाड़े के रूप में मान्यता नहीं दी जाएगी, उन पर पाबंदी जारी रहेगी। वैसे, जहां तक किन्नर अखाड़े का सवाल है, वह जूना के साथ शाही स्नान करे तो इसमें अखाड़ा परिषद को कोई आपत्ति नहीं है। जूना को शाही स्नान में पचास मिनट का समय मिलता है, सो उस अवधि में उसके साथ उसके संत या कोई भक्त स्नान करे, इसमें किसी को कोई आपत्ति नहीं है, न होनी चाहिए।

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prayagraj news : हरि गिरी। - फोटो : prayagraj

वहीं अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरिगिरि ने भी स्पष्ट किया कि यदि महंत नरेंद्र गिरि जी का ऐसा मानना है कि उन्होंने या बैठक में किन्नर अखाड़े को लेकर कोई बयान नहीं दिया गया था तो इसके बाद मामला स्वत: समाप्त हो जाता है और किसी प्रकार के त्यागपत्र का कोई औचित्य ही नहीं रह जाता है। वैसे भी प्रयागराज कुंभ में जूना और किन्नर अखाड़े के बीच लिखित समझौते के बाद इस प्रकरण का पटाक्षेप हो गया था, अब इस तरह का कोई मुद्दा उठाना औचित्यहीन है। जूना ने किन्नर अखाड़े को प्रयागराज कुंभ में जो वचन दिया था, वह सिर्फ प्रयागराज कुंभ नहीं बल्कि हमेशा के लिए है। किन्नर अखाड़ा जूना अखाड़े के साथ ही शाही स्नान में शामिल होगा।

Akhara Parishad News: Strict on the number of thirteen Akharas, the rest 'Kinnar' should bathe with Juna
prayagraj news : किन्नर अखाड़ा की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी। - फोटो : prayagraj

किन्नर अखाड़ा आचार्य महामंडलेश्वर ने कहा- गिनती, गणना से कुछ लेना देना नहीं

किन्नर अखाड़ा की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी का कहना है कि मुझे गिनती और गणना से कुछ लेना देना नहीं है। ‘अमर उजाला’ से बातचीत में उन्होंने कहा, श्रीमहंत हरिगिरि जी ने किन्नर अखाडे़ की अस्मिता को बचाने का काम करते हुए साधुता का परिचय दिया है। उनके बयान के बाद मेरी ओर से किसी और बयान की आवश्यकता नहीं रह जाती है। प्रयागराज की तरह हरिद्वार कुंभ में भी किन्नर अखाड़ा शिविर लगाएगा और जूना अखाड़ा के साथ ही शाही स्नान में शामिल होगा।

दोबारा फर्जी कहा तो मानहानि का मुकदमा

परी अखाड़े की प्रमुख त्रिकाल भवंता ने परी अखाड़े को फर्जी कहने पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अखाड़ा श्री सर्वेश्वर महादेव वैकुंठधाम मुक्ति द्वार अखाड़ा परी स्वतंत्र वैधानिक संस्था है जिसका विधिवत पंजीयन हुआ है। ऐसे में अखाड़े को फर्जी करार देना उचित नहीं है। यदि दोबारा फर्जी का मुद्दा उठाया जाता है तो मानहानि का मुकदमा दायर किया जाएगा।
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