दोनों पक्षों के पीछे हटने से अखाड़े का दंगल थमा, नरेंद्र गिरी बोले- नहीं लिया था किसी अखाड़े का नाम
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हरिद्वार कुंभ के पहले अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की मठ बाघंबरी गद्दी में हुई बैठक में नए अखाड़ों की मान्यता को लेकर उठे सवाल से संत समाज में आया उबाल संतों के ही संवाद के बाद थम गया है। अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के बयान के बाद महामंत्री श्रीमहंत हरिगिरि ने पद से अपने त्यागपत्र को औचित्यहीन कहा है। बता दें, किन्नर, परी और अखिल विश्व अखाड़ा को ‘फर्जी’ करार दिए जाने के बाद किन्नर अखाड़े के पक्ष में खड़े होते हुए अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरिगिरि ने महामंत्री पद छोड़ने की धमकी दे डाली थी।
परिषद का स्पष्ट मानना है कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद से सिर्फ तेरह अखाड़े ही जुड़े हैं और इस संख्या में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा। अखाड़ों की संख्या तेरह है और तेरह ही रहेगी। लेकिन, परी अखाड़ा और अखिल विश्व अखाड़ा को अखाड़े के रूप में मान्यता नहीं दी जाएगी, उन पर पाबंदी जारी रहेगी। वैसे, जहां तक किन्नर अखाड़े का सवाल है, वह जूना के साथ शाही स्नान करे तो इसमें अखाड़ा परिषद को कोई आपत्ति नहीं है। जूना को शाही स्नान में पचास मिनट का समय मिलता है, सो उस अवधि में उसके साथ उसके संत या कोई भक्त स्नान करे, इसमें किसी को कोई आपत्ति नहीं है, न होनी चाहिए।
वहीं अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरिगिरि ने भी स्पष्ट किया कि यदि महंत नरेंद्र गिरि जी का ऐसा मानना है कि उन्होंने या बैठक में किन्नर अखाड़े को लेकर कोई बयान नहीं दिया गया था तो इसके बाद मामला स्वत: समाप्त हो जाता है और किसी प्रकार के त्यागपत्र का कोई औचित्य ही नहीं रह जाता है। वैसे भी प्रयागराज कुंभ में जूना और किन्नर अखाड़े के बीच लिखित समझौते के बाद इस प्रकरण का पटाक्षेप हो गया था, अब इस तरह का कोई मुद्दा उठाना औचित्यहीन है। जूना ने किन्नर अखाड़े को प्रयागराज कुंभ में जो वचन दिया था, वह सिर्फ प्रयागराज कुंभ नहीं बल्कि हमेशा के लिए है। किन्नर अखाड़ा जूना अखाड़े के साथ ही शाही स्नान में शामिल होगा।