{"_id":"5d45db258ebc3e6cbc33a71c","slug":"ae-recruitment-exam-allahabad-news-ald25128227","type":"story","status":"publish","title_hn":"एई भर्ती परीक्षा की जांच के लिए आईआईटी के छात्रों ने सीबीआई को लिखा पत्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एई भर्ती परीक्षा की जांच के लिए आईआईटी के छात्रों ने सीबीआई को लिखा पत्र
विज्ञापन
AE recruitment exam
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की एक और परीक्षा विवादों के घेरे में है। देश के कई आईआईटी और एनआईटी के छात्रों ने सीबीआई को पत्र लिखकर सहायक अभियंता (एई) भर्ती परीक्षा-2013 की जांच कराने की मांग की है। अभ्यर्थियों ने परीक्षा में धांधली के आरोप लगाए गए हैं।
इस मसले पर पिछले दिनों अभ्यर्थियों ने आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रभात कुमार से भी मुलाकात की थी। अध्यक्ष ने अभ्यर्थियों से कहा था कि यह परीक्षा उनके कार्यकाल की नहीं है। अभ्यर्थी चाहें तो जांच के लिए सीबीआई को पत्र लिख सकते हैं। अभ्यर्थियों ने अब सीबीआई को पत्र लिखकर परीक्षा में धांधली का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सीबीआई जिस कार्यकाल में हुई परीक्षाओं की जांच कर रही है, उसी कार्यकाल में एई भर्ती की लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा वर्ष 2016 में 10, 12 एवं 13 अप्रैल को आयोजित की गई थी। हालांकि, इसका रिजल्ट दो फरवरी 2019 को जारी किया गया। इसके बाद इंटरव्यू कराया गया और सिविल इंजीनियरिंग के 625 अभ्यर्थियों को अंतिम रूप से चयनित किया गया। अंतिम परिणाम इस साल तीन मई को जारी किया गया। सीबीआई को लिखे पत्र में अभ्यर्थियों ने कहा कि परीक्षा में मॉडरेशन की आड़ में नंबरों में हेरफेर कर आयोग अफसरों के कुछ चहेतों का पीडब्ल्यूडी जैसे विभाग में चयन कराया गया। सीबीआई से मांग की गई है कि पीडब्ल्यूडी में चयनित सभी अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा में मिले नंबर एवं अंक तालिका में मिले अंकों की जांच कराई जाए। साथ ही साक्षात्कार में मिले अंकों की भी जांच हो।
अभ्यर्थियों का दावा है कि परीक्षा में आईआईटी/एनआईटी के टॉप रैंकर्स का चयन नहीं किया और प्राइवेट इंस्टीट्यूट के लो रैंक कॉलेज से पास अभ्यर्थियों एवं ओवरएज अभ्यर्थियों को ज्यादा अंक देकर अंतिम रूप से चयन किया गया। अभ्यर्थियों का दावा है कि व्हाट्सएप पर पैसे देकर चयन कराने की बात की गई है और उनके पास इसके साक्ष्य हैं। अभ्यर्थियों ने सीबीआई को यह साक्ष्य भी पत्र के साथ भेजा है। पत्र लिखने वालों में आईआईटी दिल्ली, आईईटी रुड़की, आईआईटी बीएचयू, आईआईटी कानपुर, आईआईटी गुवाहाटी, एनआईटी श्रीनगर, एनआईटी इलाहाबाद, एनआईटी रायपुर और एनआईटी जालंधर के छात्र हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
इस मसले पर पिछले दिनों अभ्यर्थियों ने आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रभात कुमार से भी मुलाकात की थी। अध्यक्ष ने अभ्यर्थियों से कहा था कि यह परीक्षा उनके कार्यकाल की नहीं है। अभ्यर्थी चाहें तो जांच के लिए सीबीआई को पत्र लिख सकते हैं। अभ्यर्थियों ने अब सीबीआई को पत्र लिखकर परीक्षा में धांधली का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सीबीआई जिस कार्यकाल में हुई परीक्षाओं की जांच कर रही है, उसी कार्यकाल में एई भर्ती की लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा वर्ष 2016 में 10, 12 एवं 13 अप्रैल को आयोजित की गई थी। हालांकि, इसका रिजल्ट दो फरवरी 2019 को जारी किया गया। इसके बाद इंटरव्यू कराया गया और सिविल इंजीनियरिंग के 625 अभ्यर्थियों को अंतिम रूप से चयनित किया गया। अंतिम परिणाम इस साल तीन मई को जारी किया गया। सीबीआई को लिखे पत्र में अभ्यर्थियों ने कहा कि परीक्षा में मॉडरेशन की आड़ में नंबरों में हेरफेर कर आयोग अफसरों के कुछ चहेतों का पीडब्ल्यूडी जैसे विभाग में चयन कराया गया। सीबीआई से मांग की गई है कि पीडब्ल्यूडी में चयनित सभी अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा में मिले नंबर एवं अंक तालिका में मिले अंकों की जांच कराई जाए। साथ ही साक्षात्कार में मिले अंकों की भी जांच हो।
विज्ञापन
अभ्यर्थियों का दावा है कि परीक्षा में आईआईटी/एनआईटी के टॉप रैंकर्स का चयन नहीं किया और प्राइवेट इंस्टीट्यूट के लो रैंक कॉलेज से पास अभ्यर्थियों एवं ओवरएज अभ्यर्थियों को ज्यादा अंक देकर अंतिम रूप से चयन किया गया। अभ्यर्थियों का दावा है कि व्हाट्सएप पर पैसे देकर चयन कराने की बात की गई है और उनके पास इसके साक्ष्य हैं। अभ्यर्थियों ने सीबीआई को यह साक्ष्य भी पत्र के साथ भेजा है। पत्र लिखने वालों में आईआईटी दिल्ली, आईईटी रुड़की, आईआईटी बीएचयू, आईआईटी कानपुर, आईआईटी गुवाहाटी, एनआईटी श्रीनगर, एनआईटी इलाहाबाद, एनआईटी रायपुर और एनआईटी जालंधर के छात्र हैं।
विज्ञापन