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सार्वजनिक सूचकों पर विज्ञापन लगाया तो भरना पड़ेगा जुर्माना
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 16 Apr 2016 02:18 AM IST
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सार्वजनिक सूचना देने वाले साइन बोर्ड पर विज्ञापन या पोस्टर चिपका कर ढंक देना अब महंगा पड़ सकता है। हाईकोर्ट ने सूबे के उच्च अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इस संबंध में परिपत्र जारी कर कार्रवाई करवाएं। दीवारों पर पोस्टर या बैनर लगाने वाले भी कार्रवाई की जद में आएंगे। जिस व्यक्ति या कंपनी के नाम का प्रचार सार्वजनिक सूचकों पर चिपका पाया जाएगा, नगर निगम उससे जुर्माना वसूल करेगा। कोर्ट ने नगर निगम इलाहाबाद के 18 सितंबर 2015 के बाई लॉज को मॉडल के रूप में अपनाते हुए पूरे प्रदेश में लागू करने का निर्देश दिया है। प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग और प्रमुख सचिव जनकार्य विभाग को इन निर्देशों पर संज्ञान लेने को कहा है।
अनुराग मिश्र की ओर से दाखिल जनहित याचिका में सार्वजनिक सूचकों को विज्ञापन चिपकाकर ढंक देने की शिकायत की गई। मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने इस पर संज्ञान लेते हुए व्यापक निर्देश दिए हैं। याचिका में कहा गया कि किसी सार्वजनिक स्थान, कार्यालय या अस्पताल आदि के बारे में आम जनता को जानकारी देने के लिए सड़क पर जनसूचक बोर्ड लगाए जाते हैं, मगर इन पर लोग विज्ञापन या चुनाव संबंधी पोस्टर आदि चिपकाकर ढंक देते हैं जिससे बोर्ड लगाने का उद्देश्य बेकार हो जाता है। यहां तक कि हाईकोर्ट भी इसका अपवाद नहीं है।
नगर निगम इलाहाबाद द्वारा दाखिल जवाब में कहा गया है कि निगम ने 18 सितंबर 2015 को यूपी म्युनिसिपल कॉरपोरेशन एक्ट के तहत बाईलॉज बनाया है जिसके तहत सार्वजनिक स्थानों पर पोस्टर या विज्ञापन, बैनर, होर्डिंग आदि लगाने वालों पर कार्रवाई करने तथा जुर्माना वसूलने का प्रावधान है। खंडपीठ ने कहा कि इस मामले में कानून मौजूद है, उसे लागू करना भी जरूरी है। सार्वजनिक मार्गों पर लगे साइन बोर्ड की उपयोगिता को बनाए रखने की जिम्मेदारी अधिकारियों की है। कोर्ट ने कहा कि जिस प्रकार से पूरे प्रदेश में सार्वजनिक स्थानों पर पोस्टर, बैनर आदि लगाए जा रहे हैं ,उस पर अधिकारी तत्काल कार्रवाई करें।
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पीठ ने निर्देश दिया है कि सार्वजनिक सूचकों पर से विज्ञापन आदि हटाने का कार्य मात्र एक बार नहीं होना चाहिए। प्रत्येक वार्ड में साफ-सफाई के लिए जिम्मेदार अधिकारी इसकी नियमित मॉनिटरिंग करे। इस मामले में कर्मचारियों की जिम्मेदारी और जवाबदेही निश्चित करने का निर्देश दिया है। अधिकारी इसकी समय-समय पर समीक्षा करें। कोर्ट ने जनजागरूकता अभियान भी चलाने का निर्देश दिया है।
बार कौंसिल को नसीहत हाईकोर्ट ने बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश से भी कहा कि अधिवक्ता एक जिम्मेदार कोर्ट अफसर की तरह व्यवहार करें तथा चुनाव के दौरान सार्वजनिक सूचकों पर प्रचार सामग्री चिपकाकर उसे ढंके नहीं। कोर्ट ने आम जनता से भी अपील की है कि अपनी जिम्मेदारी समझते हुए स्वयं सार्वजनिक स्थानों पर पोस्टर, बैनर आदि न लगाएं।
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अनुराग मिश्र की ओर से दाखिल जनहित याचिका में सार्वजनिक सूचकों को विज्ञापन चिपकाकर ढंक देने की शिकायत की गई। मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने इस पर संज्ञान लेते हुए व्यापक निर्देश दिए हैं। याचिका में कहा गया कि किसी सार्वजनिक स्थान, कार्यालय या अस्पताल आदि के बारे में आम जनता को जानकारी देने के लिए सड़क पर जनसूचक बोर्ड लगाए जाते हैं, मगर इन पर लोग विज्ञापन या चुनाव संबंधी पोस्टर आदि चिपकाकर ढंक देते हैं जिससे बोर्ड लगाने का उद्देश्य बेकार हो जाता है। यहां तक कि हाईकोर्ट भी इसका अपवाद नहीं है।
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नगर निगम इलाहाबाद द्वारा दाखिल जवाब में कहा गया है कि निगम ने 18 सितंबर 2015 को यूपी म्युनिसिपल कॉरपोरेशन एक्ट के तहत बाईलॉज बनाया है जिसके तहत सार्वजनिक स्थानों पर पोस्टर या विज्ञापन, बैनर, होर्डिंग आदि लगाने वालों पर कार्रवाई करने तथा जुर्माना वसूलने का प्रावधान है। खंडपीठ ने कहा कि इस मामले में कानून मौजूद है, उसे लागू करना भी जरूरी है। सार्वजनिक मार्गों पर लगे साइन बोर्ड की उपयोगिता को बनाए रखने की जिम्मेदारी अधिकारियों की है। कोर्ट ने कहा कि जिस प्रकार से पूरे प्रदेश में सार्वजनिक स्थानों पर पोस्टर, बैनर आदि लगाए जा रहे हैं ,उस पर अधिकारी तत्काल कार्रवाई करें।
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पीठ ने निर्देश दिया है कि सार्वजनिक सूचकों पर से विज्ञापन आदि हटाने का कार्य मात्र एक बार नहीं होना चाहिए। प्रत्येक वार्ड में साफ-सफाई के लिए जिम्मेदार अधिकारी इसकी नियमित मॉनिटरिंग करे। इस मामले में कर्मचारियों की जिम्मेदारी और जवाबदेही निश्चित करने का निर्देश दिया है। अधिकारी इसकी समय-समय पर समीक्षा करें। कोर्ट ने जनजागरूकता अभियान भी चलाने का निर्देश दिया है।
बार कौंसिल को नसीहत हाईकोर्ट ने बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश से भी कहा कि अधिवक्ता एक जिम्मेदार कोर्ट अफसर की तरह व्यवहार करें तथा चुनाव के दौरान सार्वजनिक सूचकों पर प्रचार सामग्री चिपकाकर उसे ढंके नहीं। कोर्ट ने आम जनता से भी अपील की है कि अपनी जिम्मेदारी समझते हुए स्वयं सार्वजनिक स्थानों पर पोस्टर, बैनर आदि न लगाएं।