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प्रशासनिक अधिकारी नहीं रद कर सकते रजिस्टर्ड डीड
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 01 Feb 2018 01:37 AM IST
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हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि कोई रजिस्टर्ड सेल डीड (पंजीकृत विक्रय अभिलेख या पंजीकृत अभिलेख) को निरस्त करने का अधिकार प्रशासनिक अधिकारियों को नहीं है। इस संबंध में जारी 13 अगस्त 2013 का शासनादेश मनमाना, बिना क्षेत्राधिकार के और रजिस्ट्रेशन एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन है। कोर्ट ने एआईजी स्टांप के रजिस्टर्ड डीड को रद करने के आदेश को निरस्त कर दिया है। इस आदेश से पूरे प्रदेश में पंजीकृत अभिलेखों को निरस्त करने के लिए चल रही कार्यवाहियां प्रभावित होंगी। इसका लाभ रजिस्टर्ड डीड कराने वाले को मिलेगा।
रामपुर के कृष्ण कुमार सक्सेना और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति तरुण अग्रवाल और न्यायमूर्ति अजय भनोट की पीठ ने दिया है। याची के अधिवक्ता क्षितिज शैलेंद्र का कहना था कि 13 अगस्त का शासनादेश आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट की पूर्णपीठ के 2007 के एक आदेश के तहत जारी किया गया, जबकि आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने उस प्रदेश में मौजूद नियमावली के अनुसार आदेश पारित किया था। उत्तर प्रदेश में ऐसी कोई नियमावली नहीं है, इसलिए राज्य सरकार को शासनादेश जारी करने का अधिकार नहीं है। इस शासनादेश से प्राप्त शक्ति का प्रयोग कर तमाम पंजीकृत अभिलेख निरस्त किए जा चुके हैं। जबकि पंजीकृत अभिलेख निरस्त करने की शक्ति सिर्फ सिविल न्यायालय को प्राप्त है। किसी प्रशासनिक शक्ति से इसे निरस्त नहीं किया जा सकता है।
याचिका में एआईजी स्टांप रामपुर के आदेश को चुनौती दी गई थी। याची का कहना था कि उसके पिता ने 2015 में उसके नाम से एक रजिस्टर्ड सेल डीड की थी, जिसे उसके भाइयों ने सहायक निरीक्षक निबंधन के यहां चुनौती दी थी। कहा गया कि पिता ने 2014 में पंजीकृत वसीयत की थी, इसलिए अब वह रजिस्टर्ड सेल डीड नहीं कर सकते हैं। एआईजी स्टांप ने इसे स्वीकार करते हुए याची की सेल डीड निरस्त कर दी, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।
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रामपुर के कृष्ण कुमार सक्सेना और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति तरुण अग्रवाल और न्यायमूर्ति अजय भनोट की पीठ ने दिया है। याची के अधिवक्ता क्षितिज शैलेंद्र का कहना था कि 13 अगस्त का शासनादेश आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट की पूर्णपीठ के 2007 के एक आदेश के तहत जारी किया गया, जबकि आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने उस प्रदेश में मौजूद नियमावली के अनुसार आदेश पारित किया था। उत्तर प्रदेश में ऐसी कोई नियमावली नहीं है, इसलिए राज्य सरकार को शासनादेश जारी करने का अधिकार नहीं है। इस शासनादेश से प्राप्त शक्ति का प्रयोग कर तमाम पंजीकृत अभिलेख निरस्त किए जा चुके हैं। जबकि पंजीकृत अभिलेख निरस्त करने की शक्ति सिर्फ सिविल न्यायालय को प्राप्त है। किसी प्रशासनिक शक्ति से इसे निरस्त नहीं किया जा सकता है।
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याचिका में एआईजी स्टांप रामपुर के आदेश को चुनौती दी गई थी। याची का कहना था कि उसके पिता ने 2015 में उसके नाम से एक रजिस्टर्ड सेल डीड की थी, जिसे उसके भाइयों ने सहायक निरीक्षक निबंधन के यहां चुनौती दी थी। कहा गया कि पिता ने 2014 में पंजीकृत वसीयत की थी, इसलिए अब वह रजिस्टर्ड सेल डीड नहीं कर सकते हैं। एआईजी स्टांप ने इसे स्वीकार करते हुए याची की सेल डीड निरस्त कर दी, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।
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