हाईकोर्ट : तीन सौ साल पुराने कुएं को बहाल करें प्रशासन, कोर्ट ने कहा- कुएं के प्रयोग का प्रोत्साहन भी जरूरी
यह आदेश न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार की खंडपीठ ने प्रोफेसर महेंद्र पाल चौधरी की ओर से प्राकृतिक संपदा संरक्षण के लिए कुएं को बहाल करने की मांग वाली याचिका निस्तारित करते हुए दिया।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्राकृतिक संपदा संरक्षण के लिए बस्ती के खझौला गांव में स्थित 300 साल पुराने कुएं की खोदाई का आदेश दिया है। अवैध कब्जे के लिए इसे तीन वर्ष पहले कुछ लोगों ने मिट्टी से पाट दिया था। कोर्ट ने जिला प्रशासन को कुएं को पूर्व स्थित में बहाल करते हुए उसके पानी के प्रयोग के लिए प्रोत्साहित करने का आदेश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार की खंडपीठ ने प्रोफेसर महेंद्र पाल चौधरी की ओर से प्राकृतिक संपदा संरक्षण के लिए कुएं को बहाल करने की मांग वाली याचिका निस्तारित करते हुए दिया।
याची के अधिवक्ता सुनील चौधरी ने दलील दी कि उत्तर प्रदेश सरकार प्राकृतिक संपदा संरक्षण नीति के तहत इस ऐतिहासिक कुएं की देखभाल नहीं की गई। तीन सौ साल पुराने इस कुएं पर अराजक तत्वों द्वारा मिट्टी से पाट कर अवैध कब्जा किया जा रहा है।
कोर्ट ने कहा इस तरह के कुओं के संरक्षण से पीने का पानी मिलने के साथ ही प्राकृतिक संपदा के अनेक लाभ लोगों को मिल सकते हैं। कोर्ट ने बस्ती के जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी को आदेश दिया कि शीघ्र मिट्टी से पट चुके कुएं की खोदाई कर उसे पूर्व स्थित में बहाल करने के उसके पानी के प्रयोग के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में भी ठोस कदम उठाने की सलाह ही है।