खुलासा : राजू पाल की हत्या के समय क्राॅस फायरिंग में अब्दुल कवि को लगी थी गोली, विवेचना में नाम आया था सामने
राजू पाल हत्याकांड में 18 साल से फरार आरोपी अब्दुल कवि के सरेंडर के बाद एक बड़े रहस्य से पर्दा उठा है। हत्याकांड की जांच करने वाले तीसरे विवेचक इंस्पेक्टर एचएस राय ने लिख दिया था कि इस नाम का कोई शख्स है ही नहीं।
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राजू पाल हत्याकांड में 18 साल से फरार आरोपी अब्दुल कवि के सरेंडर के बाद एक बड़े रहस्य से पर्दा उठा है। हत्याकांड की जांच करने वाले तीसरे विवेचक इंस्पेक्टर एचएस राय ने लिख दिया था कि इस नाम का कोई शख्स है ही नहीं। हालांकि चौथे विवेचनाधिकारी ने बाकायदा उसका नाम, पता और फोटो केस डायरी में दर्ज किया था। अब्दुल कवि को सीबीसीआईडी और सीबीआई ने भी वांटेड घोषित किया था।
मूल रूप से कौशाम्बी के सरायअकिल थाना क्षेत्र के भखंदा गांव का रहने वाला अब्दुल कवि 2003 से अतीक के भाई अशरफ के साथ रहने लगा था। वह बंदूक लेकर अशरफ के अंगरक्षक की तरह रहता था। 25 जनवरी 2005 को सुलेम सराय में जब राजू पाल पर गोलियों की बौछार की गई तो उनके सुरक्षा गार्डों ने भी जवाबी गोलियां चलाईं थीं। क्राॅस फायरिंग में अब्दुल कवि के दाहिने बांह में गोली लग गई थी।
निजी नर्सिंग होम ले जाकर अशरफ ने निकलवाई गोली
इसके बाद अशरफ उसे लेकर तुरंत करेली के एक नर्सिंग होम में पहुंचा। वहां एक डाॅक्टर को बुलाकर उसके हाथ से गोली निकलवाई गई। इसके बाद उसी रात कवि को लखनऊ भेज दिया गया। इसके बाद वह फरार हो गया। राजू पाल हत्याकांड में जो एफआईआर दर्ज कराई गई थी, उसमें भी अब्दुल कवि का नाम नहीं था। पहले विवेचक परशुराम सिंह की विवेचना में भी उसका नहीं आ पाया। कोतवाली के तत्कालीन इंस्पेक्टर सुरेंद्र सिंह को दूसरा विवेचनाधिकारी बनाया गया।
तीसरे विवेचक ने रिपोर्ट लगाई- अब्दुल कवि नाम का कोई शख्स ही नहीं
उन्होंने सबसे पहले इस बात का उल्लेख किया कि घटनास्थल पर अशरफ के अन्य गुर्गों के साथ अब्दुल कवि नाम का शख्स भी मौजूद था। उन्होंने अब्दुल कवि के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी। उनके ट्रांसफर के बाद तीसरे विवेचनाधिकारी एचएस राय ने जांच के बाद लिख दिया कि अब्दुल कवि नाम का कोई शख्स ही नहीं है। जब जांच चौथे विवेचनाधिकारी नारायण सिंह परिहार को मिली तो उन्होंने केस डायरी में क्राॅस फायरिंग के दौरान अब्दुल कवि के घायल होने का जिक्र किया बल्कि उसके गांव और फोटो का भी केस डायरी में उल्लेख किया। सीबीसीआईडी और सीबीआई की विवेचना में भी अब्दुल कवि वांटेड रहा।
पुलिस के बड़े बड़े सूरमा कवि की गिरफ्तारी का ख्वाब देखते रह गए
राजू पाल हत्याकांड के बाद 18 साल से फरार अब्दुल कवि की गिरफ्तारी का ख्वाब पुलिस के बड़े बड़े सूरमा देखते रह गए। जिला पुलिस के साथ ही सीबीसीआईडी, सीबीआई और एसटीएफ भी कवि को खोज रही थी। लेकिन वह किसी के हाथ नहीं आया।
अलग-अलग बैरक में रखे गए शूटर अब्दुल कवि के मददगार
प्रदेश की जेलों में माफियाराज के खात्मे के लिए सरकार की सख्ती का असर जिला कारागार में भी देखने को मिला। राजूपाल हत्याकांड में फरार शूटर अब्दुल कवि के गिरफ्तार भाई व पकड़े गए 19 मददगारों को अलग-अलग बैरकों में रखा गया है। सामान्य बंदियों की तरह उन्हें खाना दिया जा रहा है। सभी की 24 घंटे सीसीटीवी के जरिये निगरानी की जा रही है।
बरेली जेल में बंद माफिया अतीक के लिए लिए बाहर से मंगवाई जाने वाली बिरयानी व कैंटीन में पकने वाले मुर्गा, बकरा व अंडा करी की जानकारी होने के बाद कारागार प्रशासन ने वहां के जेल अधीक्षक को निलंबित कर दिया। इसी तरह नैनी जेल में बंद माफिया अतीक के गुर्गों के साथ सख्ती नहीं बरते जाने पर यहां के जेल अधीक्षक शशिकांत को भी निलंबित किया गया। बांदा व चित्रकूट जेल के अफसरों पर भी कार्रवाई की जा चुकी है।
प्रभारी जेल अधीक्षक भूपेंद्र सिंह ने बताया कि शूटर के जितने भी मददगार पकड़े गए हैं उन्हें एक बैरक में नहीं रखा गया है। सभी-अलग सेल में रखे गए हैं। 24 घंटे सीसीटीवी से उनकी निगरानी की जाती है। मुलाकातियों को लेकर भी खास सतर्कता बरती जा रही है।
कवि के घर की पहली कुर्की कराई थी चौथे विवेचक ने
राजू पाल हत्याकांड में रहस्य बने अब्दुल कवि को प्रकाश में लाने का श्रेय चौथे विवेचक नारायण सिंह परिहार को जाता है। परिहार बताते हैं कि जब वह शाहगंज थानाध्यक्ष थे, तभी विवेचना उन्हें मिली थी। इसी थाना क्षेत्र में एक व्यक्ति को कवि ने बहुत परेशान कर रखा था। उसी ने कवि के गांव के बारे में बताया। उन्होंने एक मुखबिर को गांव भेजा। पता चला कि कवि का बहुत बड़ा परिवार है। माता-पिता, पत्नी, भाई बहन समेत कई लोग हैं। इसके बाद उन्होंने सर्च वारंट लिया। फिर कवि के घर की पहली कुर्की भी अदालत के आदेश पर उन्होंने ही करवाई थी।