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थोड़ी सावधानी से सुरक्षित होगा आशियाना

Thu, 14 May 2015 02:48 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला इलाहाबाद
ब्यूरो/ अमर उजाला इलाहाबाद Updated Thu, 14 May 2015 02:48 AM IST
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इलाहाबाद। भूकंप ने इलाहाबादियों को हिलाकर रख दिया है। हर किसी को सुरक्षा की चिंता है। लोगों में दहशत इस कदर है कि वह घरों में जाने से डरने लगे हैं। ऐसी स्थिति में इलाहाबाद आर्किटेक्ट्स एसोसिएशन आगे आया है और लोगों को सुरक्षित भवन बनाने की तरीके सुझाए हैं। एडीए के चीफ टाउन प्लानर पीके सोलंकी का भी कहना है कि कुछ सावधानी बरतने से भूकंप से नुकसान काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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इलाहाबाद आर्किटेक्ट्स एसोसिएशन की सलाह है कि भूकंप में नुकसान कम हो, इसके लिए जरूरी है कि भवन बड़ा या छोटा हो, उसे बनवाते समय विभिन्न हिस्सों को फाउंडेशन लेकर आखिरी तल तक आपस में पिलर और बीम के जरिए बांधना चाहिए। निर्माण आरसीसी का ज्यादा सुरक्षित होता है। बीम और कॉलम का जोड़ मजबूत होना चाहिए, ताकि झूलन प्रभाव को रोका जा सके। जितना संभव हो, भवन की छत हल्की बनवाएं। भवनों में जितने भी मोड़ हों, उसे संतुलित रखने के लिए शीयरवाल देना जरूरी है। प्लिंथ के चारों ओर तथा फर्श के नीचे महीन बालू के इस्तेमाल से भूकंप के प्रभाव को कम किया जा सकता है। स्ट्रक्चरल डिजाइन से पहले मिट्टी की भार-क्षमता सहित अन्य गुणवत्ता की जांच कर लेनी चाहिए।
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संवाददाताओं से बातचीत में एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल कुमार गुप्ता के मुताबिक भवन के फाउंडेशन, पिलर, बीम और छत में लोहे की छड़ों को बांधने की तकनीक सही होनी चाहिए। कंक्रीट में सीमेंट, बालू, गिट्टी का सही अनुपात हो। भवन निर्माण के दौरान मिक्सर और वाइबरेटर का इस्तेमाल अवश्य होना चाहिए, ताकि कंपन होने पर मजबूती का पता चल सके। उन्होंने कहा कि जहां तक संभव हो अनुभव प्राप्त आर्किटेक्ट की देखरेख में भवन का निर्माण कराएं, ताकि उसमें सुरक्षा की बारीकी से निगरानी की जा सके।
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दूसरी ओर एडीए के सीटीपी सोलंकी कहते हैं कि भूकंप आने पर न घबराएं। भूकंप का असर 20-25 सेकेंड से अधिकतम एक -डेढ़ मिनट तक हो सकता है। बहुमंजिला इमारत हो या छोटे भवन, इतने कम समय में उससे बाहर निकलना संभव नहीं हैं। ऐसे में घर के अंदर तत्काल किसी मजबूत चीज के नीचे बैठकर खुद को बचाएं। बहुमंजिला अपार्टमेंट में रहने वाले या कार्यालयों में काम करने वाले सीधे सीढ़ियों की ओर न भागे, क्योंकि एक साथ बड़ी संख्या में लोगों के सीढ़ी से नीचे उतरने पर भार बढ़ जाता है। इससे सीढ़ियों के गिरने का खतरा रहता है।
0 भवन बनवाते समय इन चीजों का रखें ध्यान

0 भवन को चारों ओर से सरिया के फ्रेम से बांधना चाहिए. हर तल पर बीम जरूरी।
0 पिलर से खड़े करने के बाद सरिया को छत से एल सेप में मिलाएं। इससे छत का स्लैब मजबूत होगा।
0 पिलर के बीच में खाली हिस्सा न छोड़े। एक से दूसरे पिलर के बीच में दीवार अवश्य हो।
0 सीढ़ी के लिए बीम बनाते समय सरिया पिलर और दीवार में साथ-साथ लगाएं। सीढ़ी के हर मोड़ पर बीम आवश्यक।
0 भवन के हर मोड़ पर बीम का होना सुरक्षा के लिहाज से बेहद जरूरी है।
0पार्किंग में एक से दूसरे पिलर के बीच में ज्यादा दूर तक खाली जगह न छोड़े। उसमें दीवार अवश्य उठवाएं।

 शहर में हाल के वर्षों में बनी बहुमंजिला इमारतों में भूकंप से बचाए के इंतजाम किए हैं। वर्तमान में निर्माणाधीन बहुमंजिला अपार्टमेंट और कार्यालय उपयोग वाली इमारतों में भूकंपरोधी उपाए किए जा रहे हैं। एडीए के सीटीपी पीके सोलंकी का कहना है कि निर्माणाधीन इमारतों की बराबर निगरानी भी की जा रही है।


भवन चाहे बहुमंजिला यो हा छोटा, उसकी देखरेख बराबर होनी चाहिए। आर्किटेक्ट प्रभा मेहरोत्रा कहता हैं कि निर्माण सामग्री की भी आयु निर्धारित होती है। ऐसे में साल-दर-साल भवन पर ध्यान ज्यादा रखने की जरूरत है। यह भी बेहद जरूरी है कि भवन की मरम्मत के लिए हर वर्ष कुछ रकम अलग रखी जाए।
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