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डेढ़ साल में एक मुकदमा, वह भी अज्ञात के खिलाफ

Tue, 13 Aug 2019 01:00 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 13 Aug 2019 01:00 AM IST
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A lawsuit in a year and a half, that too against unknown
A lawsuit in a year and a half, that too against unknown
प्रयागराज। डेढ़ साल का लंबा वक्त बीत गया और सीबीआई उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएसी) की भर्ती परीक्षाओं की जांच को अपने मुकाम तक नहीं पहुंचा सकी। इस दौरान सीबीआई ने सैकड़ों संदिग्ध चयनितों, अभ्यर्थियों और आयोग के अफसरों से पूछताछ की लेकिन सिर्फ एक मुकदमा दर्ज किया गया और वह भी अज्ञात के खिलाफ हुआ।
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सीबीआई की टीम ने आयोग की भर्ती परीक्षाओं की औपचारिक रूप से जांच शुरू करने के लिए एक जनवरी 2018 को आयोग में पहला कदम रखा था। शुरुआती जांच काफी तेजी से आगे बढ़ी और सीबीआई को पीसीएस-2015 में धांधली के कई पुख्ता सुबूत भी मिले। गोविंदपुर स्थित कैंप कार्यालय से लेकर दिल्ली स्थित मुख्यालय तक पीसीएस-2015 के चयनितों को बुलाकर पूछताछ की गई। बड़ी संख्या में शिकायत करने वाले अभ्यर्थियों के बयान दर्ज किए गए। आयोग के अफसरों को भी कैंप कार्यालय और मुख्यालय बुलाकर पूछताछ हुई लेकिन डेढ़ बाद भी जांच किसी नतीजे तक नहीं पहुंची।
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इस दौरान सीबीआई ने केवल एक मुकदमा दर्ज किया, जो पीसीएस-2015 में हुई धांधली से जुड़ा था। एफआईआर में यह बात दर्ज थी कि पीसीएस-2015 में मॉडरेशन की आड़ में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई और अभ्यर्थियों के नंबर घटाए-बढ़ाए गए। इसके साथ ही सीबीआई को कई कॉपियों में विशेष चिह्न लगे हुए मिले थे और सीबीआई को आशंका थी कि ये चिह्न कॉपियों की पहचान करने के लिए बनाए गए हैं ताकि मूल्यांकन के दौरान अभ्यर्थियों की पहचान हो सके। इस मामले में सीबीआई ने कुछ बाहरी अज्ञात लोगों और आयोग के अज्ञात अफसरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था लेकिन ये अज्ञात लोग कौन थे, यह अब तक सामने नहीं आ सका है।
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एपीएस-2010 की जांच भी पड़ी धीमी
- अपर निजी सचिव (एपीएस)-2010 की जांच के लिए सीबीआई ने प्रदेश सरकार से विशेष अनुमति ली थी, क्योंकि सीबीआई जिस कार्यकाल में आए परीक्षा परिणामों की जांच कर रही थी, इस परीक्षा का परिणाम उसके बाद आया। शुुरुआत में सीबीआई ने जांच को तेजी से आगे बढ़ाया। इसमें भी तमाम गड़बड़ियों के साक्ष्य सीबीआई को मिले लेकिन इस मामले में भी जांच और कार्रवाई अब धीमी पड़ गई है।
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