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डिग्री-अंकपत्र ही नहीं फर्जी सत्यापन भी
Allahabad
Updated Thu, 21 Aug 2014 05:30 AM IST
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इलाहाबाद। जालसाज इलाहाबाद विश्वविद्यालय के नाम पर फर्जी डिग्री और अंकपत्र बनाने में ही सफल नहीं हैं, उनका सत्यापन कराने में भी सफल हो रहे हैं। अलग-अलग संस्थाओं की ओर से सत्यापन के लिए भेजे डाक्यूमेंट के बीच में गायब होने का मामला भी सामने आया है। सोचने वाली बात यह भी है कि लगातार शिकायतों के बावजूद न ही जिला प्रशासन जागा और न ही विश्वविद्यालय प्रशासन। इस मामलों की छानबीन तो इसकी पहल भी नहीं हुई। जिला और इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन की इसी अनदेखी का नतीजा है कि फर्जी डिग्री और अंकपत्र का यह खेल विकराल रूप ले चुका है।
विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग को पिछले साल भी बड़ी संख्या में फर्जी अंकपत्र और डिग्री मिली थी। मुंबई की दो संस्थाओं से बड़ी संख्या में डिग्री और अंकपत्र सत्यापन के लिए विश्वविद्यालय आती है। पिछले साल उनमें एक संस्था के अफसर विश्वविद्यालय के अधिकारी से बात की तो बड़ा खेल सामने आया। मुंबई की संस्था के अफसर का कहना था कि हर महीने दर्जनों डाक्यूमेंट सत्यापन के लिए विश्वविद्यालय भेजे गए। इतना ही नहीं अफसर ने भी बताया कि विश्वविद्यालय ने उनका सत्यापन करके जवाब भी भेजे हैं। इसके विपरीत विश्वविद्यालय के अफसर का कहना था कि उस संस्था की ओर से महीनों से एक भी डाक्यूमेंट सत्यापन के लिए नहीं पहुंचा। जालसाज बीच में ही डाक्यूमेंट गायब कर देते और उसके सही होने की रिपोर्ट संस्था को भेज देते। इस तरह के मामले के खुलासा के बाद विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग की ओर से डीएम से लिखित शिकायत की गई थी। परीक्षा नियंत्रक प्रोफेसर एचएस उपाध्याय ने बताया कि एक साल पहले डीएम विश्वविद्यालय में सत्यापन के लिए पहुंचे फर्जी दस्तावेज का पूरा डिटेल दिया गया था। साथ में अन्य तरह की आशंकाआें की बाबत भी रिपोर्ट दी गई थी। परीक्षा नियंत्रक का कहना है कि उस बारे में कुछ हुआ इसकी जानकारी उन्हें नहीं है।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में जनवरी में एक युवक फर्जी अंकपत्र और डिग्री के साथ पकड़ा गया था। वह उनके सत्यापन के लिए विश्वविद्यालय के लिए पहुंचा था। परीक्षा नियंत्रक और चीफ प्रॉक्टर ने उसे पुलिस के हवाले कर दिया लेकिन बाद में उसे छोड़ दिया गया। अफसरों का कहना है कि उस युवक को आगे करके पूरे गिरोह तक पहुंचा जा सकता था लेकिन पुलिस ने जांच की जरूरत ही नहीं समझी। इतना ही नहीं आंध्र प्रदेश में तकरीबन दो साल पहले ही पुलिस विभाग में इलाहाबाद विश्वविद्यालय की डिग्री के नाम पर भर्ती का खुलासा हुआ था। इसमें एक गिरोह पकड़ा गया था। इस मामले में यहां का एक कोचिंग संचालक भी पकड़ा गया था। इसके बाद भी किसी स्तर पर इस खेल के पर्दाफास की कोशिश तक नहीं हुई।
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विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग को पिछले साल भी बड़ी संख्या में फर्जी अंकपत्र और डिग्री मिली थी। मुंबई की दो संस्थाओं से बड़ी संख्या में डिग्री और अंकपत्र सत्यापन के लिए विश्वविद्यालय आती है। पिछले साल उनमें एक संस्था के अफसर विश्वविद्यालय के अधिकारी से बात की तो बड़ा खेल सामने आया। मुंबई की संस्था के अफसर का कहना था कि हर महीने दर्जनों डाक्यूमेंट सत्यापन के लिए विश्वविद्यालय भेजे गए। इतना ही नहीं अफसर ने भी बताया कि विश्वविद्यालय ने उनका सत्यापन करके जवाब भी भेजे हैं। इसके विपरीत विश्वविद्यालय के अफसर का कहना था कि उस संस्था की ओर से महीनों से एक भी डाक्यूमेंट सत्यापन के लिए नहीं पहुंचा। जालसाज बीच में ही डाक्यूमेंट गायब कर देते और उसके सही होने की रिपोर्ट संस्था को भेज देते। इस तरह के मामले के खुलासा के बाद विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग की ओर से डीएम से लिखित शिकायत की गई थी। परीक्षा नियंत्रक प्रोफेसर एचएस उपाध्याय ने बताया कि एक साल पहले डीएम विश्वविद्यालय में सत्यापन के लिए पहुंचे फर्जी दस्तावेज का पूरा डिटेल दिया गया था। साथ में अन्य तरह की आशंकाआें की बाबत भी रिपोर्ट दी गई थी। परीक्षा नियंत्रक का कहना है कि उस बारे में कुछ हुआ इसकी जानकारी उन्हें नहीं है।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय में जनवरी में एक युवक फर्जी अंकपत्र और डिग्री के साथ पकड़ा गया था। वह उनके सत्यापन के लिए विश्वविद्यालय के लिए पहुंचा था। परीक्षा नियंत्रक और चीफ प्रॉक्टर ने उसे पुलिस के हवाले कर दिया लेकिन बाद में उसे छोड़ दिया गया। अफसरों का कहना है कि उस युवक को आगे करके पूरे गिरोह तक पहुंचा जा सकता था लेकिन पुलिस ने जांच की जरूरत ही नहीं समझी। इतना ही नहीं आंध्र प्रदेश में तकरीबन दो साल पहले ही पुलिस विभाग में इलाहाबाद विश्वविद्यालय की डिग्री के नाम पर भर्ती का खुलासा हुआ था। इसमें एक गिरोह पकड़ा गया था। इस मामले में यहां का एक कोचिंग संचालक भी पकड़ा गया था। इसके बाद भी किसी स्तर पर इस खेल के पर्दाफास की कोशिश तक नहीं हुई।
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