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बच्चों को बचाने उतरा प्रशासन, स्कूली वाहनों की जांच, 22 सीज
Allahabad
Updated Fri, 08 Aug 2014 05:30 AM IST
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इलाहाबाद। पिछले दस दिनों में स्कूली बच्चों के साथ हुई दुर्घटनाओं ने आखिरकार प्रशासन को नींद से जगा दिया है। बच्चों के प्रति बेहद लापरवाह स्कूल बस संचालकों, वैन चालकों पर सख्ती शुरू हो गई है। नियमों की धज्जियां उड़ाकर स्कूली बच्चों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ करने वाले वाहन संचालकों के खिलाफ प्रशासन ने बुधवार से कार्रवाई शुरू कर दी। परिवहन आयुक्त के निर्देश पर परिवहन और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने शहर के छह बड़े स्कूलों के पास सघन जांच अभियान चलाया। अभियान के दौरान तीन बस समेत 22 वाहनों को सीज कर दिया गया। अभियान के दौरान छह ऐसी मारूति वैन को सीज किया गया जो गैस सिलेंडर से संचालित की जा रही थी। आरटीओ (प्रवर्तन) एमएल चौरसिया का कहना है कि अभियान बृहस्पतिवार को भी जारी रहेगा।
स्कूली वाहनों की बदहाल स्थिति और बच्चों की जिंदगी के साथ हो रहे खिलवाड़ को लेकर ‘अमर उजाला’ ने प्रमुखता से खबरें प्रकाशित की थीं। सहारनपुर हादसे में कई बच्चों की मौत के बाद अमर उजाला ने इस पर गंभीरता दिखाई और प्रशासन को आईना दिखाया कि कैसे स्कूली वाहन बच्चों की जिंदगी के साथ खेल रहे हैं। इसके बाद बुधवार को परिवहन आयुक्त ने सभी डीएम, एसएसपी और आरटीओ को निर्देशित किया कि वह तत्काल अभियान चलाएं। निर्देश पर एआरटीओ (प्रवर्तन) आरके सिंह और एसपी ट्रैफिक राजकमल यादव की अगुवाई में शहर के छह प्रमुख स्कूलों सेंट मेरीज कान्वेंट, व्वायज हाईस्कूल, महर्षि पंतजलि विद्या मंदिर, सेंट एंथोनी स्कूल एंड कालेज, मेरी लूकस समेत छह स्कूलों के पास सघन जांच अभियान चलाया। एआरटीओ प्रवर्तन आरके सिंह ने बताया कि अभियान के दौरान तीन बसों, चार टाटा मैजिक और 15 मारुति वैन को सीज कर दिया गया।
अभियान के दौरान छह ऐसी मारूति वैन को सीज कर दिया गया जो गैस सिलेंडर से संचालित की जा रही थी। इसी तरह की मारुति वैन में ही विस्फोट होने से सहारनपुर में शिक्षिका समेत कई बच्चों की मौत हो गई थी। सवाल उठता है कि जानकारी के बाद भी ऐसी मारुति वैन कैसे स्कूलों से अटैच हैं। वैन संचालकों को गैस सिलेंडर कहां से मिलते हैं? इस मामले में गैस एजेंसियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।
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स्कूली गाड़ियां सीज होने के बाद तमाम स्कूली बच्चे भारी भरकम बैग लादकर पैदल घर जाते दिखे। स्कूलों में छुट्टी के बाद बच्चे बाहर निकले तो गाड़ियां न देख परेशान हो गए। कुछ बड़े बच्चे तो बैग लादकर घरों को पैदल ही निकल लए। लेकिन बेहद छोटे बच्चों के सामने दिक्कत खड़ी हो गई। स्कूलों ने परिजनों को जानकारी दी तो परिजन स्कूल पहुंच गए।
जांच अभियान के दौरान यह बात समने आयी कि स्कूली वाहनों में परिवहन प्रावधानों की घोर अनदेखी जा रही है। स्कूली वाहनों में सुरक्षा जाली, लो फ्लोर सीढ़ियां, अग्निशमन उपकरण, सीट के सामने बैग रखने की बेंच, फर्स्ट एड बाक्स नहीं मिले। गाड़ियों पर ‘स्कूल बस’ या स्कूल के नंबर, प्रशासन के नंबर नहीं लिखे थे।
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स्कूली वाहनों की बदहाल स्थिति और बच्चों की जिंदगी के साथ हो रहे खिलवाड़ को लेकर ‘अमर उजाला’ ने प्रमुखता से खबरें प्रकाशित की थीं। सहारनपुर हादसे में कई बच्चों की मौत के बाद अमर उजाला ने इस पर गंभीरता दिखाई और प्रशासन को आईना दिखाया कि कैसे स्कूली वाहन बच्चों की जिंदगी के साथ खेल रहे हैं। इसके बाद बुधवार को परिवहन आयुक्त ने सभी डीएम, एसएसपी और आरटीओ को निर्देशित किया कि वह तत्काल अभियान चलाएं। निर्देश पर एआरटीओ (प्रवर्तन) आरके सिंह और एसपी ट्रैफिक राजकमल यादव की अगुवाई में शहर के छह प्रमुख स्कूलों सेंट मेरीज कान्वेंट, व्वायज हाईस्कूल, महर्षि पंतजलि विद्या मंदिर, सेंट एंथोनी स्कूल एंड कालेज, मेरी लूकस समेत छह स्कूलों के पास सघन जांच अभियान चलाया। एआरटीओ प्रवर्तन आरके सिंह ने बताया कि अभियान के दौरान तीन बसों, चार टाटा मैजिक और 15 मारुति वैन को सीज कर दिया गया।
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अभियान के दौरान छह ऐसी मारूति वैन को सीज कर दिया गया जो गैस सिलेंडर से संचालित की जा रही थी। इसी तरह की मारुति वैन में ही विस्फोट होने से सहारनपुर में शिक्षिका समेत कई बच्चों की मौत हो गई थी। सवाल उठता है कि जानकारी के बाद भी ऐसी मारुति वैन कैसे स्कूलों से अटैच हैं। वैन संचालकों को गैस सिलेंडर कहां से मिलते हैं? इस मामले में गैस एजेंसियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।
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स्कूली गाड़ियां सीज होने के बाद तमाम स्कूली बच्चे भारी भरकम बैग लादकर पैदल घर जाते दिखे। स्कूलों में छुट्टी के बाद बच्चे बाहर निकले तो गाड़ियां न देख परेशान हो गए। कुछ बड़े बच्चे तो बैग लादकर घरों को पैदल ही निकल लए। लेकिन बेहद छोटे बच्चों के सामने दिक्कत खड़ी हो गई। स्कूलों ने परिजनों को जानकारी दी तो परिजन स्कूल पहुंच गए।
जांच अभियान के दौरान यह बात समने आयी कि स्कूली वाहनों में परिवहन प्रावधानों की घोर अनदेखी जा रही है। स्कूली वाहनों में सुरक्षा जाली, लो फ्लोर सीढ़ियां, अग्निशमन उपकरण, सीट के सामने बैग रखने की बेंच, फर्स्ट एड बाक्स नहीं मिले। गाड़ियों पर ‘स्कूल बस’ या स्कूल के नंबर, प्रशासन के नंबर नहीं लिखे थे।