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एसआरएन के कितने डाक्टर कर रहे हैं प्राइवेट प्रैक्टिस ः हाईकोर्ट
Allahabad
Updated Fri, 27 Jun 2014 05:30 AM IST
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। मोतीलाल नेहरू मेडिकल कालेज और उससे संबद्ध स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल के प्रोफेसरों, डाक्टरों द्वारा प्राइवेट प्रैक्टिस किए जाने की शिकायत पर हाईकोर्ट ने कालेज के प्राचार्य से जवाब मांगा है। उनसे पूछा है कि कितने प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे हैं। क्या एक या अधिक लोग ऐसा कर रहे हैं। यदि ऐसा है तो अस्पताल प्रशासन ने क्या कदम उठाए हैं। क्या शासन को इस बारे में कोई जानकारी दी गई है। कोर्ट ने प्राचार्य को विस्तृत जवाब देने का निर्देश दिया है। मामले पर सुनवाई न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की खंडपीठ ने की।
अदालत ने मेडिकल कालेज में पढ़ा रहे अध्यापकों की योग्यता के बारे में भी जानकारी मांगी है। विशेष रूप से आर्थो विभाग के डॉ. एके वर्मा के संबंध में बताने को कहा है कि किस प्रकार से वह कालेज में पढ़ाने के लिए योग्य हैं। याचिका में आरोप है कि मेडिकल काउंसिल ने इस संबंध में आपत्ति की है। अदालत ने अस्पताल और कालेज को पिछले पांच वर्षों में मिले फं ड और उनके उपयोग के बारे में भी जानकारी मांगी है। यह भी पूछा है कि क्या पिछले वर्षों के दौरान खरीदा गया एक लाख रुपये से अधिक मूल्य का कोई उपकरण खराब पड़ा है। अदालत ने प्राचार्य से मेडिकल काउंसिल की दो जुलाई 2009 की रिपोर्ट में उठाई गई कमियों को दूर करने के बारे में भी जानकारी मांगी है।
अधिवक्ता रवि सिंह द्वारा दाखिल जनहित याचिका में मेडिकल कालेज में अयोग्य शिक्षकों की भर्ती करने तथा अस्पताल में सुविधाओं का अभाव, उपकरणों के खराब होने और बदतर हालात का मामला उठाया है। बृहस्पतिवार को मेडिकल कालेज के प्राचार्य द्वारा हलफनामा दाखिल किया गया। कोर्ट ने याची अधिवक्ता को लोक सेवा आयोग को भी सचिव के माध्यम से पक्षकार बनाने का निर्देश दिया है। आर्थो विभागाध्यक्ष डॉ. डीसी श्रीवास्तव और डॉ. एके वर्मा को प्राचार्य के माध्यम से नोटिस सर्व कराने का निर्देश दिया है। याचिका पर 30 जून को सुनवाई होगी।
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अदालत ने मेडिकल कालेज में पढ़ा रहे अध्यापकों की योग्यता के बारे में भी जानकारी मांगी है। विशेष रूप से आर्थो विभाग के डॉ. एके वर्मा के संबंध में बताने को कहा है कि किस प्रकार से वह कालेज में पढ़ाने के लिए योग्य हैं। याचिका में आरोप है कि मेडिकल काउंसिल ने इस संबंध में आपत्ति की है। अदालत ने अस्पताल और कालेज को पिछले पांच वर्षों में मिले फं ड और उनके उपयोग के बारे में भी जानकारी मांगी है। यह भी पूछा है कि क्या पिछले वर्षों के दौरान खरीदा गया एक लाख रुपये से अधिक मूल्य का कोई उपकरण खराब पड़ा है। अदालत ने प्राचार्य से मेडिकल काउंसिल की दो जुलाई 2009 की रिपोर्ट में उठाई गई कमियों को दूर करने के बारे में भी जानकारी मांगी है।
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अधिवक्ता रवि सिंह द्वारा दाखिल जनहित याचिका में मेडिकल कालेज में अयोग्य शिक्षकों की भर्ती करने तथा अस्पताल में सुविधाओं का अभाव, उपकरणों के खराब होने और बदतर हालात का मामला उठाया है। बृहस्पतिवार को मेडिकल कालेज के प्राचार्य द्वारा हलफनामा दाखिल किया गया। कोर्ट ने याची अधिवक्ता को लोक सेवा आयोग को भी सचिव के माध्यम से पक्षकार बनाने का निर्देश दिया है। आर्थो विभागाध्यक्ष डॉ. डीसी श्रीवास्तव और डॉ. एके वर्मा को प्राचार्य के माध्यम से नोटिस सर्व कराने का निर्देश दिया है। याचिका पर 30 जून को सुनवाई होगी।
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