{"_id":"8-46248","slug":"Allahabad-46248-8","type":"story","status":"publish","title_hn":"पश्चिमी छोड़ हर जगह गिरा सपा का जनाधार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पश्चिमी छोड़ हर जगह गिरा सपा का जनाधार
Allahabad
Updated Sun, 18 May 2014 05:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इलाहाबाद। लोकसभा चुनाव में इलाहाबाद और फूलपुर संसदीय क्षेत्रों से करारी शिकस्त ने समाजवादी पार्टी के नेताओं को पस्त कर दिया है। जाति समीकरण बिठाकर मैदान मारने का दावा करने वाली समाजवादी पार्टी का इस बार के चुनाव में विधानसभावार भी प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा। फूलपुर संसदीय क्षेत्र के शहर पश्चिमी विधानसभा को छोड़ दिया जाए तो दोनों लोकसभा क्षेत्रों की हर विधानसभा में सपा की हालत पतली रही। दोनों क्षेत्रों में पार्टी का विधानसभावार मत प्रतिशत वर्ष 2009 के मुकाबले आठ से दस प्रतिशत तक घट गया। यह हाल तब हुआ जब इस बार नए मतदाताओं की संख्या में अप्रत्याशित रूप से बढ़ोतरी हुई।
पिछले लोकसभा चुनाव के मुकाबले इस बार दोनों संसदीय क्षेत्रों में साढ़े सात लाख से अधिक नए मतदाता बने। पार्टी ने इलाहाबाद से रेवती रमण सिंह की हैट्रिक और फूलपुर संसदीय क्षेत्र से धर्मराज सिंह पटेल की जीत सुनिश्चित करने के लिए जाति समीकरण का पासा फेंका। दोनों की संसदीय क्षेत्रों में पार्टी ने परंपरागत वोट बैंक मुस्लिम और यादव को अपना मानते हुए पटेल, ब्राह्मण, कुर्मी, ठाकुर मतदाताओं को लुभाने का प्रयास किया। सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, राष्ट्रीय महासचिव डॉ.रामगोपाल यादव, कबीना मंत्री आजम खां, शिवपाल सिंह यादव ने जनसभाएं कर इन बिरादियों को साधने में कोई कसर नहीं छोड़ी लेकिन मोदी लहर ऐसी चली कि विधानसभावार समाजवादी पार्टी का मत प्रतिशत वर्ष 2009 के मुकाबले बेहद कम हो गया।
फूलपुर संसदीय क्षेत्र के शहर पश्चिमी विधानसभा में सपा का मत प्रतिशत में 2009 में 18.42 के मुकाबले इस बार 20.29 प्रतिशत रहा। मुस्लिम बहुल फाफामऊ और फूलपुर में पार्टी का मत प्रतिशत करीब 10 प्रतिशत घट गया। इसी तरह इलाहाबाद संसदीय क्षेत्र के मुस्लिम बहुल शहर दक्षिणी विधानसभा में सपा का मत प्रतिशत करीब आठ प्रतिशत घट गया, जबकि पार्टी को इस क्षेत्र से काफी उम्मीद थी। सपा के गढ़ कहे जाने वाले करछना, मेजा कोरांव में भी मत प्रतिशत आठ से दस प्रतिशत तक कम रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन
पिछले लोकसभा चुनाव के मुकाबले इस बार दोनों संसदीय क्षेत्रों में साढ़े सात लाख से अधिक नए मतदाता बने। पार्टी ने इलाहाबाद से रेवती रमण सिंह की हैट्रिक और फूलपुर संसदीय क्षेत्र से धर्मराज सिंह पटेल की जीत सुनिश्चित करने के लिए जाति समीकरण का पासा फेंका। दोनों की संसदीय क्षेत्रों में पार्टी ने परंपरागत वोट बैंक मुस्लिम और यादव को अपना मानते हुए पटेल, ब्राह्मण, कुर्मी, ठाकुर मतदाताओं को लुभाने का प्रयास किया। सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, राष्ट्रीय महासचिव डॉ.रामगोपाल यादव, कबीना मंत्री आजम खां, शिवपाल सिंह यादव ने जनसभाएं कर इन बिरादियों को साधने में कोई कसर नहीं छोड़ी लेकिन मोदी लहर ऐसी चली कि विधानसभावार समाजवादी पार्टी का मत प्रतिशत वर्ष 2009 के मुकाबले बेहद कम हो गया।
विज्ञापन
फूलपुर संसदीय क्षेत्र के शहर पश्चिमी विधानसभा में सपा का मत प्रतिशत में 2009 में 18.42 के मुकाबले इस बार 20.29 प्रतिशत रहा। मुस्लिम बहुल फाफामऊ और फूलपुर में पार्टी का मत प्रतिशत करीब 10 प्रतिशत घट गया। इसी तरह इलाहाबाद संसदीय क्षेत्र के मुस्लिम बहुल शहर दक्षिणी विधानसभा में सपा का मत प्रतिशत करीब आठ प्रतिशत घट गया, जबकि पार्टी को इस क्षेत्र से काफी उम्मीद थी। सपा के गढ़ कहे जाने वाले करछना, मेजा कोरांव में भी मत प्रतिशत आठ से दस प्रतिशत तक कम रहा।
विज्ञापन