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विवाहित बेटी को भूमिधरी में बराबरी के हक की मांग
Allahabad
Updated Sat, 15 Mar 2014 05:30 AM IST
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इलाहाबाद। हिंदू उत्तराधिकार के तहत शादीशुदा बेटी को भले ही पिता की संपत्ति पर बराबरी का हक है, मगर उत्तर प्रदेश के राजस्व कानूनों में विवाहित बेटी का पिता की भूमिधरी(कृषि भूमि) पर अधिकार बहुत बाद में आता है। इस विसंगति के कारण विवाहित पुत्रियां कृषि भूमि पर अधिकार पाने से वंचित हो जाती हैं। दिल्ली के दुलाल कुमार मिश्र ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका के माध्यम से इस विसंगति को उठाया है। याचिका पर मुख्य न्यायाधीश डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता की खंडपीठ ने सुनवाई की। न्यायालय ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर इस मामले पर सात मई तक अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।
याचिका में उत्तर प्रदेश भूमि जमींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार अधिनियम 1950 की धारा 171 की वैधानिकता को चुनौती दी गई है। यह धारा कृषि भूमि पर उत्तराधिकारियों की श्रेणी का वर्णन करती है। कहा गया है कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 6 और 8 में संशोधन कर दिया गया है। संशोधित अधिनियम नौ सितंबर 2005 से लागू भी हो गया है। इस संशोधन से हिंदू उत्तराधिकार में विवाहित पुत्रियों को भी पिता की संपत्ति पर बराबर कर अधिकार दिया गया है। मगर उत्तर प्रदेश में कृषि भूमि के उत्तराधिकार पर भूमि सुधार अधिनियम की धारा 171 प्रभावी होती है जिसमें विवाहित पुत्री का अधिकार बहुत बाद में आता है। इस कारण से राजस्व अधिकारी कृषि भूमि पर नामांतरण के विवाहित पुत्रियों के प्रार्थनापत्र अस्वीकार कर देते हैं।
याचिका में भूमि सुधार अधिनियम की धारा 171 को हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के विरोधाभासी घोषित करने की मांग की गई है। याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश खंडपीठ ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए कहा कि चूंकि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम में संशोधन हो गया है इसलिए भूमि सुधार अधिनियम के प्रावधानों पर भी विचार करने की आवश्यकता है।
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याचिका में उत्तर प्रदेश भूमि जमींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार अधिनियम 1950 की धारा 171 की वैधानिकता को चुनौती दी गई है। यह धारा कृषि भूमि पर उत्तराधिकारियों की श्रेणी का वर्णन करती है। कहा गया है कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 6 और 8 में संशोधन कर दिया गया है। संशोधित अधिनियम नौ सितंबर 2005 से लागू भी हो गया है। इस संशोधन से हिंदू उत्तराधिकार में विवाहित पुत्रियों को भी पिता की संपत्ति पर बराबर कर अधिकार दिया गया है। मगर उत्तर प्रदेश में कृषि भूमि के उत्तराधिकार पर भूमि सुधार अधिनियम की धारा 171 प्रभावी होती है जिसमें विवाहित पुत्री का अधिकार बहुत बाद में आता है। इस कारण से राजस्व अधिकारी कृषि भूमि पर नामांतरण के विवाहित पुत्रियों के प्रार्थनापत्र अस्वीकार कर देते हैं।
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याचिका में भूमि सुधार अधिनियम की धारा 171 को हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के विरोधाभासी घोषित करने की मांग की गई है। याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश खंडपीठ ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए कहा कि चूंकि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम में संशोधन हो गया है इसलिए भूमि सुधार अधिनियम के प्रावधानों पर भी विचार करने की आवश्यकता है।
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