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कला के लिए जीना ही है, जिंदगी का मकसद
Allahabad
Updated Fri, 03 Jan 2014 05:42 AM IST
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इलाहाबाद। ‘अमर उजाला’ के ‘बेटी ही बचाएगी अभियान’ के तहत बीते दिनों हुई पेंटिंग प्रतियोगिता में इलाहाबाद के चित्रकार पंकज कुमार यादव ने भी बाजी मारी। राष्ट्रीय स्तर पर आमंत्रित तेरह हजार से भी ज्यादा प्रविष्टियों में से चुनी गई कुल बारह प्रविष्टियों में से पंकज की पेंटिंग भी शामिल है। ‘अमर उजाला’ के कैलेंडर के लिए विशिष्ट बारह चित्रों का चयन प्रसिद्ध चित्रकार अर्पणा कौर ने किया।
मकसद यह कि पुरस्कृत पेटिंग, वर्ष भर आपको याद दिलाती रहेंगी, बेटी घर में सुख समृद्धि लाएगी और जब मुसीबत आएगी तो बेटी ही बचाएगी। अपनी उपलब्धि पर काफी खुश दिखे पंकज ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में अपना कला सफर साझा किया। बोले, सुबह अखबार आने के साथ ही कई दोस्तों ने भी इस उपलब्धि पर बधाई दी। उपलब्धियां खुश करती हैं, साथ ही जिम्मेदारी भी देती हैं कि कुछ और बेहतर कर सकूं। अब तो बतौर कॅरियर कला मेरी जिंदगी है। कला के लिए ही जीना और मरना, जिंदगी का मकसद बन गया है।
गायत्री फाइन आर्ट्स सोसाइटी के छात्रों को कला की बारीकियां सिखाने वाले पंकज मूल रूप से मुहम्मदपुर, हथिगहां के रहने वाले हैं। किसान पिता के बेटे पंकज भी यहां प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी के लिए आए थे लेकिन कला के प्रति रुझान ऐसी रही कि दो वर्ष बीए की पढ़ाई छोड़कर बीएफए और फिर ग्वालियर विश्वविद्यालय से एमएफए किया। इस बीच राज्य ललित कला अकादमी की स्कॉलरशिप के तहत गाइड मोहम्मद युसूफ की देखरेख में भारत कला भवन, भोपाल से जुड़ गए। इससे पहले पंकज को राज्य ललित कला अकादमी की राष्ट्रीय चित्रकला प्रतियोगिता में भी मुख्यमंत्री द्वारा पुरस्कृत किया जा चुका है।
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मकसद यह कि पुरस्कृत पेटिंग, वर्ष भर आपको याद दिलाती रहेंगी, बेटी घर में सुख समृद्धि लाएगी और जब मुसीबत आएगी तो बेटी ही बचाएगी। अपनी उपलब्धि पर काफी खुश दिखे पंकज ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में अपना कला सफर साझा किया। बोले, सुबह अखबार आने के साथ ही कई दोस्तों ने भी इस उपलब्धि पर बधाई दी। उपलब्धियां खुश करती हैं, साथ ही जिम्मेदारी भी देती हैं कि कुछ और बेहतर कर सकूं। अब तो बतौर कॅरियर कला मेरी जिंदगी है। कला के लिए ही जीना और मरना, जिंदगी का मकसद बन गया है।
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गायत्री फाइन आर्ट्स सोसाइटी के छात्रों को कला की बारीकियां सिखाने वाले पंकज मूल रूप से मुहम्मदपुर, हथिगहां के रहने वाले हैं। किसान पिता के बेटे पंकज भी यहां प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी के लिए आए थे लेकिन कला के प्रति रुझान ऐसी रही कि दो वर्ष बीए की पढ़ाई छोड़कर बीएफए और फिर ग्वालियर विश्वविद्यालय से एमएफए किया। इस बीच राज्य ललित कला अकादमी की स्कॉलरशिप के तहत गाइड मोहम्मद युसूफ की देखरेख में भारत कला भवन, भोपाल से जुड़ गए। इससे पहले पंकज को राज्य ललित कला अकादमी की राष्ट्रीय चित्रकला प्रतियोगिता में भी मुख्यमंत्री द्वारा पुरस्कृत किया जा चुका है।
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